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वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बड़े औद्योगीकृत देशों के समूह जी-7 के वित्तमंत्रियों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार के ठोस संकेत नहीं दिख रहे हैं. वाशिंगटन में बैठक के दौरान वित्तमंत्रियों ने आगाह किया है कि अंतरराष्ट्रीय ऋण बाज़ार का मौजूदा संकट उम्मीद से ज़्यादा दिन तक बरकरार रहने वाला है. बैठक से पहले ब्रितानी वित्तमंत्री एलिस्टेयर डार्लिंग ने दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों से आर्थिक संकट से निपटने के लिए तत्काल क़दम उठाने की माँग की. डार्लिंग ने मौजूदा संकट को सात दशक पहले आई आर्थिक मंदी के बाद का सबसे कठिन दौर बताया है. उन्होंने वित्तीय संस्थाओं पर निगरानी बढ़ाने और लेन-देन को ज़्यादा पारदर्शी बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. उल्लेखनीय है कि आठ महीने पहले अमरीकी होमलोन बाज़ार से शुरू हुआ ऋण संकट दुनिया भर में फैल चुका है. इसके कारण वित्तीय संस्थानों का घाटा 10 ख़रब डॉलर तक पहुँचने की आशंका व्यक्त की जा रही है. बाज़ार में गिरावट इससे पहले न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में शेयर औंधे मुँह लुढ़के. वहां बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. बताया जा रहा है कि जनरल इलैक्ट्रिक जैसे बड़े समूह की आमदनी में अपेक्षित लाभ न दिखने के चलते बाज़ार में मंदी का ख़तरा बढ़ गया है. इसी के चलते शेयर बाज़ार में यह गिरावट देखने को मिल रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका ने वित्तीय क़दमों की घोषणा की01 अप्रैल, 2008 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट31 मार्च, 2008 | कारोबार 'अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर में: बुश' 14 मार्च, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ारों में फिर गिरावट06 फ़रवरी, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ार में फिसलन के मायने26 जनवरी, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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