यो यो हनी सिंह: एक सुपरस्टार के नाकाम होने और कमबैक की पूरी कहानी

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यो यो हनी सिंह. ये नाम उस कलाकार का है जो सूरज की तरह चमका लेकिन फिर उस पर सालों का 'ग्रहण' लग गया. लेकिन अब ये 'देसी कलाकार' फिर से अपना जलवा बिखेरने के लिए तैयार है.
अगर आप रैप म्यूज़िक के दीवाने हैं तो ये लगभग नामुमकिन है कि आपकी प्लेलिस्ट में हनी सिंह के गाने ना हों लेकिन सालों से ना तो उनका कोई हिट गाना आया और ना ही वो सार्वजनिक तौर पर दिखे. सामने आईं तो सिर्फ़ उनसे जुड़ी निगेटिव ख़बरें. लेकिन अब हनी सिंह वापसी कर रहे हैं. अपनी इस वापसी को उन्होंने 'हनी सिंह 3.0' नाम दिया है.
बीबीसी के लिए नयनदीप रक्षित ने हनी सिंह से ख़ास बात की और उनसे म्यूज़िक इंडस्ट्री में आने, बीमारी, पर्सनल लाइफ़ और कमबैक से जुड़े कई सवालों के जवाब जाने.
हनी सिंह अपने कई पुराने इंटरव्यू में भी इस बात का ज़िक्र कर चुके हैं कि म्यूज़िक का शौक़ उन्हें बचपन से ही था.
हनी सिंह ने बताया, 'बचपन से ही संगीत में मेरी रुचि थी. 13 साल की उम्र में मैं अपने स्कूल में प्रार्थना के दौरान तबला बजाता था. उसके बाद तबला बंद कर दिया लेकिन घर में म्यूज़िक बहुत माहौल था.'
"साल 1999 से मैंने हिपहॉप सुनना शुरू किया. एआर रहमान को बहुत सुना. 2000 से इंटरनेशनल हिपहॉप सुनना शुरू किया. फिर सोचा कि कुछ ऐसा ही करना है लेकिन वो कैसे, ये समझ नहीं आ रहा था. मैंने आईटी इसलिए ली थी कि बीट बना सकूं. 2003 में मैंने अंडरग्राउंड रैपर्स के लिए बीट बनाई. 2005 में मुझे पहली बार अशोक मस्ती के साथ गाना कंपोज़ करने का मौक़ा मिला और मैंने गाना बनाया, 'खड़के गलासी तेरे नाल...' जो सुपरहिट था लेकिन उसके बाद भी मेरे पास काम नहीं था."
उन्होंने बताया,"उसके बाद 2007 में मैं बतौर म्यूज़िक डायरेक्टर पंजाब शिफ़्ट हो गया. उससे पहले मुझे लिखना नहीं आता था, सिर्फ़ म्यूज़िक बनाना आता था. फिर धीरे-धीरे लिखना शुरू किया, थोड़ा-थोड़ा रैप करना शुरू किया. एलबम डिज़ाइन करना शुरू किया."
हनी सिंह बताते हैं कि उन्होंने छोटी ही उम्र में काम शुरू कर दिया था और उनका काम चल भी निकला था और कुछ ही सालों में वो पंजाब में स्टार थे. लेकिन दिल्ली, मुंबई और मेट्रो शहरों में कोई ख़ास पहचान नहीं थी.
इसके बाद हनी ने ख़ुद को लॉन्च करने का फ़ैसला किया और ख़ुद पर काम करना शुरू किया.
वो कहते हैं, "ख़ुद पर काम करने के बाद मैंने अपना पहला गाना लॉन्च किया ब्राउन रंग और दुकान चल पड़ी. फिर तो एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने आते चले गए."

