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बुधवार, 03 मई, 2006 को 16:23 GMT तक के समाचार
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भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलू

पिछले कुछ सालों से भारतीय अर्थव्यवस्था काफ़ी तेज़ी से आगे बढ़ रही है. औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में नौ फ़ीसदी की दर से विकास हो रहा है. वहीं आर्थिक शक्ति की बदौलत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख बढ़ी है. लेकिन भारत की करीब 65 फ़ीसदी जनता जिस कृषि क्षेत्र पर सबसे ज़्यादा निर्भर करती है वो विकास की दौड़ मे कहीं पीछे है और अनेक इलाक़ों में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलूओं पर एक नज़र...


किस मोड़ पर है भारतीय अर्थव्यवस्था?

पूरी दुनिया इन दिनों भारतीय अर्थव्यवस्था का दम भर रही है. आरबीआई ने अपने वार्षिक नीति में कहा है कि वर्ष 2006-07 में विकास दर 7.5-8.0 के बीच रहने की उम्मीद है. वहीं बेरोज़गारी, आधारभूत ढाँचे की कमी तस्वीर का दूसरा रुख़ है. आखिर क्या है वास्तविकता?


भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका?

भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है लेकिन कृषि क्षेत्र पीछे छूट रहा है जबकि भारत के करीब 65 फ़ीसदी लोग कृषि और कृषि आधारित कामों पर निर्भर करते हैं. कौन-कौन सी ऐसी समस्याएँ हैं जो कृषि के विकास में अवरोधक बनी हुई हैं?


भारतीय शेयर बाज़ार का हाल

भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज़ी का फ़ायदा भारतीय शेयर बाज़ार को भी मिला है. सेंसेक्स 12 हज़ार का आँकड़ा छू चुका है. विदेशी संस्थागत निवेश और आर्थिक नीतियाँ भी शेयर बाज़ार की तेज़ी का कारण हैं.


विदेश नीति में आर्थिक विकास की भूमिका

भारत आज बड़ी आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है. इसे देखते हुए भारत के प्रति दूसरे देशों की विदेश नीति में अहम बदलाव देखने को मिले हैं. विशेषज्ञ भारत-अमरीका परमाणु समझौते को इस बदलाव की एक मिसाल मानते हैं.

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