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औद्योगिक विकास की दर धराशाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैश्विक आर्थिक मंदी का असर भारत में दिखाई देने लगा है और औद्योगिक विकास की दर पिछले साल के 10.9 प्रतिशत की तुलना में 1.3 प्रतिशत रह गई है. केंद्रीय सांख्यिकी संस्थान ने औद्योगिक विकास के जो सूचकांक शुक्रवार को जारी किए हैं उसके अनुसार भारत में निर्माण क्षेत्र के विकास की दर 1.1 प्रतिशत ही रह गई है. जबकि अगस्त, 2007 में यह दर 10.7 प्रतिशत थी. विशेषज्ञों का कहना है कि एक तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में आई मंदी के चलते नक़दी की कमी झेलनी पड़ रही है और उस पर से महंगाई पर काबू पाने के लिए भारत सरकार ने कुछ कड़े क़दम उठाए हैं. इन दोनों ने मिलकर औद्योगिक विकास की दर को धराशाई कर दिया है. हालांकि अपने बयान में भारत के वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने औद्योगिक विकास सूचकांक (आईआईपी) के आँकड़ों की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा दिए हैं. भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग परिसंघ (फ़िक्की) ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि महंगाई पर क़ाबू पाने के लिए मौद्रिक नीति पर पड़े दबाव की वजह से निर्माण उद्योग की लय टूटी है. फ़िक्की ने भारत सरकार से तत्काल क़दम उठाने की माँग की है. उधर भारतीय उद्योग महासंघ (सीआईआई) ने कैश रिज़र्व रैपो (सीआरआर) की दर में कटौती की रिज़र्व बैंक की घोषणा का स्वागत किया है. सीआईआई ने कहा है कि यह इस समय की ज़रूरत थी. | इससे जुड़ी ख़बरें डाओ, निक्केई के बाद यूरोपीय बाज़ार लुढ़के10 अक्तूबर, 2008 | कारोबार एशियाई बाज़ारों में अफ़रा-तफ़री 10 अक्तूबर, 2008 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ार में मची खलबली10 अक्तूबर, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ारों में उठा-पटक का दौर जारी 10 अक्तूबर, 2008 | कारोबार अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने का आश्वासन10 अक्तूबर, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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