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पाक को 7.6 अरब डॉलर का कर्ज़ मिलेगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए 7.6 अरब डॉलर का ऋण मंज़ूर किया है. एक बयान में आईएमएफ़ ने कहा कि यह ऋण देश के आर्थिक स्थिरता कार्यक्रम को सहारा देगा. मुद्रा कोष का कहना है कि इस ऋण में से 3.1 अरब डॉलर की राशि 23 महीनों के अंदर सुविधानुसार दे दी जाएगी जबकि शेष राशि अलग-अलग चरणों में उपलब्ध करा दी जाएगी. पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय ऋण चुकाने के लिए इस राशि की जरूरत है. आईएमएफ़ की कठोर शर्तों की वजह से पाकिस्तान राशि पाने के लिए दूसरे स्रोतों की तलाश कर रहा था लेकिन ऐसा कोई सौदा नहीं हो सका. असंतुलन पाकिस्तान के वित्त और आर्थिक मामलों की उपमंत्री हीना रब्बानी खार ने कहा कि आईएमएफ़ ने ऋण देने के लिए कोई शर्त नहीं रखी है. पाकिस्तानी समाचार एजेंसी एपीपी के अनुसार खार ने एक निजी चैनल पर कहा, "आईएमएफ़ ने इस पैकेज के लिए पाकिस्तान के बनाए कार्यक्रम पर सहमति जताई है." आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक ताकातोशी काटो ने एक वक्तव्य में कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तगड़े झटके झेल चुकी है जिनमें सुरक्षा की विपरीत स्थितियाँ, तेल और खाद्य के बढ़ते दाम और विश्व की बिगड़ती अर्थव्यवस्था शामिल है. आईएमएफ़ ने कहा कि उसने 200 अरब डॉलर ऐसे देशों की मदद के लिए रखे हैं जो ताज़ा वैश्विक वित्तीय स्थितियों की वजह से मंदी से प्रभावित हैं. यह भी कहा गया है कि उन्हें उम्मीद है कि इसी तरह क़रीब 24 देशों को सहायता देनी होगी. पिछले सप्ताह की रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तान के स्टेट बैंक की धनराशि सिर्फ़ नौ महीने तक आयात का ख़र्च वहन कर सकती है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ सालों में सात से आठ फ़ीसदी बढ़ी है लेकिन इस बढ़ोतरी का अधिकतर भाग उपभोक्ता वस्तु, वित्त इत्यादि क्षेत्रों में ही है. सन् 2006 से बड़ी मात्रा में हुए आयात की वजह से व्यापार में असंतुलन ने देश की अर्थव्यवस्था को ख़राब किया और खाद्य और तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में हुई बढ़ोतरी ने स्थिति को और भी ख़राब कर दिया. इससे पाकिस्तानी रुपए के मूल्य में गिरावट आई और देश में पूंजी का संकट पैदा हो गया. सोमवार को रुपया डॉलर के मुक़ाबले 78.90/79.00 पर बंद हुआ जबकि यह शनिवार को 79.06/79.16 पर बंद हुआ था. विश्लेषकों का कहना है कि देश को मिला यह ऋण कुछ समय के लिए रुपये के मूल्य को स्थिर करेगा. इस साल रुपया डॉलर के मुक़ाबले 22 फ़ीसदी गिरा है. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन में भी नौकरियों पर चिंता20 नवंबर, 2008 | कारोबार आर्थिक सहायता को लेकर तकरार जारी19 नवंबर, 2008 | कारोबार आईएमएफ़ बड़ी भूमिका के लिए तैयार17 नवंबर, 2008 | कारोबार दुकानों से कतरा रहे हैं ग्राहक14 नवंबर, 2008 | कारोबार मंदी के पसरने में आ रही है तेज़ी13 नवंबर, 2008 | कारोबार विकसित अर्थव्यवस्थाओं को लेकर चिंता07 नवंबर, 2008 | कारोबार आईएमएफ़ के साथ पाक की बातचीत21 अक्तूबर, 2008 | कारोबार 'वित्तीय व्यवस्था तबाही की कगार पर'11 अक्तूबर, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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