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भारतीय शेयर बाज़ार में भी आया उछाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व के ब्याज दर में कटौती का भारतीय शेयर बाज़ार पर भी सकारात्मक असर पड़ा है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक में बुधवार को ख़ासा उछाल आया है. शुरुआती कारोबार में तीस शेयरों वाले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक में 620 अंकों का उछाल आया और वह 15453 अंकों पर जा पहुँचा. इसके बाद भी वह अलग-अलग समय पर 492 अंकों की बढ़त के साथ चल रहा था. बीएसई में सूचीबद्ध लगभग सभी बड़े शेयरों के भाव में ज़बरदस्त उछाल आया. महत्वपूर्ण है कि एशिया के कई शेयर बाज़ारों में अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व की 0.75 प्रतिशत के ब्याज दर की कटौती का असर देखने को मिला. जापान, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाज़ारों में भी बुधवार को तेज़ी देखने को मिली. निफ़्टी में भी उछाल अमेरिकी सरकार के इस कदम का असर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज़ (निफ़्टी) पर भी देखा गया. एनएसई का सूचकांक 182 अंक की बढ़त के साथ 4715 के स्तर तक पहुंच गया. एनएसई में रिलायंस इंडस्ट्रीज़, इंफ़ोसिस टेक्टनोलॉजी और कुछ अन्य अधिक मुनाफ़ा देने वाली कंपनियों के शेयरों के मूल्य में ख़ासी वृद्धि देखी गई. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका में ब्याज दरों में फिर कटौती18 मार्च, 2008 | कारोबार अमरीकी, एशियाई शेयर बाज़ारों में सुधार19 मार्च, 2008 | कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलू01 मई, 2006 | कारोबार सरकार की आश्वस्त करने की कोशिश21 मई, 2006 | कारोबार मुंबई सूचकांक फिर रिकॉर्ड स्तर पर26 अक्तूबर, 2007 | कारोबार चंद दिनों में साफ़ हो गए अरबों रुपए22 जनवरी, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ार में फिसलन के मायने26 जनवरी, 2008 | कारोबार एशियाई शेयर बाज़ारों में कुछ सुधार18 मार्च, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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