अनु अग्रवाल: 'आशिक़ी' से रातों रात स्टार बनी अभिनेत्री इतने साल तक कहां थीं?

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बहुत कम कलाकार ऐसे होते हैं, जो अपनी पहली फ़िल्म से ही 'सुपरस्टार' का दर्जा हासिल कर लेते हैं. पहली फ़िल्म ही उन्हें वो शोहरत दिला देती है, जो कई दूसरे कलाकारों को दर्जनों फ़िल्म करने के बाद भी नसीब नहीं होती है.
अनु अग्रवाल भी एक ऐसी ही अभिनेत्री हैं, जिन्होंने फ़िल्में तो गिनी चुनी ही कीं लेकिन अपनी पहली फ़िल्म से उन्हें जो स्टारडम मिला, ज़्यादातर लोग सिर्फ़ उसके सपने ही देखते हैं.
हालांकि एक सच ये भी है कि साल 1990 में आई महेश भट्ट की फ़िल्म 'आशिकी' के बाद से अनु अग्रवाल की कोई दूसरी फ़िल्म उतनी हिट नहीं हुई.
साल 1990 में आई 'आशिक़ी' में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल की जोड़ी को लोगों ने काफी सराहा था लेकिन एक समय के बाद दोनों ही कलाकार लाइमलाइट से दूर हो गए.
राहुल रॉय तो कुछ रिएलिटी शोज़ में दिखे लेकिन अनु अग्रवाल एकदम ग़ायब ही हो गईं.
लेकिन हाल ही में उन्हें इंडियन आइडल के मंच पर देखा गया.
वो इतने सालों तक थीं कहां, ये जानने के लिए और कुछ दूसरे सवालों के साथ बीबीसी के लिए नयनदीप रक्षित ने अनु अग्रवाल से बात की.

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'एक्सीडेंटल एक्ट्रेस'
अनु अग्रवाल ख़ुद को 'एक्सीडेंटल एक्ट्रेस' बताती हैं. वो कहती हैं कि उनकी ज़िंदगी में किसी भी बॉलीवुड फ़िल्म की कहानी से कहीं अधिक उतार-चढ़ाव हैं.
बॉलीवुड में अपनी एंट्री के सवाल पर अनु कहती हैं, "एक्टिंग तो मैंने स्कूल के दिनों से ही शुरू कर दी थी. सातवीं, आठवीं, नौंवी और दसवीं क्लास तक तो जमकर थिएटर किया और स्कूल में प्ले लिखे भी लेकिन साथ ही बास्केटबॉल भी खेलती रही. ग्यारहवीं में जब स्टेट लेवल की बास्केटबॉल टीम के लिए चयन हुआ तो उसके कुछ दिनों बाद ही कोर्ट पर एक्सीडेंट हो गया. एक्सीडेंट के बाद मेरा पूरा ध्यान थिएटर की ओर आ गया. उसके बाद एक थिएटर ग्रुप से जुड़ी, जिसमें सभी लोग एनएसडी के थे. उस दौरान मैंने एक प्ले किया, जिसमें मैंने 16 साल की बेनज़ीर भुट्टो का किरदार निभाया और वो बहुत हिट रहा.'
हालांकि फ़िल्में करने की अनु में कभी ललक नहीं थी.
वो बताती हैं कि इसकी एक बड़ी वजह ये थी कि उन्हें लगता था कि फ़िल्मों में औरतों को सही से दिखाया नहीं जाता है. उन्हें मज़बूत किरदार नहीं दिए जाते हैं.
लेकिन महेश भट्ट से मिलने के बाद उनकी सोच में कुछ बदलाव आया.

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महेश भट्ट से पहली मुलाक़ात
महेश भट्ट से अपनी पहली मुलाक़ात का ज़िक्र करते हुए अनु अग्रवाल बताती हैं, " महेश भट्ट और मेरे एक कॉमन दोस्त थे. एक दिन जब हम लंच पर मिले तो महेश भट्ट भी साथ थे. वहीं महेश भट्ट ने कहा कि तुम तो स्टार हो, तुम्हें तो फ़िल्में करनी चाहिए. लेकिन मैंने मना कर दिया."
अनु बताती हैं कि ये बात वहीं ख़त्म हो गई क्योंकि इसके बाद वो पेरिस चली गईं. उस दौरान उनके पास एक मॉडलिंग एजेंसी का कॉन्ट्रेक्ट था. वो रिलेशनशिप में थीं और क़रीब-क़रीब उनकी ज़िंदगी में सबकुछ पटरी पर था.
अनु बताती हैं, "जब अपना सबकुछ समेटने के लिए भारत लौटी तो महेश भट्ट ने फ़ोन किया और बताया कि उन्होंने मुझे ध्यान में रखकर एक फ़िल्म की कहानी लिखी है."
हालांकि अनु ने अपनी पहली फ़िल्म के लिए हां करने के लिए 10-12 दिन का समय लिया.
अनु बताती हैं कि जब उन्होंने महेश भट्ट से फ़िल्म के बारे में बात की तो उन्होंने साफ़ कर दिया था कि न तो वो हिरोइनों की तरह बाल रखेंगी, न ही मेकअप करेंगी और न ही उनके जैसे कपड़े पहनेंगी.
दिलचस्प बात ये है कि महेश भट्ट ने उनकी सारी शर्तें मान लीं और फ़िल्म की शूटिंग भी तीन महीने में पूरी कर ली गई.
ये फ़िल्म 23 जुलाई 1990 को रिलीज़ हुई.
फ़िल्म रिलीज़ होने के साथ ही अनु अग्रवाल की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई.

