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टाटा ने किया एक और बड़ा सौदा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की सॉफ़्टवेयर सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (टीसीएस) ने अमरीकी कंपनी सिटीग्रुप की एक भारतीय इकाई को ख़रीदने के लिए सौदा किया है. ये सौदा 50 करोड़ डॉलर से भी ज़्यादा का है, और टीसीएस इसके लिए नक़द भुगतान करेगा. टीसीएस कंपनी के प्रमुख एस रामदुरै और सिटीग्रुप की दक्षिण एशियाई इकाई के प्रमुख संजय नायर ने बुधवार को मुंबई में इस आशय के समझौते पर हस्ताक्षर किए. समझौते के तरह टीसीएस सिटीग्रुप की भारत स्थित 'ऑफ़िस सपोर्ट' कंपनी सिटीग्रुप ग्लोबल सर्विसेज़ लिमिटेड को ख़रीद रहा है. सिटीग्रुप की इस कंपनी के सात भारतीय कार्यालयों में कुल 12 हज़ार सॉफ़्टवेयर इंजीनियर, एकाउंटेंट और अन्य पेशेवर कर्मचारी काम करते हैं. इस सौदे के बाद अब सिटीग्रुप की कंपनियों को कॉल सेंटर, सॉफ़्टवेयर और लेखा संबंधी सेवाएँ टीसीएस ही उपलब्ध कराएगी. नकदी का संकट उल्लेखनीय है कि अमरीकी वित्तीय जगत को हिला कर रख देने वाले नकदी के संकट से बुरी तरह प्रभावति कंपनियों में सिटीग्रुप भी शामिल है. अपनी परेशानियों को कम करने के लिए सिटीग्रुप दुनिया भर में अपने उन परिसंपत्तियों और इकाइयों को बेचने की कोशिश कर रहा है, जो या कम मुनाफ़ा दे रहे हैं या फिर जो कि बैंकिंग सेवा के उसके मूल काम से हट कर हैं. टीसीएस के प्रमुख रामदुरै ने सिटीग्रुप के साथ हुए सौदे को ऐतिहासिक बताया है. हालाँकि विश्लेषकों का कहना है कि टीसीएस ने कोई सस्ता सौदा नहीं किया है. |
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