BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 16 मई, 2008 को 17:07 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
खाद्यान्न संकट के लिए मोटापा ज़िम्मेदार!
एक मोटा व्यक्ति
मोटे लोग एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में कैलोरी का अधिक उपभोग करते हैं
ब्रितानी विशेषज्ञों ने एक शोध के बाद कहा है कि दुनिया में खाद्यान्न्न संकट बढ़ने और जयवायु परिवर्तन में सबसे ज़्यादा योगदान मोटे लोगों का है.

लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के अनुसार एक मोटा व्यक्ति सामान्य इंसान की तुलना में 18 फ़ीसदी अधिक कैलोरी का उपभोग करता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में ईंधन के अधिक इस्तेमाल के लिए भी मोटे लोग ही ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं.

इसका पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ता और खाद्यान्न के दाम भी बढ़ जाते हैं, क्योंकि यातायात और खेती दोनों में ईंधन का इस्तेमाल होता है.

इन सबका परिणाम यह होता है कि ग़रीब लोग भोजन पाने के लिए संघर्ष करते हैं और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि 2015 तक दुनिया भर में मोटे लोगों की जनसंख्या दो गुनी बढ़कर 70 करोड़ हो जाएगी.

ब्रिटेन के लगभग एक चौथाई वयस्क मोटे लोगों की श्रेणी में आते हैं और भारत में भी काफ़ी लोग मोटापे की समस्या का सामना कर रहे हैं.

लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन की टीम के अनुसार एक मोटे व्यक्ति को अपनी ऊर्जा का सामान्य स्तर बनाए रखने के लिए 1680 कैलोरी की ज़रूरत होती है. वहीं उसे अपनी रोज़ की गतिविधियाँ चलाने के लिए 1280 कैलोरी की ज़रूरत होती है.

यह एक सामान्य इंसान की तुलना में पाँच गुना अधिक है.

 इस तरह मोटे लोगों पर आरोप लगाकर एक छोटी सी बात को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है
डॉक्टर, डेविड हसलाम, नेशनल मोटापा फ़ोरम

शोधकर्ताओं का कहना है कि खाद्यान्न के अधिक उपभोग से दो तरह के प्रभाव पड़ते है.

पहला यह कि इससे खाद्यान्न की माँग बढ़ जाती है और उत्पादन बढ़ता है. इसका मतलब यह कि खेती में ईधन का प्रयोग बढ़ेगा, जिससे माँग पूरी की जा सके. परिणामस्वरूप इससे ईंधन के दाम भी बढ़ेंगे.

ईंधन के दाम बढ़ने से खाद्यान्न की क़ीमत भी बढ़ जाती है, जिससे ग़रीबों के लिए खाद्यान्न ख़रीदना कठिन हो जाता है.

यातायात का संकट

शोधकर्ताओं का कहना है कि मोटे लोग केवल वाहनों के सहारे ही चल-फिर सकते हैं, जिससे यातायात पर बेवज़ह दबाव पड़ता है.

हालाँकि शोधकर्ताओं ने इसका समाधान भी बताया है.

शोध लेख के सहायक लेखक फ़िल एडवर्ड कहते हैं कि शहरी यातायात नीति पैदल और और साइकिल को बढ़ावा देती है. इससे खाद्यान्न की क़ीमतें घटेंगी, क्योंकि इससे तेल की माँग कम होगी.

उनके अनुसार कार के कम प्रयोग से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी घटेगा.

वहीं ब्रिटेन के नेशनल मोटापा फ़ोरम के डॉक्टर डेविड हसलाम का कहना है कि इस तरह मोटे लोगों पर आरोप लगाकर एक छोटी सी बात को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है.

वह इन बातों को मोटे लोगों के साथ पक्षपात बताते हुए कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन और खाद्यान्न की क़ीमते बढ़ने के कारण कुछ और ही हैं.

मोटापामोटापा घटाने की गोली
ऐसी गोली तैयार की गई है जो शरीर की अनावश्यक चर्बी को गला देती है.
बर्गरभूख रोकने वाला हॉर्मोन
वैज्ञानिकों का कहना है अगले दस वर्ष में भूख पर पूर्ण नियंत्रण करना संभव है.
सिगारधूम्रपान से जल्दी बूढ़े
मोटे और धूम्रपान करने वालों की उम्र कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ती है.
इससे जुड़ी ख़बरें
'महामारी बन रहा है मोटापा'
20 फ़रवरी, 2008 | विज्ञान
डटकर खाओ फिर भी पतले!
30 अप्रैल, 2008 | विज्ञान
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>