BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 02 नवंबर, 2006 को 16:40 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
राजभाषा या काजभाषा भी..?

किताब
लिखा हुआ समझ में भी तो आना चाहिए
हिंदी से विमुखता और अंग्रेज़ी से मोह पर कई पाठकों ने अपने विचार भेजे और अच्छा ही है कि इस तरह की एक सोच सामने आ रही है.

लेकिन इससे ही जुड़ा एक और सवाल है और आइए आज उसे भी खंगाल लिया जाए.

हिंदी की हिमायत करने वाले कुछ लोग इसके पूरी तरह शुद्ध होने पर भी ज़ोर देते हैं.

यानी, हिंदी बोली या लिखी जाए तो वह पूरी तरह ख़ालिस हो. उसमें उर्दू के शब्दों का समावेश पूरी तरह वर्जित हो.

लेकिन देखिए, लिखते-लिखते ही 'हिमायत' या 'ख़ालिस' मेरी लेखनी से कितनी सहजता से निकल आए.

 जो शब्द भाषा में इस तरह घुलमिल गए हों कि आपकी सोच का एक हिस्सा बन गए हों उन्हें विदेशी या पराया मानना कितना उचित है.

जहाँ तक मेरी सोच का सवाल है, तो मेरा मानना है कि जो शब्द भाषा में इस तरह घुलमिल गए हों कि आपकी सोच का एक हिस्सा बन गए हों उन्हें विदेशी या पराया मानना कितना उचित है.

यह सही है कि हिंगलिश जैसे प्रयोग अस्वीकार्य हैं. आम बोलचाल में आप देखिए लोग शायद की कोई एक वाक्य ऐसा बोल पाते हों जिसमें अंग्रेज़ी का कोई शब्द शामिल न हो.

उर्दू कितनी विदेशी

लेकिन उर्दू..? क्या भारत में वह विदेशी है? यह ज़रा सोचने की बात है.

रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी या ब्रजनारायण चकबस्त की भाषा को आप विदेशी कैसे कह सकते हैं?

कुछ अरसा पहले मुंबई यात्रा के दौरान अभिनेता आशुतोष राणा से बात हो रही थी.

वह उन गिनेचुने फ़िल्मी कलाकारों में हैं जो हिंदी बोलने में किसी तरह की हिचक या झिझक महसूस नहीं करते.

मैंने उन्हें इसी बात पर बधाई दे डाली तो वह थोड़ा सकुचा गए. बोले, "हिंदी मेरे अपनों की भाषा है, मेरे सपनों की भाषा है. यह वह भाषा है जिसमें मैं सोचता हूँ, सपने देखता हूँ".

अलगथलग रह कर उन्नति?

लेकिन उनका भी यही कहना था कि वह भाषा समृद्ध नहीं हो सकती जो अन्य भाषा के शब्दों को आत्मसात करने का साहस नहीं रखती.

 हिंदी मेरे अपनों की भाषा है, मेरे सपनों की भाषा है. यह वह भाषा है जिसमें मैं सोचता हूँ, सपने देखता हूँ".
आशुतोष राणा

यह गंगाजमुनी संस्कृति ही तो इसे इतना मोहक, इतना दिलकश बनाती है.

अब अंग्रेज़ी को ही देखिए, चटनी, जंगल, पंडित आदि. हिंदी के ये शब्द अंग्रेज़ी में ऐसे घुलमिल गए हैं कि ये अंग्रेज़ी शब्दकोश तक में दिख जाएँगे.

हिंदी को राजभाषा के साथ अगर काजभाषा बनना है तो उसे सहज, सरल होना ही पड़ेगा.

अगर वह सिर पर से ही निकल जाए तो दिलों में जगह कैसे बना पाएगी?

हिंदीहिंदी क्यों पीछे है?
आज़ादी के बाद भी अंग्रेज़ी बोलना गर्व और हिंदी बोलना शर्म की बात?
इंटरनेटपत्रिका का औचित्य
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम का मनोरंजन का पन्ना क्यों बना 'बीबीसी पत्रिका'?
डॉक्टरपत्रिका के नए आयाम
बीबीसी पत्रिका आपके सवालों के जवाब दिलवाएगी विशेषज्ञों से.
पत्रिकापत्रिका पर आपकी राय
बीबीसी पत्रिका में और क्या होना चाहिए यह आपकी राय निर्धारित करेगी.
अख़बारमीडिया कितना अहम?
मीडिया की भूमिका कितनी अहम है प्रस्तुत है इसी का एक आकलन.
इससे जुड़ी ख़बरें
अचला शर्मा की कुछ कविताएँ
26 अक्तूबर, 2006 | पत्रिका
आधुनिक समाज के समय का एक सच
02 नवंबर, 2006 | पत्रिका
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>