ऑस्कर के लिए कितना ख़र्चा करना पड़ता है?

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- Author, ज़िम रीड
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ऑस्कर पुरस्कारों की दौड़ में शामिल फ़िल्में बनाने वाले स्टूडियो प्रचार पर हर साल लाखों डॉलर ख़र्च करते हैं.
पुरस्कारों के लिए वोट डालने वाले तक़रीबन 6,000 लोगों को लुभाने के लिए काफ़ी पैसा ख़र्च किया जाता है. पर क्या इससे काम बनता भी है?
आपने उस अभिनेत्री के बारे में सुना है, जिसने ऑस्कर मतदाताओं से अपने प्रदर्शन पर विचार करने के लिए पूरे एक पेज का विज्ञापन अख़बारों में छपवाया?
या आपको उस फ़िल्म प्रोड्यूसर के बारे में पता है, जिस पर अपने विरोधी की सुपरहिट फ़िल्म के ख़िलाफ़ प्रचार करने की वजह से प्रतिबंध लगा दिया गया था?

एकेडमी ऑफ़ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज़ के 6,000 मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करने के ये सिर्फ़ दो उदाहरण हैं.
एक अनुमान के मुताबिक़, ऑस्कर पुरस्कारों के लिए होने वाले प्रचार पर हर साल लगभग 10 करोड़ डॉलर से 50 करोड़ डॉलर ख़र्च किया जाता है.
ये आंकड़े फ़िल्म प्रोड्यूसरों ने नहीं दिए हैं. प्रोड्यूसर और ब्लॉगर स्टीफ़न फॉलोज़ ने फ़िल्म उद्योग के अपने सहयोगियों से मिले आंकडों के आधार पर यह अनुमान लगाया है.

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उन्होंने अनुमान लगाया है कि सबसे अच्छी फ़िल्म का पुरस्कार पाने वाली फ़िल्म के लिए प्रचार अभियान पर तक़रीबन एक करोड़ डॉलर ख़र्च किया गया. यह पैसा विज्ञापन, मीडिया और प्रचार पर ख़र्च किया गया.
ऑस्कर के समय स्टूडियो फ़िल्म उद्योग की पत्रिकाओं में विज्ञापन देते हैं और फ़िल्म की खूबियों और उसके कलाकारों के प्रदर्शन के बारे में लोगों को बहुत ही सलीके से बताते हैं.
हॉलीवुड के रिपोर्टर गेल मर्फ़ी ने बीबीसी से कहा, "ये लोग बहुत ही ज़्यादा पैसा पाने वाले पब्लिसिस्ट हैं. वे एकेडेमी के सदस्यों को जानते हैं और यह भी जानते हैं कि उन तक कैसे पंहुचा जाए और उन्हें क्या पसंद है."

सीधे सीधे घूस देना मना है. पर मतदाताओं के पास उपहारों और छोटी-मोटी चीजों की बाढ़ आ जाती है.
एक मतदाता ने हॉलीवुड रिपोर्टर से 2013 में कहा था, "मुझे पुस्तकें, खाने-पकाने से जुड़ी किताबें समेत कई तरह के छोटे मोटे उपहार दिए गए. यह हास्यास्पद है."
एकेडमी ने साल 2011 में नियम बना कर सीधे लॉबी करने या ई-मेल और टेलीफ़ोन के ज़रिए अपनी बात कहने पर रोक लगा दी थी.

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नामांकनों की घोषणा होने के बाद स्टूडियो, फ़िल्म की स्क्रीनिंग करने के लिए रिसेप्शन नहीं रख सकते न ही मुफ़्त के खाने पीने की व्यवस्था कर सकते हैं.
साल 2010 में 'हर्ट लॉकर' फ़िल्म के प्रोड्यूसर निकोलस कार्टियर पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.
उन्होंने मतदाताओं को ई-मेल भेज कर कहा था कि वे उनकी फ़िल्म का समर्थन करें, न कि "50 करोड़ डॉलर की फ़िल्म" का. साफ तौर पर उनका इशारा 'अवतार' की तरफ था.

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आख़िरकार 'हर्ट लॉकर' उस साल विजेता घोषित हुई थी, पर कार्टियर को ट्रॉफी एक महीने बाद इस विवाद के थमने पर ही मिली थी.
माना जाता है कि पुरस्कारों के मौसम में अख़बारों में छपने वाली नकारात्मक ख़बरों के पीछे ये ऑस्कर के लिए लॉबिंग करने वाले भी कुछ हद तक ज़िम्मेदार होते हैं.
'स्लमडॉग मिलिनेयर' पर बाल कलाकारों से बहुत ही कम पैसे में काम कराने और 'ज़ीरो डार्क थर्टी' पर प्रताड़ना को जायज़ ठहराने के आरोप लगे थे.
डाटा विश्लेषक केविन स्वीनी ने इस पूरे मामले पर अध्ययन किया है.

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उनका कहना है कि ऑस्कर पुरस्कार जीतने के बाद किसी फ़िल्म को 30 लाख डॉलर की अतिरिक्त कमाई होती है. पर गोल्डन ग्लोब पुरस्कार जीतने वाली फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर 1.42 करोड़ डॉलर अतिरिक्त कमा लेती है.
इसकी वजह यह है कि ऑस्कर पुरस्कारों की घोषणा काफ़ी देर से होती है और तब तक फ़िल्में रिलीज़ हो चुकी होती हैं.
साल 2014 में किए गए एक दूसरे अध्ययन से पता चला है कि एकेडमी पुरस्कार जीतने वाले अभिनेता की कमाई 39 लाख डॉलर बढ़ जाती है. पर अभिनेत्री की फ़ीस सिर्फ 5 लाख डॉलर बढ़ती है.
केविन स्वीनी इसकी वजह फ़िल्म उद्योग में मौजूद लिंग भेद को मानते हैं. पर पैसे के अलावा दूसरी चीजें भी हैं.

हॉलीवुड की अंदरूनी राजनीति और आपके समकालीन कलाकार भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
एडमंड हेल्मर के मुताबिक़, गोल्डन या ऑस्कर पुरस्कार "सिर्फ़ टिकट बेचने की बात नहीं है."
वे कहते हैं, "पुरस्कार जीतने वालों को बड़े मौके मिलते हैं जिससे उन्हें बहुत बड़ा आत्मसंतोष मिलता है, जिसे मापा नहीं जा सकता."
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