कैसे चमका सितारा
करियर के शुरुआती दिनों की चुनौतियों के बारे में हनी सिंह बताते हैं कि वो 'कुछ नया ट्राई करना' चाह रहे थे लेकिन लोग उन पर भरोसा ही नहीं कर रहे थे और कुछ भी नया करने के लिए उनका सपोर्ट नहीं कर रहे थे.
हनी इसी संदर्भ में दिलजीत दोसांज से जुड़ा एक किस्सा बताते हैं कि दिलजीत ने भी उन पर भरोसा नहीं किया था.
वो कहते हैं, 'साल 2009 में अपनी एलबम के लिए दिलजीत मेरे पास आए थे. उन्होंने मुझे बतौर म्यूज़िक प्रोड्यूसर साइन किया.'
हनी सिंह बताते हैं, "दिलजीत के साथ बातचीत के दौरान मैंने उनसे पूछा कि क्या जो अभी तक कर रहे हैं, वही करना है या फिर कुछ नेक्स्ट लेवल करना है. दिलजीत भी नेक्स्ट लेवल काम करने के लिए तैयार हो गए और यही एलबम का नाम भी पड़ गया. 2009 से लेकर 2010 तक एलबम डिज़ाइन का काम हुआ और उसमें एक हिपहॉप गाना भी रखा गया था- 'पंगा'. जो बाद में बहुत हिट रहा लेकिन एलबम रिलीज़ के समय दिलजीत उसे पहले रिलीज़ करने के लिए तैयार नहीं थे."

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कैसे पड़ा 'यो यो' नाम?
अपने नाम के पीछे की कहानी के बारे में हनी बताते हैं, "हनी मेरा निक नेम है और 'सिंह' मेरा सर-नेम. तो पहले एलबम के पीछे म्यूज़िक डायरेक्टर की एक छोटी सी फ़ोटो लगा करती थी और उसी पर नाम होता था. जब म्यूज़िक बनाते-बनाते पांच साल बीते और मुझे पंजाब में बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला तो मुझे लगा कि अब अपनी पैकजिंग करनी चाहिए."
वो कहते हैं, " उसके बाद ये 'यो-यो' नाम जुड़ा. यो यो भी बस एक स्लैंग था, जिसका मतलब था 'आपका अपना'. वो मुझे ऐसे पुकारते थे और ऐसे ही नाम पड़ गया."
हनी सिंह 3.0
हनी सिंह अपनी वापसी को 3.0 कह रहे हैं.
वो 'खड़गे गलासी' से लेकर 'देसी कलाकार' तक के सफ़र को अपना पहला पड़ाव मानते हैं.
उसके बाद बॉलीवुड में सुपरहिट गाने देने के बावजूद अपनी निजी पहचान को बनाए रख पाने की कामयाबी और उसके बाद बीमारी और पूरी तरह चकनाचूर हो जाने को दूसरा पड़ाव बताते हैं और अब वो अपने कमबैक को तीसरा पड़ाव मानते हैं.

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'बुरे दिनों में अपने साथ खड़े रहे'
हनी सिंह लगभग पांच साल गायब रहे. लेकिन उनके लिए सबसे राहत की बात ये रही कि उनके अपनों ने उनका साथ कभी नहीं छोड़ा.
वो कहते हैं, "सात साल तक मेरे फैंस मेरे लिए खड़े रहे. उन्होंने ही मुझे पुश किया और शायद यही वजह है कि हनी सिंह 3.0 के बारे में सोच पाया."
'ड्रग एक्डिक्ट' जैसे आरोपों पर क्या बोले हनी
हनी सिंह बताते हैं, "जब मैंने डोप-शोप जैसे गाने दिए तब पंजाब में लोगों ने मेरे पुतले जलाए. लेकिन मैंने किसी को तवज्जो नहीं दी. क्योंकि लोग तो प्यार कर ही रहे थे और बस कुछ मुट्ठीभर लोग थे जो ऐसा कर रहे थे तो मुझे कोई बहुत अधिक फ़र्क नहीं पड़ रहा था. अगर मैं ड्रग एडिक्ट होता तो मुझे इतना प्यार करने वाले फ़ैंस, रिश्तों के रूप में कैसे मिले."

