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आईएमएफ़ बड़ी भूमिका के लिए तैयार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने कहा कि यदि उसे आर्थिक संकट में बड़ी भूमिका निभानी है तो उसे और धन की ज़रूरत होगी. आईएमएफ़ के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस-कान ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उनकी संस्था को कम से कम 100 अरब डॉलर की आवश्कता होगी. साथ ही उन्होंने ब्याज दरों में कटौती को जारी रखने को कहा. आईएमएफ़ प्रमुख का बयान ऐसे वक्त आया है जब जापान ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि उनकी अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में प्रवेश कर गई है. इसके पहले हाल में जी-20 की बैठक में मंदी से निपटने के लिए कार्य योजना बनाने पर सहमति हुई थी. हालाँकि साझा योजना पर सहमति नहीं बन पाई थी लेकिन तय हुआ था कि सभी देश अपने घरेलू हालात के मुताबिक उचित क़दम उठाएंगे ताकि मंदी को ख़त्म किया जा सके. उन वित्तीय कंपनियों की सूची जारी करने पर भी सहमति बनी जिनके डूबने से वैश्विक वित्त व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसके पहले एशिया और यूरोप ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से अपील की थी कि वे वैश्विक आर्थिक संकट से गंभीर रुप से प्रभावित देशों की सहायता में अहम भूमिका निभाए. अपेक्षाएँ बढ़ीं इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने कहा था कि विश्व के केंद्रीय बैंकों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को विकासशील देशों के बैंकों की मदद के लिए और आपात स्थिति का सामना करने के लिए कर्ज़ का प्रावधान करना पड़ सकता है. पिछले कुछ हफ़्तों में विश्व के केंद्रीय बैंकों और सरकारों ने अरबों डॉलर बाज़ारों में लगाया है लेकिन बाज़ार वित्तीय से संकट के उबर नहीं पाए हैं. उधर 1970 के दशक के बाद आइसलैंड पहला पश्चिमी देश है जिसने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से आपात मदद के लिए अनुरोध किया था. पाकिस्तान ने भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 7.6 अरब डॉलर का कर्ज़ माँगा है. पाकिस्तान का कहना है कि उसे अपने अंतरराष्ट्रीय कर्ज़ की किस्तें चुकाने के लिए तत्काल सहायता की ज़रूरत है. अगर पाकिस्तान को यह रकम नहीं मिलती है तो वह कर्ज़ की किस्तें नहीं चुका पाएगा. पाकिस्तान सरकार ने कई अन्य स्रोतों से कर्ज़ लेने की कोशिश की थी लेकिन नाकाम रहने के बाद उसे आईएमएफ़ का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा है. |
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