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'खाद्यान्न पर ख़र्च बढ़ाना होगा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि दुनिया के खाद्यान्न संकट से निपटने के लिए विकासशील देशों को कृषि क्षेत्र में 10 गुना अधिक राशि ख़र्च करनी होगी. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के प्रमुख ज़ाक डियूफ़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए 20 से 30 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी. खाद्यान्न संकट के कारण दुनिया के कई देशों में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई थी. इसको देखते हुए रोम में खाद्यान्न सुरक्षा सम्मेलन बुलाया गया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की ओर से इस सम्मेलन में दुनिया के नेताओं से खाद्यान्न की लगातार बढ़ रही कीमतों को काबू में करने के लिए प्रभावी प्रयास करने का प्रस्ताव आना है. इस मौके पर मून व्यापारिक रोक के रूप में कीमतों पर लगाम कसने के लिए कोई उपाय पेश कर सकते हैं. इस्लामिक देशों की बैठक उधर इस्लामिक विकास बैंक के सदस्य देश सउदी अरब की राजधानी जेद्दाह में इसी मसले को हल करने के लिए एक बैठक कर रहे हैं.
इस्लामिक विकास बैंक यानी आईडीबी ने ग़रीब इस्लामिक देशों की मदद के लिए पाँच साल में डेढ़ अरब डॉलर देने का फ़ैसला किया है. आईडीबी का मानना है कि इससे लगातार बढ़ रही खाद्यान्न की कीमतों को काबू करने में मदद मिलेगी. इसी तरह दक्षिण कोरिया के धार्मिक समूहों ने सरकार से माँग की है कि वो उत्तरी कोरिया के लिए आपातकालीन खाद्यान्न की मदद मुहैया कराएँ. अर्जेंटीना में भी किसानों ने अपने आंदोलन को एक हफ़्ते और बढ़ाने का फ़ैसला किया है. ये किसान पिछले छह दिनों से लगातार हड़ताल पर हैं. इनकी माँग है कि सरकार ने निर्यात पर जो कर बढ़ाया है उसे वो वापस ले. रोम में मंगलवार को हो रहे इस सम्मेलन की शुरुआत विवाद से हुई. सम्मेलन में ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे के हिस्सा लेने पर ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने कड़ी आपत्ति प्रकट की. इनका कहना है कि मुगाबे ने अपने देश में भूखे मर रहे लोगों के लिए कुछ नहीं किया. चेतावनी खाद्य और कृषि संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर खाद्यान्न की पैदावार बढ़ाने और उन लोगों तक इसे पहुँचाने का इंतज़ाम नहीं किया गया तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं.
ऐसा माना जा रहा है कि इस खाद्यान्न संकट ने 10 करोड़ लोगों को भुखमरी की तरफ़ ढकेल दिया है. आंकड़ों के अनुसार इस साल ग़रीब देशों को खाद्यान्न आयात करने के लिए 40 प्रतिशत ज़्यादा खर्च करना पड़ा है. खाद्य और कृषि संगठन ने दानकर्ता देशों से माँग की है कि वो विकासशील देशों की और अधिक मदद करें ताकि किसान बीज, खाद और किसानी से जुड़ी दूसरी चीज़ों को खरीद सकें. इस बैठक का एक बड़ा मुद्दा जैविक ईंधन भी होगा. पिछले कुछ सालों में मक्के का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया गया है. ऐसा माना जा रहा है कि बान की मून अमरीका से माँग कर सकते हैं कि वो जैविक ईंधन की पैदावार के लिए दी जाने वाली सब्सिडी को वापस लें ताकि इसका इस्तेमाल खाद्यान्न के तौर पर किया जा सके. बढ़ती लागत इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि खाद्य पदार्थों की विकासशील देशों से माँग बढ़ रही है और उत्पादन की लागत भी बढ़ रही है.
संयुक्त राष्ट्र संस्था खाद्य और कृषि संगठन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की जो क़ीमतें बढ़ी हैं वो पिछले सभी रिकॉर्ड से कहीं ज़्यादा है और उसकी कुछ वजह ये भी थी कि ख़राब मौसम की वजह से बहुत सी फ़सलें तबाह हो गई थीं. विश्व खाद्य संगठन की वार्षिक अनुमान रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2017 तक गेहूँ की क़ीमतों में 60 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है और वनस्पति तेल उस समय तक लगभग 80 प्रतिशत महंगा हो सकता है. दुनिया भर में वर्ष 2005 और 2007 के बीच गेहूँ, मक्का और तिलहन फ़सलों के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं. संगठन ने हालाँकि इन चीज़ों क़ीमतों में कुछ कमी होने की संभावना जताई है लेकिन यह कमी हाल के समय में हुई महंगाई के मुक़ाबले बहुत धीमी होगी. |
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