यहां पूरी 'किताब' नहीं, ख़रीदें एक 'चैप्टर'

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    • Author, चिरंतना भट्ट
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

डिजिटलाइज़ेशन के इस दौर में अब टेक्स्ट बुक भी किराए पर मिलने लगी हैं.

'कॉपीकिताब डॉटकॉम' नाम की एक वेबसाइट है जहां ना केवल किताब बल्कि ज़रूरत के हिसाब से किताब का कोई चुनिंदा चैप्टर भी किराए पर मिल सकता है.

छात्रों के लिए किताबों की क़ीमत एक बड़ी परेशानी होती है. ऐसे में यहां मिलने वाली क़िताबें अपनी असल क़ीमत से 70 प्रतिशत तक कम पर छात्र के पास डिजिटली (मोबाइल या टैबलेट में) रह सकती है.

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'कॉपीकिताब' शुरू होने के पीछे की कहानी बयान करते हुए संस्थापक अमित श्रीवास्तव बताते हैं, "सुमित (पार्टनर) और मैं साथ ही बड़े हुए हैं और दोनों ने एक साथ रीवा के सैनिक स्कूल से पढ़ाई की है."

वो बताते हैं, "शुरुआती पढ़ाई से लेकर कॉलेजों तक किताबें बहुत महंगी थीं और हम एक किताब के चार टुकड़े कर दोस्तों में बांट कर बारी-बारी से पढ़ा करते थे और ज़रूरत पड़ने पर चुनिंदा पन्नों के ज़ेरोक्स निकलवा लेते थे."

इसी समस्या को ध्यान रखते हुए हमने साल 2013 में 'कॉपीकिताब' की शुरूआत की.

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वो कहते हैं कि कॉलेज की एक किताब 300 रुपए तक हो सकती है लेकिन हो सकता है कि आपके लिए उसकी एक ही चैप्टर ज़रूरी हो, ऐसे में आपको इस साइट पर एक चैप्टर मात्र 10 रुपए में मिल जाएगी.

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फ़िलहाल यहां विभिन्न विषयों की किताबें हिंदी और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं. आने वाले वर्षों में 50 लाख विद्यार्थियों और 250 से अधिक प्रकाशकों को इस प्लेटफ़ॉर्म पर लाना 'कॉपीकिताब' का लक्ष्य है.

अमित कहते हैं, "ई-किताब से प्रकाशकों को नुक़सान नहीं बल्कि फ़ायदा होगा ये समझाने में बहुत समय लगा."

वो बताते हैं, "शिक्षा के क्षेत्र में 60 प्रतिशत असंगठित मार्केट है जिसमें सेकंड हैंड किताबों का मार्केट, किताबें रेंट पर देना और ज़ेरोक्स का व्यवसाय चलता है. ऐसे में लोग आपको प्रतिद्वंद्वी मान लेते हैं."

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डेढ़ साल से 'कॉपीकिताब' का इस्तेमाल कर रहे नमन गुप्ता बताते हैं, "पहले किताबों पर बहुत ख़र्च हो जाता था और हम कुछ दोस्त साथ मिलकर किताबें ख़रीदते थे लेकिन अब हम काफ़ी पॉकेट मनी बचा लेते हैं."

'कॉपीकिताब' शिक्षण संस्थानों के लिए डिजिटल लाइब्रेरीज़ शुरु करने में मदद करता है. कॉलेजों के लिए इन पुस्तकालयों की क़ीमत 5 से 10 लाख जबकि स्कूलों के लिए 2 से 5 लाख तक हो सकती है.

साइट ने अब तक 25 कॉलेजों में डिजिटल लाइब्रेरी शुरु की है और 4 लाख़ से ज़्यादा बार इसका ऐप डाउनलॉड हो चुका है.

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