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जब सूटकेस में पैसे लेकर आते थे...
अनु बताती हैं, "फ़िल्म रिलीज़ होने के बाद लोग मेरे घर के बाहर आकर जमा होने लगे. मेरे घर के बाहर लोगों को भीड़ रहती थी. घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था...लड़के आई लव यू के बैनर लेकर घर के बाहर खड़े रहते थे."
स्टारडम के उस दौर को याद करते हुए अनु कहती हैं, "आशिक़ी मेरी पहली पिक्चर थी और उसके बाद इज़्ज़त का तो भंडार लग गया था...जहां जाओ अनु जी-अनु जी. बड़ी-बड़ी उम्र के लोग मुझे मैडम कहा करते थे...लोग मेरे पैर छूने आ जाते थे कि मेरी पिक्चर साइन कर लीजिए... लोग पैसों के सूटकेस लेकर घर आ जाते थे कि फ़िल्म साइन कर लीजिए. लोग बिना स्क्रिप्ट के आ जाते थे और कहते थे कि पहले आप साइन कीजिए फिर स्क्रिप्ट लिखी जाएगी."
पहली फ़िल्म से स्टार बनीं अनु ने स्क्रिप्ट को लेकर कभी भी कोई समझौता नहीं किया.
अनु के खाते में जहां 'आशिक़ी' जैसी फ़िल्म से स्टारडम को नए मायने देने का रिकॉर्ड है, वहीं वो इंडस्ट्री की पहली ऐसी एक्ट्रेस हैं जिन्होंने 'टैन-मेकअप' की शुरुआत की.
उसके पहले तक एक्ट्रेसेज़ के लिए सिर्फ़ 'फ़ेयर-मेकअप' हुआ करता था लेकिन उनके एतराज़ के बाद से इंडस्ट्री में 'टैन-मेकअप' की शुरुआत हुई.
एक तरफ़ जहां अनु अग्रवाल का स्टारडम अपने पूरे शबाब पर था और उनके घर के बाहर लड़कों की भीड़ रहा करती थी, वहीं इंडस्ट्री के किसी भी कलाकार के साथ उनका रिलेशन नहीं रहा.
अनु बताती हैं, "इंडस्ट्री में लोग मुझसे डरा करते थे. वो दो क़दम पीछे हो जाते थे."
अनु बताती हैं कि गोविंदा तो उन्हें 'हॉलीवुड-हॉलीवुड' कहकर पुकारा करते थे. उनका मानना था कि अनु हॉलीवुड के लिए हैं, न कि बॉलीवुड के लिए.
इतनी शोहरत, प्यार और कामयाबी के बाद इंडस्ट्री छोड़ने की क्या वजह थी, इस सवाल के जवाब में अनु अग्रवाल कहती हैं, "ऐसा नहीं है कि मैंने इंडस्ट्री छोड़ दी."
वो बताती हैं, "1993-94 तक मैंने कई फ़िल्में कीं. उस दौर के बेस्ट डायरेक्टर्स के साथ काम किया लेकिन ऐसी स्क्रिप्ट नहीं आ रही थी जो अपील कर सके."
वो कहती हैं, "जिस तरह का फ़ेम मैंने देखा, जिस तरह की कामयाबी मैने देखी...उससे बड़ी कामयाबी नहीं हो सकती. जिस तरह का करियर मैंने देखा, जिस तरह की लॉन्च मैंने देखी, जिस तरह की चीज़ें मुझे करनी थी और मैंने कीं...उससे बड़ा नहीं हो सकता. मैंने 1993 में भारत में एमटीवी लॉन्च किया...इससे अधिक और क्या..."

उतार-चढ़ाव से भरपूर रही ज़िंदगी
अनु की निजी ज़िंदगी में भी उतार-चढ़ाव कम नहीं रहे. आशिकी से पहले ही उनकी शादी होने वाली थी लेकिन फिर वो फ़िल्मों में आ गईं और उनकी शादी नहीं हुई.
आशिक़ी के रिलीज़ के बाद उनका लंबे समय से चला आ रहा रिलेशन भी ख़त्म हो गया. वो दौर अनु की ज़िंदगी का सबसे बुरा दौर था.
अनु बताती हैं, "मेरी तो पूरी ज़िंदगी ही बहुत मुश्किल भरी थी. सबसे मुश्किल तो ये थी कि ये लड़की अकेले कुछ करना चाहती है क्योंकि स्वीकार्यता नहीं थी. मेरे परिवार के लोग यहां नहीं थे तो घर को मैनेज करना भी एक चुनौती थी और उस समय कोई टूल नहीं था, जैसे अब बहुत सी चीज़ों के लिए मौजूद हैं."
साल 1999 में अनु का एक्सीडेंट हुआ था, जिसके बाद उनकी याददाश्त भी चली गई थी.
क्या अनु इंडस्ट्री में कमबैक करेंगी, इस सवाल के जवाब में वो कहती हैं कि उन्हें कभी ये लगा ही नहीं कि उन्होंने इंडस्ट्री छोड़ी है.
वो कहती हैं, "मैं इंडस्ट्री छोड़कर नहीं गई थी लेकिन हां कट-ऑफ़ कह सकते हैं. पर मौक़ा मिला तो ज़रूर..."
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