क्यों सबसे अलग नज़र आ रही हैं कंगना रनौत?

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    • Author, ऐना एम एम वेट्टिकाड
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

प्रियंका चोपड़ा की 'मैरी कॉम' और सोनम कपूर अभिनीत 'नीरजा' की कामयाबी के बाद ये स्वाभाविक सवाल है- क्या कंगना रनौत भी बायोपिक फ़िल्म में काम करना चाहेंगी?

इसी सप्ताह एक सार्वजनिक समारोह में कंगना से ये पूछा गया कि क्या वे अपनी बहन के जीवन पर बनने वाली किसी फ़िल्म में काम करना चाहेंगी?

कंगना रनौत ने बिना पलक झपकाए ही सकारात्मक जवाब दिया. कंगना ने हंसते हुए कहा, “मैंने रंगोली से कहा है, मैं तुम पर एक फ़िल्म बनाना चाहती हूं. मैं तुम्हारे जीवन का कॉपी राइट चाहती हूं और मैं चाहती हूं कि मैं तुम्हारा, अपना और बाक़ी सब लोगों का रोल ख़ुद करूं.”

कंगना ने आगे कहा, "लेकिन गंभीरता के साथ कहूं, तो मुझे लगता है कि उसका जीवन मेरे जीवन से कहीं ज़्यादा दिलचस्प है. इसके लिए मैं अपने बहनोई को श्रेय दूंगी, क्योंकि वह पहले दिन से रंगोली को बहुत प्यार करते हैं. मुझे ऐसा प्रेमी नहीं मिला. इसलिए मैं सोचती हूं कि मेरा जीवन उतना रोमांचक नहीं है."

अगर इसे मज़ाक़ भी समझें तो भी कंगना कोई छोटी बात नहीं कह रही थीं. उनकी बहन रंगोली चंदेल, कंगना की मैनेजर भी हैं और इस महीने की एक प्रमुख पत्रिका के कवर पर कंगना के साथ उनकी तस्वीर भी छपी है.

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रंगोली एसिड हमले की पीड़िता हैं और इस भयावह अनुभव से उबरने का श्रेय वह अपने बहन की मदद को देती हैं.

रंगोली की कहानी में वह सब तत्व है- मुश्किलों और उससे पार पाने की कामयाबी- जो कोई फ़िक्शन राइटर गढ़ पाएगा.

ऐसे में अगर रंगोली की कहानी पर कोई फ़िल्म बनती है तो बहन के साथ अपनी निकटता के चलते कंगना के लिए उनका किरदार निभाना काफ़ी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा.

लेकिन हमने ये भी देखा है कि 10 साल पहले हिंदी फ़िल्मों में प्रवेश करने के बाद से ही कंगना रनौत चुनौतियों से भागने वालों में से नहीं हैं.

चुनौतियां को कबूल करने की क्षमता के साथ-साथ उनमें एक सहज आत्मविश्वास भी है जिसका नतीजा है कि कंगना उस मुकाम तक पहुंच गई हैं, जहां वे दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी हैं.

आज वो बॉक्स ऑफ़िस पर अपने दम पर फ़िल्म को कामयाब बनाने वाली भरोसेमंद स्टार हैं. इसके साथ ही वे फ़िल्म इंडस्ट्री में सबसे अपरंपरागत फ़िल्म अभिनेत्रियों में से एक हैं.

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इसे समझने के लिए सबसे बेहतर उदाहरण तो यही है कि वे इस साल अवॉर्ड्स सीज़न में ग़ैरहाज़िर दिख रही हैं.

उनके सहयोगी बताते हैं कि ऐसे आयोजनों में सांठ-गांठ और एक-दूसरे को फ़ायदा पहुंचाने का अनकहा क़रार जैसा होता है, लिहाजा उन्होंने ख़ुद को ऐसे आयोजनों से अलग कर लिया है.

ऐसे आयोजनों का बॉयकॉट आमिर ख़ान पहले ही कर चुके हैं, जिसकी मिसाल दी जाती है.

लेकिन अब तक ज़्यादातर लोगों को ये एहसास नहीं हुआ है कि इस पुरुष प्रधान फ़िल्म इंडस्ट्री में कोई महिला ऐसा साहस दिखा रही है.

ऐसी कई बातों से मालूम होता है कि वे आज भी बॉलीवुड में ख़ुद को थोड़ा अलग रखती हैं. 2006 में जब उनकी पहली फ़िल्म गैंगस्टर प्रदर्शित हुई थी, तब वह आउटसाइडर थीं.

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आज हीरोइन के तौर पर उनकी मांग है, वह ख़ुद को काम में ख़ुशी से झोंक सकती हैं लेकिन इंडस्ट्री की कई मांगों के प्रति वह आज भी कोई उत्साह नहीं दिखातीं.

पिछले साल जिस दिन उन्हें क्वीन फ़िल्म के लिए राष्ट्रीय सम्मान मिला, उसी दिन उन्होंने मुझसे बॉलीवुड की उस प्रवृति के बारे में बात की थी, जिसके तहत जब कोई महिला कलाकार की अभिनय प्रतिभा परिपक्व होने लगती हैं, तभी उसे साइडलाइन करने की कोशिशें शुरू हो जाती हैं.

उनके मुताबिक महिलाओं को ये जानना चाहिए कि सामाजिक तौर तरीकों के सामने सिर झुकाने की क़ीमत होती है.

