25 लाख का नाटक

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- Author, चिरंतना भट्ट
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
हाल ही में मुंबई में शुरु हुए गुजराती नाटक 'कोड मंत्र' के निर्माताओं का दावा है कि यह नाटक गुजराती रंगमंच का सबसे मंहगा नाटक है.
इस नाटक का बजट कम से कम 25 लाख है. इसकी कहानी एक आर्मी कैम्प में घटी काल्पनिक घटनाओं और कोर्ट रूम ड्रामा को लेकर बुनी गई है.

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इस नाटक की कई बातें इसके बड़े बजट का कारण हैं जिनमें से एक है इसमें काम कर रहे कलाकारों की संख्या.
आम तौर पर एक नाटक में 6 से 7 पात्र होते हैं लेकिन इस नाटक में 35 कलाकार मंच पर आते हैं.
3 मुंबई बटालियन के 16 कैडेट्स भी इस नाटक का हिस्सा हैं और यही वजह है कि ड्रिल, सलामी से लेकर उनकी बॉडी लैंग्वेज में वास्तविकता है.

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यह कैडेट्स इस नाटक की सबसे ख़ास बात हैं क्योंकि इनके आ जाने से आर्मी कैम्प का माहौल हूबहू खड़ा हो जाता है.
वैसे तो नाटकों में 'बॉक्स सेट' लगते हैं जिन्हें जल्दी बदला नहीं जाता लेकिन सेट निर्माता प्रसाद वालावलकर ने इस नाटक में ऐसे 'फ़्लैप्स सेट' बनाए हैं जिन्हें मोड़कर 11 अलग स्थानों की शक्ल में बदला जा सकता है.
इतने भारी भरकम बजट पर बने इस नाटक का संगीत भी फ़िल्म संगीत देने वाली संगीतकार जोड़ी सचिन जिगर ने दिया है.

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अब तक टीवी में व्यस्त रहे निर्देशक राजू जोशी ने आठ साल बाद नाट्य निर्देशन किया है और उन्होंने बताया, "स्क्रिप्ट मुझे बहुत एक्साइटिंग लगी, इसका मंचन करने से पहले उस पर सात महीने तक काम किया क्योंकि मुझे लगा कि यह नाटक वास्तविकता से जितना करीब होगा उतना बेहतर होगा."

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इस नाटक के कॉस्ट्यूम्स दिल्ली और कोलाबा के आर्मी बैरेक्स के कारीगरों से बनवाए गए हैं वहीं जूते, राइफ़ल्स, हैल्मेट्स, मशीनगन्स आदि ख़ास तौर से बनवाए गए हैं.

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नाटक की लेखिका और मुख्य अभिनेत्री स्नेहा देसाई कहती हैं, "लेखक के तौर पर कोर्ट रुम ड्रामा लिखना मुश्किल है क्योंकि लेखक को पता होता है कि अंत में कौन जीतेगा लेकिन यह दोहरी शतरंज का खेल है."
इस नाटक में आर्मी में गुजराती समुदाय से किए जाने वाले भेदभाव और मानवाधिकार के मुद्दे पर सवाल उठाए गए हैं.

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नाटक के मुख्य निर्माता भरत ठक्कर ने बताया, "गुजराती रंगमंच में नया करने के प्रयास में मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी. और यह नाटक मुश्किल तो था लेकिन असंभव नहीं."
बजट के सवाल पर वह कहते हैं कि ये वास्तविकता लाने के लिए ज़रूरी था,"मैंने बजट की फ़िक्र की होती तो शायद कोड मंत्र कभी नहीं बनता."

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वकील के रूप में स्नेहा देसाई का अभिनय अच्छा है वहीं अभिनेता प्रताप सचदेव ने कठोर कर्नल की भूमिका को बख़ूबी निभाया है.
कर्तव्य पालन की सीमा पार होने पर क्या अंजाम हो सकता है यह दिखाने वाला यह नाटक अंत तक दर्शकों को बांधे रखता है.
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