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बैंको की मदद के लिए देशों की योजना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कई यूरोपीय देशों ने बैंकों की मदद के लिए अरबों डॉलर के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है. जर्मनी ने 683 अरब डॉलर की मदद की घोषणा की है तो फ़्रांस करीब 350 अरब यूरो ख़र्च करेगा जबकि स्पेन ने 100 अरब यूरो की धनराशि जुटाई है. ऑस्ट्रिया और इटली ने भी ऐसे ही क़दम उठाए हैं. इसमें से ज़्यादा धनराशि का इस्तेमाल बैंकों के बीच उधारी की गारंटी में किया जाएगा. यूरो इस्तेमाल करने वाले 15 देशों के बीच इसे लेकर हाल ही में सहमति हुई थी. इन क़दमों के तहत एक तो बैंकों के बीच उधारी की गारंटी की बात शामिल है और साथ ही वित्तीय संस्थानों में हिस्सेदारी की बात भी. भरोसा दिलाने की कोशिश ब्रिटेन ने रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड, लॉयड्स टीएसबी और एचबॉस में करदाताओं का 37 अरब डॉलर लगाने का फ़ैसला किया है. रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड के शेयरों में सोमवार को जितनी गिरावट आई उतनी पिछले पंद्रह साल में कभी नहीं आई थी. ये शेयर लगभग चालीस प्रतिशत नीचे गिर गए थे. इस कारण कुछ समय के लिए कारोबार ही बंद करना पड़ा था. ये ख़बर आग की तरह फैली कि लॉयड्स टीएसबी और बार्कलेज़ के साथ साथ बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड के प्रतिनिधि ब्रिटेन के वित्तमंत्री के साथ बैठक कर रहे हैं. इससे निवेशकर्ता काफ़ी सतर्क हो गए. अफ़वाह ये फैली कि ये सभी बैंक ख़ुद को बचाने के लिए 26-26 अरब डॉलर की माँग कर रहे हैं. बाद में बार्कलेज़ बैंक ने इनका खंडन किया. यूरोप भर में सरकारें अपने वित्तीय संस्थानों को भरोसा दिलाने में कोई क़सर नहीं छोड़ रही हैं. एक साझा बयान में कहा गया है कि यूरोपीय संघ का हर नेता इस संकट से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए हर उपाय करेगा – चाहे फिर केंद्रीय बैंक को हस्तक्षेप करना पड़े या फिर अलग अलग बैंकों को बचाने के लिए क़दम उठाए जाएँ. फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलाई सारकोज़ी ने साझा बयान पढ़कर सुनाया, "हम राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के प्रमुख ये घोषणा करते हैं कि वित्तीय व्यवस्था को स्थिर रखने के लिए मिलजुल कर काम करेंगे. चाहे केंद्रीय बैंकों के ज़रिए नक़दी मुहैया करवाने का मामला हो या फिर बैंकों में जमापूँजी को सुरक्षित रखने के उपाय करने हों. " कूटनीतिक असर जिस रफ़्तार से शेयर गिरे हैं उससे यूरोप भर में हड़कंप मचा हुआ है और इसका असर देशों के आपसी संबंधों पर पड़ता दिख रहा है. पुराने दोस्त काम नहीं आ रहे हैं तो छोटे देश अब नए मित्र बना रहे हैं. छोटे से टापू वाले देश आइसलैंड का हाल तो इतना ख़राब है कि वो ख़ुद को उबारने के लिए रूस से उधार माँग रहा है. आइसलैंड के प्रधानमंत्री ग्यैर हौर्टअ ने कहा है कि उन्होंने दुनिया भर में अपने मित्र और सहयोगी देशों से मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ. उधर आईसलैंड के स्टॉक एक्सचेंज में मंगलवार तक कारोबार स्थगित रहेगा. आइसलैंड ने रूस से पाँच अरब डॉलर उधार माँगे हैं. लेकिन रूस की अपनी हालत भी पतली है. सोमवार को वहाँ के शेयर बीस प्रतिशत तक लुढ़क गए थे. रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवदेव ने घोषणा की है कि देश के प्रमुख बैंकों को खड़ा रखने के लिए इमरजंसी फ़ंड से बीस अरब डॉलर लगाए जाएँगे. विश्लेषकों का कहना है कि इस संकट से बैंकों पर जैसे बज्र पड़ गया है. अब ये अनुमान लगाया जाने लगा है कि बैंकों के इस संकट से अर्थव्यवस्था पर कितना बुरा प्रभाव पड़ेगा. अमरीका भी यूरोप की तरह क़दम उठाने पर विचार कर रहा है. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि उनका देश ठोस क़दम उठा रहे हैं. इटली के राष्ट्रपति के साथ बोलते हुए बुश ने कहा कि अमरीका यूरोप के साथ मिलकर काम कर रहा है. |
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