BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 17 फ़रवरी, 2009 को 10:13 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'तलाश अभी जारी है...'

सॉफ़्टवेयर कंपनी
भारत में अक्तूबर-दिसंबर के बीच पाँच लाख नौकरियाँ गईं
जब इस साल तेरह जनवरी को नौकरी गई थी, उसी समय मुझे लगा था कि मंदी के इस मोड़ पर करियर को नई दिशा दे पाना मुश्किल साबित होगा.

नौकरी रहते हुए नई नौकरी की तलाश तो फिर भी आसान है, लेकिन सड़क पर आकर नौकरी ढूँढना काफ़ी मुश्किल.

इसीलिए मैंने अपने एचआर वालों से एक विनती भी की थी, तीन महीने का नोटिस पीरियड दे दो, सैलरी बेशक मत दो लेकिन नई नौकरी ढूँढने का मौका दे दो.

पर ऐसा नहीं हुआ. दरअसल मेरे ऑफ़िस वालों को पता था कि मेरे पापा रिटायर्ड जज हैं. पता नहीं क्यों इस बात को लेकर उनके मन में संशय भी था कि मैं उन्हें अदालत में ना घसीट लूँ.

इसलिए मेरे मामले में इस्तीफ़े से संबंधित सभी कागज़ी कार्रवाई को वो हू-बहू अमल में भी ला रहे थे. मुझे कोई रियायत नहीं दी गई.

नौकरी ढूँढने का सिलसिला तो दो दिनों बाद ही शुरु हो गया. शुरुआत मित्रों को बताने और अपने ही सर्किल में कोई नौकरी खोजने की कोशिश के साथ हुई.

'सेट' कराने के आश्वासन

शुरु-शुरु में कुछ दोस्तों ने अपने यहाँ 'सेट' करवा देने का आश्वासन दिया मगर 15 दिन बीत गए और कहीं कुछ नहीं बना.

सारे दोस्तों ने कुछ दिन और इंतज़ार करने की सलाह दी या कुछ का कहना था.. "अरे अभी पाँच दिन पहले एक की गुंजाइश थी. यार थोड़ा लेट हो गए.."

मैं माजरा समझ ही चुका था, सो ख़ुद दफ़्तरों के चक्कर लगाने लगा. लेकिन इससे पहले मैंने कुछ वेबसाइटों पर अपने को रजिस्टर कराया.

इसके बाद इंतज़ार ही एक चीज़ थी जो मैं कर सकता था. दस दिनों बाद एक प्लेसमेंट एजेंसी का कॉल आया.

पता नहीं क्यों शुरुआती दिनों को छोड़ दें तो करियर में पहली बार किसी इंटरव्यू से पहले मुझे घबराहट महसूस हो रही थी.

शायद सड़क पर आकर नौकरी खोजने का एक 'साइड इफेक्ट' यह भी है. गया तो इंटरव्यू सोच कर था, लेकिन मुझे लिखित परीक्षा का काग़ज थाम दिया गया.

सच बताऊँ तो इस पड़ाव पर लिखित परीक्षा देने में शर्मिंदगी महसूस हो रही थी. लेकिन मजबूरी में ऐसा करना पड़ा.

इंटरव्यू ठीक है पर..

घर लौटा तो यही सोचता रहा कि सफल हो पाउँगा या नहीं. पहली बार असफलता का डर सता रहा था.

और यही हुआ भी. चलते समय पूछा था तो बताया गया कि दो-तीन दिनों में रिज़ल्ट पता चल जाएगा.

लेकिन चौथे दिन सुबह मेरा धैर्य जवाब दे गया और मैंने ही फ़ोन किया. जवाब मिला - "फ़ोन नहीं गया है...मतलब किसी और को रख लिया होगा."

मैंने कहा कि मेरा इंटरव्यू तो ठीक गया था, जवाब मिला - "हाँ आपका इंटरव्यू तो ठीक था लेकिन प्रोफ़ाइल मैच नहीं हुआ..."

फिर मैंने कई दफ़्तरों में अपने आपको साबित करने की कोशिश की लेकिन कर नहीं पाया. मेरी तलाश जारी है....

(अजय की आपबीती बीबीसी संवाददाता आलोक कुमार से बातचीत पर आधारित थी. अगले शुक्रवार से विकास शंकर अपनी कहानी आप तक पहुँचाएंगे जो एक निजी बैंक में मैनेजर थे और उन्हें भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा.)

अजय शर्मा नौकरी जाने की पीड़ा-2
जब अजय शर्मा को नौकरी से निकाला गया तो उनकी पत्नी लोन लेने वाली थीं.
आपकी राय..
मंदी के दौर में कंपनियों से लोगों की छंटनी का क्या कोई विकल्प है?
अजय शर्मा नौकरी जाने की पीड़ा-1
दोपहर बाद बॉस ने बुलाया और नौकरी से हटाने का फ़ैसला सुना डाला.
आउटसोर्सिंगनौकरी गँवाने की पीड़ा
बचत शून्य और ऊपर से मंदी की मार. ऐसे में नौकरी गँवाने की पीड़ा असहनीय है.
सत्यम की बिल्डिंगसत्यम के नए सीईओ
सत्यम कंप्यूटर्स का संचालन कर रहे बोर्ड ने एएस मूर्ति को नया सीईओ बनाया है.
अर्थव्यवस्थाआर्थिक सुर्ख़ियाँ
एक नज़र उन आर्थिक ख़बरों पर जो इस हफ़्ते सुर्खियों में रहीं.
इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>