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विकास दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया में छाई आर्थिक मंदी के बीच भारत सरकार की ओर से जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2008-09 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.1 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है. वर्ष 2007-08 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर नौ प्रतिशत थी. यह जानकारी सोमवार को केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के आँकड़ों पर आधारित है. हालांकि आर्थिक विकास दर में कमी आई है लेकिन प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार पैनल ने जो अनुमान लगाया था यह उसके क़रीब है. कृषि के क्षेत्र में विकास दर वर्ष 2008-09 में 2.6 प्रतिशत ही रह गई है जबकि वर्ष 2007-08 में यह 4.9 प्रतिशत थी. इसी तरह से निर्माण क्षेत्र की विकास दर 4.1 प्रतिशत रहेगी जबकि जबकि वर्ष 2007-08 में यह 8.2 प्रतिशत थी. आर्थिक मंदी का असर जहाँ निर्माण, कृषि और वित्तीय सेवा क्षेत्रों पर पड़ेगा वहीं व्यापार और होटल के साथ साथ खनन क्षेत्रों में वृद्धि होने की संभावना जताई गई है. योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि अगले वित्तीय वर्ष के दौरान विकास दर कम रहेगी या नहीं यह वित्तीय सहायता के जारी रहने और अर्थव्यव्यवस्था में सुधार पर निर्भर करेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'वित्तीय स्थिति सुधारने के प्रयास जारी'13 अक्तूबर, 2008 | कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर घटी29 अगस्त, 2008 | कारोबार 'सरकार आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाए'27 जनवरी, 2009 | कारोबार अर्थव्यवस्था में नौ फ़ीसदी से ज्यादा वृद्धि31 मई, 2007 | कारोबार 'आर्थिक संकट से बचने के हरसंभव प्रयास'03 नवंबर, 2008 | कारोबार 'अर्थव्यवस्था में सुधार जारी रहेगा'24 नवंबर, 2008 | कारोबार 'अब और आर्थिक पैकेज नहीं मिलेगा'21 जनवरी, 2009 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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