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शनिवार, 17 सितंबर, 2005 को 17:29 GMT तक के समाचार
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बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना!
शादी का जोड़ा
मेहमानों की बड़ी संख्या को रुतबे वाला माना जाता है
भारत के बहुत से इलाक़ों में शादी-ब्याह में मेहमानों की संख्या को कम रखने की कोशिश की जाने लगी है लेकिन अब भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ मेहमानों की संख्या को प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है .

लेकिन परिवार, रिश्तादारों और दोस्तों को आमंत्रित करने के बाद भी अगर मेहमानों की संख्या प्रतिष्ठा दिखाने लायक ना हो तो क्या किया जाए?

इस सवाल का हल निकालने के लिए राजस्थान में एक एजेंसी शुरू की गई है जो शादी-ब्याह में मेहमान जुटाने में मदद करती है.

अभी तक तो यही सुनने में आता था कि नेता लोग रैलियों वग़ैरा में भीड़ जुटाने के लिए लोगों को पैसे देकर बुलाते थे लेकिन अब शादी-ब्याह जैसी सामाजिक परंपरा में भी अपनी धाक जमाने के लिए इस तरीक़े का इस्तेमाल किया जाने लगा है.

और मौक़ा भाँपकर इसका व्यासायीकरण भी हो गया. राजस्थान में शादी-ब्याह में अगर भारी संख्या में मेहमान ना जुटें तो इसे शर्म की बात माना जाता है.

राजस्थान के जोधपुर शहर में लोगों को इस 'शर्म' से बचाने के लिए एक एजेंसी खुल गई है जिसका नाम रखा गया है - बेस्ट गेस्ट सेंटर यानी बेहतरीनन मेहमान केंद्र.

इस एजेंसी के संस्थापक एम आई सैयद को अपने एक दोस्त की शादी से यह विचार मिला. उनके दोस्त ने अपनी जाति से भिन्न जाती की लड़की से शादी की तो उनके परिवार के लोग उसमें शामिल नहीं हुए, सिर्फ़ पाँच मेहमान ही शादी में शामिल हो सके.

मेहमान और रुतबा
कभी-कभी ऐसा होता है कि लोग ज़्यादा लंबा सफ़र नहीं कर पाते हैं या फिर लोगों के पास बिल्कुल भी समय नहीं होता है, ऐसे में हमारी एजेंसी की सेवाओं की ज़रूरत होती है.
एमआई सैयद

सैयद ने बीबीसी को बताया, "मैंने सोचना शुरू किया, अगर हम किसी तरह से कुछ और मेहमान ऐसे मौक़ों पर जुटा सकें तो सबका अच्छा वक़्त गुज़र सकता है. यह विचार मेरे मित्र को भी बहुत पसंद आया."

"बस यहीं से यही ख़याल कारोबारी विचार में तब्दील हो गया."

बेस्ट गेस्ट एजेंसी के रजिस्टर में क़रीब 70 ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं जो बुलाए जाने पर परंपरागत वेशभूषा या पश्चिमी परिधानों में सजधजकर शादी-ब्याह में शामिल हो सकते हैं.

उन्हें परिवार की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दी जाती है और उन्हें अतीत का दोस्त बनने के लिए कहा जाता है.

बनावटी दोस्त

सैयद बताते हैं कि उनके पास ऐसे मेहमानों के लिए माँग बढ़ती जा रही है क्योंकि बड़े परिवार तो लुप्त होते जा रहे हैं और रिश्तेदारों के साथ भी कम ही संबंध रहने लगे हैं.

उनका कहना था, "अगर किसी शादी-ब्याह में ख़ूब सारे मेहमान आएँ तो लोग सोचते हैं कि समाज में आपका अच्छा प्रभाव और रुतबा है."

"कभी-कभी ऐसा होता है कि लोग ज़्यादा लंबा सफ़र नहीं कर पाते हैं या फिर लोगों के पास बिल्कुल भी समय नहीं होता है, ऐसे में हमारी एजेंसी की सेवाओं की ज़रूरत होती है."

शादी की मेंहदी

शादी-ब्याह में शामिल होने के लिए मेहमान बनने के लिए जो लोग राज़ी होते हैं उनमें छात्र, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य पेशावर लोग भी होते हैं.

सैयद का कहना था, "आप यह जानकर चौंक सकते हैं कि आख़िर डॉक्टर मेहमान बनने के लिए क्यों राज़ी होते हैं लेकिन मेरा मानना है कि डॉक्टरों को भी एक अच्छी शाम गुज़ारने में भला क्या ऐतराज़ हो सकता है, और हम उन्हें अच्छा पैसा भी तो देते हैं."

इस तरह के नक़ली मेहमानों को शादी-ब्याह में शामिल होने के लिए अलग-अलग दर से पैसा दिया जाता है जो उनकी वेशभूषा और व्यक्तित्व के आधार पर तय की जाती है. मसलन जो व्यक्ति गोरा-चिट्टा है, स्वस्थ और आकर्षक है और बातचीत करने में अच्छा है तो उसे 600 रुपए तक की पेशकश की जा सकती है.

सैयद का कहना था कि उन्हें मेहमानों के लिए राज्य के बाहर से भी परिवारों ने संपर्क किया है, जिनमें बंगलौर, कोलकाता और यहाँ तक कि दुबई जैसे शहर भी शामिल हैं.

सैयद कहते हैं, "मेरे मेहमान पूरी तरह से प्रशिक्षण लिए हुए होते हैं. हम उन्हें परिवार विशेष के बारे में हर पहलू से जानकारी देते हैं."

"इस तरह किराए के मेहमान पहले उस परिवार में जाकर उसका रहन-सहन देखते हैं तब उन्हीं की तरह से बर्ताव करना सीखते हैं ताकि उनमें घुलमिल सकें."

सैयद बताते हैं कि वे अब तक क़रीब दस शादियों में किराए के मेहमान पेश कर चुके हैं और उनमें किसी को भी पता नहीं चला कि वे असली नहीं बल्कि किराए के मेहमान थे.

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