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खाद्य संकट से निपटने के लिए पैकेज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक ने अनाज की कमी से जूझ रहे देशों की मदद के लिए एक पैकेज तैयार किया है. इसी मुद्दे पर लातिनी और कैरेबियाई देशों की बैठक भी हो रही है. विश्व बैंक की ओर से ताज़ा मदद की पेशकश एक अरब बीस करोड़ डॉलर के पुराने पैकेज का हिस्सा है. इसके तहत सबसे ज़्यादा मदद की ज़रूरत वाले देशों को बीस करोड़ डॉलर की मदद दी जाएगी. हैती और लाइबेरिया को एक-एक करोड़ डॉलर मिलेंगे जबकि जिबूती को 50 लाख डॉलर की राशि मिलेगी. विश्व बैंक का कहना है कि अनाज की कमी और बढ़ती क़ीमतों से दुनिया भर में दस करोड़ लोग ग़रीबी की ओर बढ़ रहे हैं. विश्व बैंक का कहना है कि टोगो, यमन और कज़ाकिस्तान को भी तत्काल मदद की ज़रूरत है. विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ोएलिक का कहना है, "ये महत्वपूर्ण है कि हम इस मसले पर ध्यान केंद्रित करें. इस तरह की पहल से कुपोषण और भुखमरी के ख़तरे से निपटने में मदद मिलेगी." ज़रूरतमंद देशों को बीज और उर्वरकों के अलावा बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए भी पैसे दिए जाएंगे. विश्व बैंक अगले साल भी कृषि परियोजनाओं के लिए दो अरब डॉलर का अनुदान देगी. |
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