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बुधवार, 11 जून, 2008 को 19:22 GMT तक के समाचार
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घर-वाहन के लिए कर्ज़ होगा और महंगा
भारतीय रिज़र्व बैंक
बैंक ने ध्यान मुद्रास्फीति पर केंद्रित किया है जो 8.24 तक जा पहुँची है
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने लगातार बढ़ रही महँगाई पर क़ाबू पाने की कोशिश में अल्प अवधि ऋण की दर बढ़ा दी है.

रिज़र्व बैंक ने बुधवार को देर शाम अल्पअवधि ऋण दर यानी रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करने की घोषणा की है. इससे अब ब्याज़ की दर 7.75 प्रतिशत से बढ़कर 8.00 प्रतिशत हो जाएगी.

यह बढ़ोत्तरी तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी.

इससे घर से लेकर वाहन ख़रीदने के लिए लिया जाने वाला हर तरह का कर्ज़ महंगा होना तय है और साथ ही मौजूदा कर्ज़दारों के लिए ब्याज का बोझ बढ़ जाएगा.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर वायवी रेड्डी ने ब्याज दर बढ़ाने के संकेत पहले ही दिए थे.

सरकार ने महंगाई रोकने के लिए कई क़दम उठाए हैं और उसका बाज़ार पर असर होता नहीं दिख रहा है.

अब जबकि यह आशंका जताई जा रही है कि पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों का बाज़ार पर बड़ा असर दिखने वाला है, रिज़र्व बैंक ने यह क़दम उठाया है.

महंगा कर्ज़

रेपो रेट वह दर है जिस पर रिज़र्व बैंक विभिन्न बैंकों को उनकी प्रतिभूतियों के बदले अल्प अवधि के लिए ऋण मुहैया कराती है.

इस कर्ज़ का इस्तेमाल बैंक अल्प अवधि की अपनी ज़रुरतों को पूरा करने के लिए करते हैं.

रेपो रेट में वृद्धि का मतलब है कि बैंकों को अधिक दर पर ऋण मिलेगा और इसलिए वे अपने ऋणों में भी ब्याज की दर बढ़ाएँगे.

पेट्रोल पंप
पिछले दिनों सरकार ने पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस के दाम बढ़ाए हैं

ज़ाहिर है कि इससे घर से लेकर वाहन लेने तक के लिए हर तरह का कर्ज़ लेना महंगा हो जाएगा.

इतना ही नहीं, जिन लोगों ने बैंक से पहले ही कर्ज़ ले रखा है अब इन्हें भी ब्याज़ की दरों में बढ़ोत्तरी का बोझ सहना होगा.

इससे पहले अप्रैल के अंत में रिज़र्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए लगातार बढ़ रही महँगाई को कम करने की दिशा में क़दम उठाते हुए कैश रिज़र्व रेश्यो (सीआरआर) यानी बैंकों द्वारा आरबीआई में जमा किए जाने वाली नकद राशि की दर को एक चौथाई फ़ीसदी बढ़ा दिया था.

हालांकि बुधवार को रिज़र्व बैंक ने सीआरआर में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की है.

रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोत्तरी के लिए बढ़ती मुद्रास्फीति को ज़िम्मेवार ठहराया है.

बैंक का कहना है कि मुद्रास्फीति बढ़ने का जो दूरगामी असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती.

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पिछले दिनों पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्यों में बढ़ोत्तरी के बाद रिज़र्व बैंक पर क़दम उठाने का दबाव बढ़ गया था.

विशेषज्ञ मानते हैं कि पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्यों में बढ़ोत्तरी का असर अगले दो हफ़्तों में दिखाई देने लगेगा. माना जा रहा है कि मुद्रास्फीति की दर दो अंको तक जा सकती है यानी दस से अधिक.

'निर्माण क्षेत्र पर असर'

भारतीय व्यापार और उद्योग परिसंघ (फ़िक्की) ने रिज़र्व बैंक की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि पहले से ही मंदी झेल रहे निर्माण क्षेत्र पर इसका विपरीत असर पड़ेगा.

निर्माण उद्योग पर असर
 बढ़ती मुद्रास्फिति के चलते यह क़दम उठाना रिज़र्ब बैंक के लिए ज़रूरी था लेकिन इससे निर्माण उद्योग के प्रदर्शन पर सीधी मार पड़ेगी
फ़िक्की

फ़िक्की ने अपने बयान में कहा है, "बढ़ती मुद्रास्फिति के चलते यह क़दम उठाना रिज़र्ब बैंक के लिए ज़रूरी था लेकिन इससे निर्माण उद्योग के प्रदर्शन पर सीधी मार पड़ेगी."

हालांकि महंगाई पर इसका असर होने की संभावना को ख़ारिज करते हुए फ़िक्की ने कहा है कि महंगाई तो विश्व स्तर पर बढ़ रही है.

उधर एसोचैम ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह मूल रुप से ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ है लेकिन महंगाई रोकने के लिए रिज़र्व बैंक और सरकार के क़दमों का समर्थन करता है.

खेतीबाड़ीमहंगाई कब तक?
लागत बढ़ने की वजह से महंगाई टिके रहने की आशंका जताई गई है.
अर्थशास्त्री भरत झुनझुनवालाबढ़ती महंगाई के कारण
भारत में बढ़ती महँगाई के मुख्य कारण बता रहे हैं डॉक्टर भरत झुनझनवाला.
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