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किस सेक्टर पर कितना असर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी अर्थव्यवस्था की ख़राब हालत का असर पूरी दुनिया में दिखने लगा है. भारतीय अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रह गई है और इसका असर शेयर बाज़ार पर दिख रहा है. लेकिन भारत के कौन से सेक्टर इससे प्रभावित हो सकते हैं या फिर भारतीय अर्थव्यवस्था के किन सेक्टरों पर इस मंदी का क्या संभावित असर हो सकता है. नौकरियां भारतीय कंपनियों में नौकरियों पर कोई ख़ास असर पड़ने वाला नहीं है. असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जिनका संबंध उन अमरीकी कंपनियों से है जिनकी हालत ख़राब है. मसलन लीमैन ब्रदर्स के दिवालिया होने के बाद इसकी भारत शाखा में की लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है. बैंकिंग सेक्टर शेयर बाज़ार में जो सेक्टर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है वो है बैंकिंग सेक्टर. जिन बैंकों का अमरीकी बाज़ार में बड़ा एक्सपोज़र है उन्हें नुकसान की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है. पिछले दिनों आईसीआईसीआई के बारे में अफ़वाह उड़ी थी लेकिन रिज़र्व बैंक और बैंक के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि बैंक की स्थिति बिल्कुल अच्छी है. सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का भी थोड़ा एक्सपोज़र है लेकिन इतना नहीं कि बड़ा नुकसान हो. बाकी भारत के किसी सरकारी या निजी बैंक का अमरीका या अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बहुत पैसा नहीं लगा है. एआईजी के साथ मिलकर इंश्योरेंस कंपनी चला रही टाटा को भी बहुत नुकसान नहीं हुआ है. भारत के अभी तक क इतिहास में कभी को बैंक दिवालिया नहीं हुआ है और आगे इसकी उम्मीद कम है. ऐसा होता है तो सरकार आगे भी आ सकती है. वित्तीय सेक्टर वित्तीय व्यवस्था देने वाली कंपनियों को थोड़ा सा नुकसान ज़रुर होगा क्योंकि पूरी दुनिया में पैसे की कमी होने वाली है. ब्रोकरों को नुकसान होगा क्योंकि निवेश में कमी आएगी. इंश्योरेंस सेक्टर में थोड़ी मंदी की आशंका हो सकती है. रियल एस्टेट भारत में उन लोगों के लिए अच्छी ख़बर है जो घरों की क़ीमतें बेतहाशा बढ़ने के कारण घर नहीं ख़रीद पा रहे थे. आने वाले दिनों में रियल एस्टेट मंदा हो सकता है और क़ीमतों में कमी देखी जा सकती है. पिछले कुछ महीनों में वैसे भी कीमतों में कमी आ गई है. निर्माण कार्य रुक सकता है क्योंकि पैसे की कमी हो रही है जिसका फ़ायदा लोगों को मिलेगा. पेंशन पेंशन सेक्टर में उन कंपनियों को नुकसान होगा जिन्होंने पैसा मार्केट में लगाया है बड़े रिटर्न की उम्मीद में. सरकारी और अधिकतर निजी कंपनियां पेंशन का पैसा आम तौर पर बाज़ार में नहीं लगाती हैं. पेंशन निधि के लिए सरकार की गारंटी होती है लेकिन अगर किसी कंपनी ने बाज़ार में पैसा लगाया है और अभी नुकसान है तो कुछ महीनों में स्थिति बेहतर हो सकती है. इसमें नुकसान उन्हीं को होगा जो कुछ महीनों में रिटायर होने वाले हों और उनकी पेंशन बाज़ार में रखी गई हो. आम निवेशक पिछले एक साल में भारत में आम निवेशकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज़ की गई है. कई ऐसे लोगों ने भी बाज़ार में निवेश किया जिन्हें मार्केट का कोई अंदाज़ा नहीं है. इसमें उन लोगों को नुकसान होगा जिन्होंने सिर्फ पैसा कमाने के लालच से पैसे लगाए. जिन निवेशकों ने लंबे समय के लिए पैसा लगाया है उन्हें नुकसान नहीं होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें शेयर बाज़ार में फिसलन के मायने26 जनवरी, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ारों ने लगाया ग़ोता13 मार्च, 2008 | कारोबार सूचकांक ने फिर लगाया गोता10 मार्च, 2008 | कारोबार एशियाई शेयर बाज़ारों में सुधार19 मार्च, 2008 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ार में भी आया उछाल19 मार्च, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ार एक बार फिर लुढ़के17 मार्च, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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