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'थोड़ा असर तो पड़ेगा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले छह सात महीने में सेंसेक्स में आई गिरावट का कारण सिर्फ़ और सिर्फ़ विदेशी संस्थागत निवेशकों का भारतीय बाज़ार से पैसा निकालना है. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि इनमें से ज़्यादातर निवेशक अमरीका और यूरोप के थे. उनकी अर्थव्यवस्था डांवाडोल हुई है तो वो कैश के लिए अपना हिस्सा बेच रहे हैं. ख़ास कर आप देखेंगे कि दो महीने में सबसे अधिक पैसा निकाला है विदेशी संस्थागत निवेशकों ने. इन निवेशकों ने क़रीब 150 अरब डॉलर लगाया है बाज़ार में जिसमें से कुछ पैसा वो निकाल रहे हैं. वित्त मंत्रि जो कह रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव मज़बूत है उसको मैं मानता हूं. असली अर्थव्यवस्था जो है वो सात प्रतिशत से विकास करता रहेगा. हां ये ज़रुर है कि वित्तीय अर्थव्यवस्था पर थोड़ा फ़र्क पड़ेगा. थोड़ा असर पड़ेगा ऐसा इसलिए होगा क्योंकि अमरीकी अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब है इससे पूरी दुनिया में क्रेडिट क्रंच या पैसे की कमी होगी. इसका असर भारत पर भी पड़ेगा. विकास दर पर पड़ेगा. मुझे लगता है कि जो हमारी विकास दर है वो दो ढाई प्रतिशत कम हो सकती है यानी नौ की जगह सात या साढ़े छह प्रतिशत पर आ सकती है. जब विकास दर नौ प्रतिशत से सात या साढ़े छह पर आएगी तो थोड़ी दिक्कतें होंगी. लेकिन अगर अमरीका की विकास दर शून्य भी हो जाए तो भी भारत साढ़े छह प्रतिशत की दर से विकास कर सकता है हालांकि ये कम तो है ही पिछले पाँच छह साल में भारत के विकास को देखते हुए. दिक्कत होगी वित्तीय सेवाएं देने वालों की. म्युचुअल फंड बेचने वालों की, ब्रोकरों की और रियल एस्टेट से जुड़े लोगों की. यह देखने में आया है कि पिछले कुछ वर्षों में पैसा बहुत आया है तो पेंशन देने वालों की, ब्रोकरों की और इस तरह की सेवाएं देने वालों की संख्या बढ़ी है और उनकी आमदनी भी. इस तरह की आमदनी में कमी होगी और हो सकता है कि इस सेक्टर में नई नौकरियां न आएं. आने वाले दिनों में हो सकता है कि रियल एस्टेट मंदा पड़ जाए. कंस्ट्रक्शन रुकेगा तो इससे जुड़े छोटे उद्योगों को नुकसान होगा. जैसे दरवाजा बनाने वाले, खिड़की बनाने वाले और इस तरह के उद्योगों में थोड़ी मंदी आ जाएगी. अभी ही स्टील और सीमेंट के दाम थोड़े कम हो रहे हैं. पिछले दिनों रिज़र्व बैंक ने सीआरआर रेट कम किया है. हालांकि लोन अभी सस्ते नहीं हुए हैं लेकिन फिलहाल रियल एस्टेट में क़ीमतें बढ़ नहीं रही हैं. कुल मिलाकर अमरीकी संकट का थोड़ा असर पड़ेगा लेकिन भारत के विकास की कहानी फिलहाल इतनी जल्दी ख़त्म नहीं होने वाली है. बीबीसी संवाददाता सुशील झा से बातचीत पर आधारित | इससे जुड़ी ख़बरें शेयर बाज़ार में फिसलन के मायने26 जनवरी, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ारों ने लगाया ग़ोता13 मार्च, 2008 | कारोबार सूचकांक ने फिर लगाया गोता10 मार्च, 2008 | कारोबार एशियाई शेयर बाज़ारों में सुधार19 मार्च, 2008 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ार में भी आया उछाल19 मार्च, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ार एक बार फिर लुढ़के17 मार्च, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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