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'वित्तीय व्यवस्था तबाही की कगार पर' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस-कान ने चेतावनी दी है कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को तबाही की कगार पर पहुँचा दिया गया है. वॉशिंगटन में उन्होंने कहा कि वे पिछले कई महीनों से वित्तीय संकट से निपटने के लिए एकजुट प्रयास करने की सलाह दे रहे थे. हालांकि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ़) ने संकट से निपटने के लिए जी-7 देशों के पाँच सूत्रीय प्रस्तावों को मंज़ूरी दे दी है. लेकिन उसने कहा है कि इससे अधिक प्रयास करने की ज़रुरत है. आएमएफ़ ने कहा है कि वो ज़रुरत पर पड़ने पर किसी भी देश की सहायता देने के लिए तैयार है क्योंकि इस संकट का असर सिर्फ़ विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर नहीं पड़ने वाला है. कड़ी झिड़की शुक्रवार रात को वाशिंगटन में जुटे दुनिया के सबसे अमीर औद्योगिक देशों के वित्तमंत्रियों ने अपनी बैठक के बाद कहा कि उनके बीच संकट के हल के लिए पाँच सूत्री उपायों पर सहमति हो गई है. लेकिन अभी उस सहमति पर जी-सात समूह के वित्तमंत्रियों के हस्ताक्षरों की स्याही सूखी भी नहीं होगी कि इस बैठक की मेज़बानी कर रही संस्था के प्रमुख ने ही उन्हें कड़ी झिड़की लगाई है. जी-सात देशों की घोषणा को चौबीस घंटे भी नहीं हुए थे कि आईएमएफ़ के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस कान ने कहा कि दुनिया की महाशक्तियों ने अभी तक जो भी क़दम उठाए हैं उनसे ना तो बाजा़र सँभला है और ना ही निवेशकों का डिगा विश्वास ठहर सका है. उन्होंने कहा कि आज नहीं, पिछले कई महीनों से वे सबसे कह रहे हैं कि संकट से निबटना है तो सबको सोच-समझकर एक समन्वय के साथ प्रयास करना होगा. "आईएमएफ़ ने अगर कई महीने नहीं तो कई हफ़्तों से ज़रूर बार-बार ये कहा है जो भी प्रयास किए जा रहे हैं उनमें एक तालमेल रखना ज़रूरी है क्योंकि इस तरह के संकट का समाधान आप अपने देश में ही नहीं निकाल सकते. ऐसे में कुछ देश अगर बिना दूसरे देशों के साथ तालमेल किए कोई क़दम उठाते हैं तो उससे मदद की जगह नुक़सान अधिक हो सकता है." उन्होंने कहा कि अभी और उपाय करने की ज़रूरत है. जी-7 की योजना शुक्रवार को दुनिया के सात धनी औद्योगिक देशों ने बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को दिवालिया होने से बचाने के लिए हरसंभव उपाय करने की घोषणा की थी. जी-सात देशों ने जिस योजना की घोषणा की है उसमें वित्तीय बाजा़र में पूँजी की कमी ना हो इसके लिए हरसंभव उपाय करने का संकल्प किया गया है, फिर ये सुनिश्चित करने की बात की गई है कि संकटग्रस्त बैंक अपनी-अपनी सरकारों और निजी निवेशकों से और पूँजी ले सकें इसका प्रबंध किया जाए, और आवासीय ऋण संकट के हल की दिशा में भी प्रयास करने की बात की गई है.
अमरीकी वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन ने उस पाँच सूत्री योजना की जानकारी दी, जिसे जी-7 के वित्त मंत्रियों की मंज़ूरी मिली है. इस योजना का उद्देश्य है बाज़ार में कर्ज़ के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराना और रुके पड़े आवासीय ऋण बाज़ार को आगे बढ़ाना. शुक्रवार को ही हेनरी पॉलसन ने घोषणा की थी कि अमरीका 1930 के बाद पहली बार सीधे बैंकों में निवेश करेगा. ब्रिटेन ने भी ऐसे ही क़दमों की घोषणा की थी. मगर आलोचकों का कहना है कि इन उपायों में विस्तारपूर्वक कुछ नहीं कहा गया है. इसके बाद अब प्रेक्षकों का मत है कि जी-सात के वित्तमंत्री जिस इरादे के साथ इस सप्ताहांत वाशिंगटन में जुटे थे कि सोमवार को बाज़ार खुले उससे पहले ही बाज़ार को अपने हाथों से सहारा दे सकें, उसका फ़ैसला अब उनके हाथों में ना होकर स्वयं बाजा़र के हाथों में चला गया है. वैसे अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने दुनिया के धनी औद्योगिक देशों से अपील की है कि मौजूदा आर्थिक संकट से निपटने के लिए वे कोई भी एकतरफ़ा क़दम न उठाएँ. वॉशिंगटन में ग्रुप-7 देशों के वित्त मंत्रियों से मुलाक़ात के बाद राष्ट्रपति बुश ने कहा कि इस गंभीर आर्थिक संकट से निपटने के लिए सभी को मिल-जुल कर क़दम उठाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट से निपटने के लिए विश्व स्तर पर कार्रवाई करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि जी-7 देश वित्तीय बाज़ार में नक़दी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मिल-जुलकर क़दम उठाएँगे. |
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