उन्होंने मुझसे कहा था, “अगर आप केवल अपनी लुक, अपनी लंबाई, अपनी पतली कमर और चमकदार घुंघराले बालों को भुनाने की कोशिश करेंगी, तो ये चीजें लंबे समय तक नहीं रहेंगी.“

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उन्होंने कहा था, “पुरुष केवल चमकदार चीज़ों पर पूरी तरह निर्भर नहीं होते, वे हर तरह के रोल करते हैं. तो महिलाओं को भी केवल सामाजिक उम्मीदों के मुताबिक ही काम नहीं करना चाहिए, जिसमें महिलाओं को केवल सुंदरता, मुंह बंद रखने और मूक रहने पर स्वीकृति मिलती है.”

निश्चित तौर पर इन उदारवादी नज़रिए और तनु वेड्स मनु फ़िल्म सिरीज़ की काल्पनिक नारीवाद में विरोधाभास दिखता है.

इन फ़िल्मों में कंगना ने तनु का किरदार निभाया है जो बॉलीवुड के उस नज़रिए को ही प्रदर्शित करता है जिसमें उदारवादी महिलाओं की छवि ध्रूमपान करनेवाली, शराब पीने वाली और गालियां देने वाली महिला के तौर पर पेश की जाती रही है.

इतना ही नहीं, तनु वेड्स मनु रिटर्न्स का एक किरदार उस महिला का अपहरण करता है जो उसे नापसंद करती है और इसे कॉमेडी के तौर पर पेश किया गया है.

2012 में प्रदर्शित तनु वेड्स मनु फ़िल्म में हीरोइन को उसके बेडरूम में बेसुध अवस्था में लेटे देख कर हीरो किस करता है, वह भी तब जब दोनों एक दूसरे को जानते तक नहीं थे.

इसे रोमांस के प्रतीक के तौर पर फ़िल्माया गया. यह उस बयान से बिलकुल मेल नहीं खाता है जो कंगना ने इसी सप्ताह रंगोली पर एसिड फेंकने वाले पुरुष के बारे में कहा है, “जो लोग ऐसा करते हैं, वो सोचते हैं कि ये बहादुरी का काम है. क्योंकि उन्हें बहादुरी का आइडिया फ़िल्मों से मिलता है.“

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कंगना ने कहा था, “पीछा करने वाले और जुनूनी प्रेमी को फ़िल्मों में काफी बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाता है. हमें हीरो को लेकर ऐसे पूर्वाग्रह को बदलने की ज़रूरत है.”

चूंकि सभी तरह की यौन हिंसा की जड़ में सहमति का मुद्दा उठता है, ऐसे में एक अभिनेत्री के लिए जो इस मुद्दे पर इतनी ख़ूबसूरती से अपनी बात रखती हैं और तनु वेड्स मनु सिरीज़ की दोनों फ़िल्मों में ऐसे ही पुरुषवादी रोमांस वाली फ़िल्मों को स्वीकार करती हैं, देखना निराशाजनक है.

इसके बावजूद आलोचक इस तथ्य को नहीं बदल सकते हैं कि समकालीन हिंदी सिनेमा में कंगना रनौत सबसे दिलचस्प और पहले से तय चीज़ों को नहीं मानने वाली कलाकार हैं.

विद्या बालन, प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण के साथ, वह उन बदलावों के लिए सबसे आगे दिखाई देती हैं जो वह इंडस्ट्री में चाहती हैं.

शुरुआती दौर से कंगना सजावटी भूमिकाओं से इतर किरदारों की मांग करती रही हैं. हालांकि उन्हें हमेशा ऐसा काम नहीं मिला लेकिन उनकी ज़िद ने बीते चार साल में असर दिखाया है.

तनु वेड्स मनु, क्वीन और तुन वेड्स मनु रिटर्न्स जैसी फ़िल्में उनके किरदार के इर्द गिर्द घूमती हैं और इन फ़िल्मों ने काफी पैसा भी कमाया है, जबकि आज से कुछ समय पहले ही हीरोइन केंद्रित फ़िल्में इतना पैसा बना सकती हैं, ये संभव नहीं माना जाता था.

उनकी मौजूदा प्रतिबद्धताएं इसकी पुष्टि करती हैं कि वे अपने दृढ़ संकल्प वाले रास्ते पर ही हैं. वे इन दिनों विशाल भारद्वाज की फ़िल्म रंगून की शूटिंग में व्यस्त हैं, जिसमें उनके साथ सैफ़ अली ख़ान और शाहिद कपूर काम कर रहे हैं.

इसके बाद उनकी अगली फ़िल्म हंसल मेहता की सिमरन है जिसमें वे बैंक डकैत की भूमिका निभा रही हैं. इसके अलावा उनकी झोली में केतन मेहता की फ़िल्म रानी लक्ष्मीबाई भी है. उनका लक्ष्य एक दिन निर्देशक बनने का भी है.

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अपने 29वें जन्मदिन से ठीक पहले कंगना पूरी तरह से इस बात के लिए दृढ़ निश्चय से भरी नजर आती हैं कि वो जो कुछ हासिल कर सकती हैं, उससे कम उन्हें कुछ भी मंज़ूर नहीं.

(ऐना एम एम वेट्टिकाड 'द एडवेंचर्स ऑफ़ एन इंट्रेपिड फ़िल्म क्रिटिक' की लेखिका हैं. उनका ट्विटर हैंडल @annavetticad है.)

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