'कवरेज देकर मीडिया आतंकवाद को बढ़ावा देता है’

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- Author, श्वेता पांडेय
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
वर्ष 2015 में अक्षय कुमार साल की अपनी तीसरी फ़िल्म 'ब्रदर्स' ला रहे हैं.
इस साल रीलीज़ हुई अक्षय की फ़िल्में 'बेबी' और 'गब्बर' औसत प्रदर्शन ही कर पाई थीं.
ऐसे में 14 अगस्त को सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ आ रही ‘ब्रदर’ से अक्षय को कई उम्मीदें हैं.
अक्षय और सिद्धार्थ मल्होत्रा की मुख्य भूमिका वाली इस फ़िल्म ‘ब्रदर्स’ को हॉलीवुड फ़िल्म ‘वॉरियर’ की ऑफ़िशियल रीमेक कहा जा रहा है.

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लेकिन अक्षय की माने तो ‘ब्रदर्स’ का महज़ चालीस प्रतिशत ही मूल फ़िल्म से लिया गया है.
मिक्स मार्शल आर्ट (एमएमए) पर आधारित इस फ़िल्म के 60 प्रतिशत फाइट सीन्स को असल बताते हुए अक्षय कहते हैं, "मैं मार्शल आर्ट का खिलाड़ी रहा हूं लेकिन फिर भी इस फ़िल्म के लिए तैयारी करने के लिए मुझे पांच महीने लगे, इस तैयारी को कंडीशनिंग कहते हैं."
'हॉलीवुड से ख़तरा'
फ़िल्म बाहुबली की सफ़लता को चुनौती मानने से इंकार करते हुए अक्षय ने कहा, “दक्षिण की फ़िल्में हमारे लिए ख़तरा नहीं हैं क्योंकि वो भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री का ही हिस्सा है. असल ख़तरा तो हॉलीवुड से है.”
उनका मानना है कि जिस तरह की फ़िल्में हॉलीवुड में बनाई जाती हैं, उसके लिए बड़ा बजट चाहिए, जबकि बॉलीवुड फ़िल्में एक्शन होने के साथ पारिवारिक भी होती हैंं और उनका बजट काफ़ी कम होता है.
आतंकवाद को बढ़ावा?

आतंकवाद की समस्या के इर्द गिर्द बुनी गई फ़िल्में ‘बेबी’ और ‘हॉलीडे’ में मुख्य भूमिका निभाने वाले अक्षय आतंकवाद को देश के लिए बहुत बड़ा ख़तरा मानते हैं.
वे कहते हैं, “आतंकवाद सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए बड़ा ख़तरा बनता जा रहा है और इसका ज़िम्मेदार मीडिया भी है.”
अक्षय मानते हैं कि मीडिया आतंकवाद को बहुत कवरेज देता है. वो कहते हैं, “वो लोग जो भी कुछ करते हैं, उनको फ्रंट पेज कवरेज मिलती है. इस तरह से कवरेज देकर उनको मीडिया बढ़ावा ही देता है.”
अक्षय कहते हैं कि 'आतंकवादी' चाहते हैं कि उन्हें कवरेज मिले और जो वो चाहते हैं, वही मीडिया कर रही है.
कौन मुनाफ़े में

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इस साल तक़रीबन चार फ़िल्मों की कमाई ने सौ करोड़ के आंकड़े को पार किया है.
अक्षय कहते हैं, “कमाई का अंदाज़ा आप सब कैसे लगाते हैं. जो सौ करोड़ या दो सौ करोड़ कमाते हैं उनकी फ़िल्में भी उसी बजट की बनती हैं और साल में एक या दो ही आती हैं. जबकि मेरी साल में तीन से चार फ़िल्में आती हैं और वो तीस करोड़ या चालीस करोड़ में बन जाती हैं. अपनी लागत से दोगुना कमा लेती हैं. बाक़ी किसे मुनाफ़ा हुआ, इसका हिसाब आप सब ही लगाएं.”
हँसते हुए अक्षय ने कहा, "हम अभिनेता हैं, कोई महालक्ष्मी के घोड़े नहीं, कि हमारे नंबर्स का हिसाब लगाया जाए"
फ़िलहाल अक्षय फ़िल्म 'ब्रदर्स' की रीलीज़ को लेकर उत्सुक हैं और फिर एक महीने बाद ही उनकी अगली फ़िल्म ‘सिंह इज़ ब्लिंग’ गांधी जयंती को रिलीज़ हो रही है.
ऐसे में अक्षय कुमार जल्द ही एक नए अवतार (हैप्पी सिंह) के रूप में हमार सामने होंगे
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