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शुक्रवार, 10 अक्तूबर, 2008 को 05:28 GMT तक के समाचार
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भारतीय शेयर बाज़ार में मची खलबली
बीएसई बाज़ार के निवेशक
महत्वपूर्ण है कि एशियाई शेयर बाज़ारों में ख़ासी गिरावट आई है
न्यूयॉर्क में डाओ जोंस, टोक्यो में निकेई के बाद भारतीय शेयर बाज़ार में भी भारी गिरावट आई. बीएसई 800 अंक नीचे गिरा जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ़्टी में भी गिरावट आई.

भारतीय शेयर बाज़ार में भी शुक्रवार सुबह कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट से हुई.

इसके बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक दम हरकत में आते हुए बाज़ार में 60 हज़ार करोड़ रुपए डालने के मकसद से कैश-रिज़र्व-रेशो (सीआरआर) में एक प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है.

महत्वपूर्ण है कि आरबीआई का ये फ़ैसला शनिवार से लागू हो जाएगा. आरबीआई ने हाल में ब्याज दर 0.5 प्रतिशत घटाई थी और अब सीआरआर घट कर 7.5 प्रतिशत रह जाएगी.

इसके बाद बाज़ार थोड़ा संभाल ज़रूर. लेकिन दिन का कारोबार ख़त्म होने पर 7.07 प्रतिशत नीचे गिरकर 10527.85 अंकों पर बंद हुआ है. बाज़ार में 800.51 अंकों की गिरावट दर्ज हुई.

एक हज़ार अंक की गिरावट

शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत में बॉम्बे शेयर बाज़ार का सेंसेक्स (बीएसई) 1088 अंक गिरा और 10239 पर जा पहुँचा.

उधर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) भी 314 अंक की गिरावट से शुरु हुआ और 3198 अंक तक गिर गया.

शुरुआत के बाद शेयर बाज़ार कुछ संभले. और दिन का कारोबार बंद होने पर बीएसई 800.51 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ.

एनएसई का निफ़्टी 6.65 प्रतिशत नीचे गिरकर 3279 पर बंद हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कोई आसार नहीं हैं कि अगले कुछ दिनों के भीतर बाज़ारों में किसी तरह की स्थिरता आएगी.

ग़ौरतलब है कि अमरीका के न्यूयॉर्क में डाओ जोंस सूचकांक लगातार सात दिन गिरा है और पाँच साल में पहली बार 9000 से नीचे जा पहुँचा है.

ऐसा ही हाल टोक्यो के निक्केई, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य जगह पर है.

रुपये की कीमत गिरी

पर्यवेक्षकों के अनुसार अमरीका में वित्तीय संकट के बाद पूरी दुनिया में पैदा हुई आर्थिक समस्या के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विश्व के निवेशकों का शेयर बाज़ार में अभी ये विश्वास कायम नहीं हुआ.

निवेशकों को भरोसा नहीं है कि इस वित्तीय संकट का समाधान आने वाले समय में जल्द हो पाएगा.

ग़ौरतलब है कि रुपये की कीमत भी ख़ासी गिरी है और शुक्रवार को एक अमरीकी डॉलर की कीमत 49.07 रुपये थी.

ये मई 2002 के बाद रुपये की कीमत में सबसे अधिक गिरावट है.

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