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बाल विवाह रोकने की 'सज़ा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य प्रदेश के अधिकारी बाल विवाह का विरोध करने वाली एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता के हाथ काटे जाने की घटना की जाँच कर रहे हैं. मंगलवार को शकुंतला वर्मा नाम की महिला सामाजिक कार्यकर्ता का एक हाथ काटे जाने और दूसरे हाथ को बुरी तरह जख़्मी किए जाने की घटना के बाद पूरे इलाक़े में सनसनी फैल गई है. राज्य के अधिकारियों का कहना है कि वे भांगरा गाँव में बाल विवाह रोकने की कोशिश कर रही थीं तभी लोगों ने उनके ऊपर हमला कर दिया. भारत में बाल विवाह ग़ैर-क़ानूनी है और दंडनीय अपराध है लेकिन ग्रामीण इलाक़ों में अब भी बदस्तूर जारी है. बुधवार को भारत में आखा तीज का दिन था, इस दिन भारत के कई हिस्सों में बाल विवाह बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाते हैं. मध्य प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पी आहूजा का कहना है कि गाँव के लोग बाल विवाह के बारे में शकुंतला वर्मा की टिप्पणियों से बहुत बुरी तरह से नाराज़ हो गए थे इसलिए यह हमला हुआ होगा. शकुंतला वर्मा पिछले चार दिनों से इस गाँव में बाल विवाह के विरोध में प्रचार कर रही थीं. मुख्यमंत्री राज्य के मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर यह मानने को तैयार नहीं है कि इस हमले का बाल विवाह से कोई सीधा संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकना सरकार के लिए संभव नहीं है. उन्होंने कहा, "बाल विवाह को रोकना संभव नहीं है, क्या नशाख़ोरी और अस्पृश्यता को रोक पाना संभव हो पाया है, गाँधी जी जब यह सब नहीं रोक पाए तो बाबूलाल गौर कैसे रोक सकता है? " स्थानीय पुलिस अधिकारी आर एन बोरना ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया है कि हमला एक बालिका वधू के भाई ने किया था. शकुंतला वर्मा का इलाज एक स्थानीय अस्पताल में चल रहा है और वे ख़तरे से बाहर बताई जाती हैं. |
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