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सरकार के रोके रुक नहीं रही महंगाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महंगाई पर लगाम लगाने के सरकारी प्रयासों के बावजूद भारत में महंगाई बढ़ती जा रही है. नए आँकड़ों के अनुसार मुद्रास्फीति की दर 8.24 प्रतिशत तक जा पहुँची है. 24 मई को ख़त्म हुए सप्ताह में मूल्यों के आधार पर ये आँकड़े जारी किए गए हैं. पिछले हफ़्ते जारी आंकड़ों के मुताबिक़ मुद्रास्फीति की दर 8.10 प्रतिशत थी. इस दौरान हालांकि फल, सब्ज़ियाँ और मसाले सस्ते हुए हैं लेकिन दालें और खाद्य तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी हुई और रबर, कपास और मूंगफली के बीज भी महंगे हुए. माना जा रहा है कि खाद्य तेलों की क़ीमतों ने महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. महंगाई के और बढ़ने की ख़बरें ऐसे समय में आई हैं जब विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के दो हफ़्ते जो आंकड़े आएँगे उसमें मुद्रास्फीति की दर 9.0 तक या इससे ऊपर जा सकती है. इस बीच देश में पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्यों में वृद्धी को लेकर हो रहे विरोध प्रर्दशन जारी हैं. सरकार का आश्वासन रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को जो आंकड़े जारी किए उसके अनुसार मुद्रास्फीति और बढ़ कर 8.24 प्रतिशत तक पहुँच गई है. रिजर्व बैंक के नए आंकड़ों से लगता है कि महंगाई पर लगाम लगाने के तमाम सरकारी प्रयास विफल रहे हैं. पिछले सप्ताह यह दर 8.10 प्रतिशत थी. 19 अप्रैल से अब तक महंगाई की दर 0.67 प्रतिशत ऊपर जा चुकी है. वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने महंगाई पर चिंता जताते हुए कहा है कि कच्चे तेल की क़ीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी के चलते मुद्रास्फीति का यह हाल है. वित्तमंत्री ने महंगाई पर क़ाबू पाने के लिए और क़दम उठाए जाने का आश्वासन देते हुए कहा है कि लोगों की मदद से कीमतों पर काबू पाया जा सकता है. समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्होंने अपने बयान में कहा, "दुनिया के दूसरे देशों की सरकारों की तरह भारत सरकार भी महंगाई से जूझ रही है. हमने वित्तीय, मौद्रिक और प्रशासनिक क़दम उठाए हैं और आगे भी क़दम उठाने जा रहे हैं." भाजपा कार्यकारिणी में पारित आर्थिक प्रस्ताव में महंगाई के लिए यूपीए सरकार की निंदा किए जाने का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "महंगाई के दौर पर ध्यान दिए बग़ैर सरकार की निंदा करना तो इस मामले का राजनीतिकरण करना है." राजनीतिक सिरदर्द
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम राजनीतिक दलों और आम लोगों से संयम बरतने को कह रहे हैं. प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार को फिजू़लखर्ची रोकने को कहा है. ऐसा करके प्रधानमंत्री ने वित्तीय प्रबंधन के साथ साथ राजनैतिक प्रबंधन की भी कोशिश की है. इस तरह के कदम सत्तर के दशक में बहुत ज़्यादा देखने मिलते थे. इससे पहले भी कई प्रधानमंत्रियों और मुख्य मंत्रियों ने मितव्ययिता के लिये कदम उठाने की घोषणा की थी. जिनमें से कई चर्चित भी रहे थे. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने कार्यकाल में एक समय अपने काफ़िले में गाड़ियों की संख्या कम कर दी थी. और तो और उन्होंने मंत्रिमंडल की बैठकों में भोज की जगह चने परोसना शुरु कर दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'खाद्यान्न संकट के लिए और सहायता'04 जून, 2008 | कारोबार रुक नहीं रही है महँगाई09 मई, 2008 | कारोबार भारत में महँगाई रिकॉर्ड स्तर पर02 मई, 2008 | कारोबार अनाज इतना महँगा क्यों, उपाय क्या?15 अप्रैल, 2008 | कारोबार तीन साल में महंगाई सबसे ज़्यादा04 अप्रैल, 2008 | कारोबार महँगाई रोकने के उपायों की घोषणा31 मार्च, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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