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महंगाई संकट पर एडीबी की चेतावनी
आसमान छूती महंगाई
खाने-पीने की चीज़ों के दाम आसमान छू रहे हैं
खाने की चीज़ों की क़ीमतों को लेकर एडीबी यानी एशियाई विकास बैंक ने शनिवार को एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि स्थिति इतनी ख़राब हो गई है कि एशिया में ग़रीबी को कम करने के जो प्रयास हुए हैं वो सब खाने की चीज़ों के बढ़ते दामों की बलि चढ़ जाएँगे.

एशियाई डेवलपमेंट बैंक की स्थापना 1966 में हुई थी और इसका उद्देश्य है एशिया-प्रशांत इलाक़े में लोगों की ज़िंदगी में बेहतरी लाने की कोशिश करना.

स्पेन की राजधानी मेड्रिड में एडीबी की 41वीं वार्षिक बैठक हो रही है जिसमें 67 सदस्य देशों सहित कई और देशों के राजनेता, निजी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रोफ़ेसर और ग़ैर-सरकारी संगठनों के सदस्य हिस्सा ले रहे हैं.

इस चार दिवसीय बैठक के पहले दिन शनिवार को इस बात पर चिंता जताई गई कि एशिया के एक अरब ग़रीब लोगों पर खाद्यान्नों की क़ीमत का सबसे गंभीर असर देखा जा रहा है.

चावल की क़ीमत एक साल में तीन गुना बढ़ गई है. खाने की चीज़ों के दाम में बढ़ोत्तरी 60 प्रतिशत है और अगर तेल की बढ़ती क़ीमतों को जोड़ा जाए तो एक साल में जो महंगाई 75 प्रतिशत बढ़ चुकी है.

यानी एशिया के आम परिवार को साल 2007 के मुकाबले वर्ष 2008 में तीन-चौथाई ख़र्चा ज़्यादा उठाना पड़ रहा है.

इसी स्थिति को देखते हुए एडीबी के अध्यक्ष हारुहीको कुरोदा का कहना है कि एशिया में लाखों लोगों को ग़रीबी की मार से निकालने का जितना काम किया गया है वो सब इस बढ़ती क़ीमत की बलि चढ़ जाएगा.

एडीबी अध्यक्ष का कहना है कि जब एक दशक पहले एशिया में वित्तीय संकट आया था तो उससे पाँच प्रतिशत जनसंख्या प्रभावित हुई थी लेकिन बढ़ती महंगाई इससे भी ज़्यादा लोगों को प्रभावित कर सकती है.

एडीबी का कहना है कि उसने अगले चार साल के लिए कम दरों पर 11 अरब 30 करोड़ डॉलर का एक कोष तैयार किया है ताकि ग़रीबी का मुक़ाबला किया जा सके.

एडीबी अध्यक्ष का कहना है कि इस पैसे को गाँवों में ढाँचागत सुविधाएँ बढ़ाने के लिए ख़र्च किया जाना चाहिए जैसे कि सिंचाई व्यवस्था में सुधार और सड़कों को बेहतर बनाना.

लेकिन महंगाई को लेकर चिंता एशिया तक सीमित नहीं है.

अफ्रीकी विकास बैंक ने भी कहा है कि उसने एक अरब डॉलर का कोष बनाया है और इस धन का इस्तेमाल उन लोगों तक खाना पहुँचाने के लिए किया जाएगा जो भूख से मरने की स्थिति का सामना कर रहे हैं.

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