ये गहने महिलाओं को छेड़खानी से बचाएंगे?

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- Author, चिरंतना भट्ट
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
छेड़छाड़ की ज़्यादातर घटना में लड़कियां या तो अपनी सुरक्षा नहीं कर पाती हैं. वो बच कर भागने की कोशिश करती हैं.
छेड़खानी के डर से वो घर से बाहर निकलना तो बंद नहीं कर सकती हैं, लेकिन उनके मन में एक डर ज़रुर बैठ जाता है.
महिलाओं के इस डर को एक पेंडेन्ट दूर कर सकता है, जिसे गले में पहनकर कोई भी महिला छेड़खानी से बच सकती है.
दिल्ली के मानिक, अविनाश, आयुश, चिराग और पारस, पढ़ाई के दौरान किसी नए प्रोजेक्ट को लॉन्च कर ने के बारे में सोच रहे थे.
अपनी रिसर्च के दौरान उन्होंने जाना कि संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वे के मुताबिक़, दुनियाभर में क़रीब हर तेरह सेकंड में कहीं ना कहीं एक महिला से छेड़छाड़ होती है.

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भारत में यह आंकड़ा क़रीब 23 मिनट का है.
भीड़भाड़ वाले शहरों में बलात्कार या अपहरण की ख़बरें भी सुनने को मिलती हैं. इस विषय पर इन पांचों दोस्तों ने ख़ासी चर्चा की.
एक दिन रात के वक़्त, पारस दिल्ली के मुनिरका के पास से गुज़र रहा था. यह वही जगह थी, जहां 'निर्भया' रेप केस हुआ था.
पारस ने अपने दोस्तों को कहा कि निर्भया केस के दो साल बाद भी, वहां उतना ही ख़तरा है, जितना पहले हुआ करता था.
फिर पांचों इंजीनियर दोस्तों ने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे महिलाओं की सुरक्षा बढ़े और वो ज़्यादा सुरक्षित महसूस करें.
इसी सोच ने 2014 में 'लीफ़ वियरेबल्स' को जन्म दिया.

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लीफ़ वियरेबल्स शुरु करने वाले पांचों दोस्तों की उम्र 22 साल के क़रीब थी. ये सभी दोस्त या तो आईआईटी या दिल्ली कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से पढ़े हूए हैं.
शुरूआत में इन्हें प्रोजेक्ट शुरु करने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा.
इनके पास, इस कॉलेज प्रोजेक्ट में निवेश के लिए ज़्यादा पैसे नहीं थे.
अपने स्टार्ट अप के लिए इन पांचों ने बिज़नस प्लान प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरु कर दिया.
दुबई में होने वाले जिटेक्स स्टूडेंट लैब प्रतियोगिता में लीफ़ की टीम को 1600 में से 1200 वोट मिले.
ऐसी कई प्रतियोगिताओं में जीतने के बाद, साल 2015 के अंत तक लीफ़ वियरेबल्स के उद्यमियों ने ढाई लाख़ अमरीकी डॉलर इकट्ठा किए और इसे अपनी कंपनी की शुरुआती पूंजी बनाया.

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इस स्मार्ट ज्वेलरी स्टार्ट अप में, पेंडेन्ट, ब्रेसलेट और की-चेन बनाए जाते हैं. इनमें एक छोटी सी गोलाकार मशीन होती है, जिसे ‘सेफ़र’ कहा जाता है.
इस लॉकेट, ब्रेसलेट या फ़िर की-चेन का उपयोग करने वाली महिला, अगर ख़ुद को ख़तरे में पाए, तो उसे तुरंत ही सेफ़र के बटन को दो बार दबाना होता है.
ऐसा करने पर परिवार और दोस्तों को ख़तरे का एसएमएस पहुंच जाता है. इस डिवाइस से जुड़े ऐप में जीपीएस फ़ंक्शन है, जिसमें यूज़र अपने लोकशन की जानकारी और समय फ़ीड कर सकता है.
इससे आप कहीं भी जाएं, ऐप से जुड़े परिवार के लोग या मित्र आपको ट्रैक कर सकते हैं.
डिवाइस में आपके लोकेशन के क़रीब के हॉस्पिटल और पुलिस स्टेशन की जानकारी भी होती है.

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कॉलेज स्टूडेंट तान्या ने बताया, “मैं चार महीने से सेफ़र यूज़ करती हूं. आप कहीं भी जाएं, आपके घर वाले जानते हैं कि आप कहां हैं. इस बात से मैं बहुत सुरक्षित महसूस करती हूं. इसके साइज़ और लुक की वजह से मैं इसे एक एक्सेसरी के तौर पर पहनती हूं.”
ग्राफ़िक डिज़ाइनर अदिश्री कक्कड़ जब देहरादून से दिल्ली आना चाहती थीं, तो सबसे ज़्यादा चिंता उनकी मां को होती थी. वो नहीं चाहती थीं कि अदिश्री दिल्ली में अकेली रहें.

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अदिश्री बताती हैं, “मैंने जब से सेफ़र यूज़ करना शूरु किया, तब से मेरी मां की चिंता घट गई है. मैं ऑफ़िस से निकलते वक़्त, उन्हें ऐप से अपनी लोकेशन के बारे में बता देती हूं. सेफ़र वॉक फ़ीचर बहुत काम आता है, क्योंकि मां को घर बैठे पता होता है कि मैं कब कहां पहुंच रही हूं.”
इस स्मार्ट ज्वेलरी की क़ीमत 3500 से 5000 के बीच है.
मानिक ने बताया, “अब तक इसके पांच हज़ार सेट बिक चुके हैं, एक हज़ार तो हमने तुर्की में भी बेचे हैं. हम अगले एक साल में दस लाख़ परिवारों को सुरक्षित करना चाहते हैं.”
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