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शाहरुख़ का वो टूर, जिसके बाद सब बदल गया
हनी सिंह बताते हैं कि वो शाहरुख़ ख़ान के साथ वर्ल्ड टूर पर गए हुए थे, जब उन्हें पहली बार बीमारी ने झटका दिया.
वो बताते हैं, "उस समय हम लोग अमेरिका में शो कर रहे थे. मैं स्टेज पर परफ़ॉर्म कर रहा था. लेकिन तबियत ऐसी बिगड़ी कि मुझे चलता शो छोड़कर आना पड़ा. इसके अलावा स्टार प्लस पर एक रिएलिटी शो चल रहा था, वो बंद हो गया. उस समय मैं क्रैश कर गया था. मुझे बाइपोलर डिसऑर्डर विद साइकोटिक सिमपटम्स हो गए थे. ये सिर्फ़ कोई डिप्रेशन या एंक्ज़ाइटी नहीं था, ये उससे कहीं अधिक था. ये एक भयानक मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम थी, जिसने मुझे बुरी तरह हिला दिया था. मैंने घरवालों से कहा कि अब काम नहीं हो पाएगा, मुझे घर लेकर चलो. क्योंकि मैं कॉन्ट्रेक्ट से बंधा हुआ था तो घरवालों ने कहा कि केस हो जाएगा लेकिन मैंने कहा जिसे जो करना है करे, मुझे बस घर जाना है."
इस टूर के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि हनी सिंह स्टेज पर थे. वो एक गाना परफ़ॉर्म भी कर चुके थे लेकिन दूसरे गाने के बीच में ही वो रुक गए. वो आगे गा ही नहीं पा रहे थे, तब बैक-स्टेज से फ़रहा ख़ान, अभिषेक और दीपिका पादुकोण डांस करते हुए आए और कुछ इस तरह स्टेज से लेकर गए कि जैसे कोई एक्ट हो.
हनी अपनी बीमारी के बारे में कहते हैं, "ये बीमारी इतनी बड़ी थी कि मुझे ख़ुद को ठीक करने-करने में भी पांच साल लग गए."
उस टूर के बारे में हनी बताते हैं कि जब शाहरुख़ ख़ान को उनकी ख़राब तबियत के बारे में पता चला तो उन्होंने ख़ुद उनसे बात की और हालत समझते हुए उन्हें जाने के लिए कह दिया.
बीमारी के दिनों का हाल बताते हुए हनी कहते हैं, "पांच साल जो मैं बीमार रहा तो मैंने पांच साल मोबाइल को हाथ नहीं लगाया. लेकिन इस बीच अक्षय कुमार से दो बार बात हुई. दीपिका पादुकोण ने डॉक्टर्स के बारे में सलाह दी."
हनी सिंह कहते हैं, "लोगों ने मेरे बारे में कई तरह की बातें फैलाईं लेकिन किसी को सच्चाई नहीं पता थी."

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नेटफ़्लिक्स पर डॉक्यूमेंट्री
हनी सिंह बताते हैं, "लोग मुझसे लगातार पूछ रहे थे कि बीते सात साल मैं कहां था. हालांकि मैंने सिर्फ़ अपने फ़ैंस के लिए ये बात बताई कि मैं बीमार था."
हनी सिंह के जीवन पर अब नेटफ़्लिक्स पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बन रही है.
हनी ने उन सात साल के अंधेरे के बारे में इस डॉक्यूमेंट्री में विस्तार से बात की है.
वो कहते हैं, "मैं अब जब लोगों को देखता हूं तो पाता हूं कि ये बहुत से लोगों की समस्या बनती जा रही है लेकिन घरवाले इस पर बात करने से कतराते हैं. मैं तो ऐसी स्टेज पर था कि जैसे सड़क पर पागल लोग घूमते हैं ना.., मैं कुछ वैसे ही हो गया था. एक-डेढ़ साल मैं उसी पागल की तरह रहता था. मेरा केस उस स्तर पर ख़राब हो गया था."
हालांकि हनी अपने को बहुत खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें ऐसा परिवार मिला जिसने उन्हें बीच में नहीं छोड़ा और हर क़दम पर साथ दिया. संभाला और इस क़ाबिल बनने में मदद की कि वो दोबारा अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर सकें.
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