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14-वर्षीय दलित लड़की ने 'तलाक़' दिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्रप्रदेश में एक 14 वर्षीय दलित लड़की काफ़ी संघर्ष के बाद अपने 17 वर्षीय पति को 'तलाक़' देने में कामयाब हो गई है. तेलंगाना क्षेत्र में बाल-विवाह की प्रथा आम है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि इतनी कम उम्र की किसी लड़की ने इलाक़े के बड़े-बुज़ुर्गों को अपनी बात मानने पर बाध्य कर दिया. सुशीला नाम की लड़की की दो साल पहले शादी हुई थी. बीबीसी संवददाता उमर फ़ारूक़ के अनुसार सुशीला ने छह महीने पहले पुलिस से शिकायत की कि उनके पति ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है. लेकिन पति-पत्नी के अलग होने की बात आई तो इलाक़े के बड़े-बुज़ुर्गों ने इसका जमकर विरोध किया. उनका कहना था कि वहाँ प्रचलित हिंदू रीति-रिवाज के मुताबिक तलाक़ नहीं हो सकता. लेकिन सुशीला ने संघर्ष किया और कहा कि वे वापस स्कूल में पढ़ने के लिए जाना चाहती हैं. उन्होंने धमकी दी कि यदि उनकी बात मानी नहीं गई तो वे आत्महत्या कर लेंगी. इसके बाद लड़की और लड़के के गाँवों को बड़े-बुज़ुर्ग एकत्र हुए और घोषणा की कि दोनो का 'तलाक़' हो गया है. एक पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में दोनो पक्षों में एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए गए और लड़के के परिवार से कहा गया कि वह शादी के समय लड़की को दहेज में दिए गए आभूषण आदि लौटा दें. एक ग़ैर-सरकारी संस्था एमवी फ़ाउडेशन, जिसने लड़की की पूरे मामले में सहायता की थी, अब उसे स्थानीय स्कूल में पढ़ाएगी. |
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