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सिंगुर को भी कार का इंतज़ार है | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टाटा मोटर्स की लखटकिया कार का इंतज़ार आम लोगों और विशेषज्ञों को चाहे जितना भी हो, लेकिन इसका सबसे ज्यादा इंतज़ार सिंगुर के लोगों को है. सिंगुर यानी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले का एक अनाम-सा कस्बा, जहाँ टाटा मोटर्स की इस कार के निर्माण संयंत्र की स्थापना के लिए ज़मीन के अधिग्रहण के सिलसिले में 2006 में लंबे अरसे तक आंदोलन चला था. लेकिन अब इलाक़े में हालात बदल गए हैं. अब स्थानीय लोगों को इस संयंत्र में लखटकिया कार बनने का इंतज़ार है. इस संयंत्र में उत्पादन शुरू होने से इलाक़े की तस्वीर बदल जाने की संभावना है. टाटा मोटर्स के परियोजना स्थल से सटे गोपीनगर गांव की बनानी घोष सवाल करती हैं कि क्या टाटा मोटर्स की लखटकिया कार के प्रदर्शन को टीवी पर दिखाया जाएगा. हम इसे देखना चाहते हैं. बनानी परियोजना स्थल पर फ्रेंड्स कैंटीन चलाती हैं जो संयंत्र के निर्माण कार्य में जुटे 2300 लोगों को खाना सप्लाई करती है. परियोजना स्थल पर सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात राजेश सांतरा कहते हैं कि लखटकिया कार जैसी ऐतिहासिक परियोजना से जुड़ना काफ़ी गर्व की बात है. यह फैक्ट्री पूरे इलाक़े की तस्वीर ही बदल देगी. इलाक़े की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी. दरअसल, इस परियोजना के लिए अपनी ज़मीन देने वाले लोगों में भी इस बात का अहसास है कि इसकी वजह से इलाक़े की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल जाएगी. परियोजना से सटे इलाक़े में जिस तापसी मलिक की जला कर हत्या कर दी गई थी, उसके भाई सुरजीत मलिक कहते हैं कि बहन की मौत के बाद उनका जीवन ही बदल गया था. लेकिन यह परियोजना इलाक़े का चेहरा बदल देगी. वो बताते हैं कि फिलहाल कोलकाता जाकर काम करने से उनको रोजाना 60-70 रुपए मिलते हैं, लेकिन फैक्ट्री शुरू हो जाने के बाद उनको रोजगार की तलाश में कोलकाता नहीं जाना पड़ेगा. उनके पिता मनोरंजन मलिक कहते हैं कि टाटा की इस परियोजना से इलाक़े की अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. वे कहते हैं कि दो साल पहले तक जिस ज़मीन की क़ीमत प्रति कट्ठा 10 से 15 हज़ार तक थी वह अब एक लाख रुपए प्रति कट्ठा बिक रही है. सिंगुर में लोग अब ज़मीन बेचना नहीं चाहते. वहाँ क़ीमतें कई गुना बढ़ गई हैं, लोगों को इसमें और बढ़ोत्तरी की उम्मीद है. बदलती तस्वीर इलाक़े के बेरोज़गार युवकों को भी अपनी किस्मत बदलने की उम्मीद है. दूसरी ओर, राज्य सरकार ने भी इस परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
भूमि सुधार आयुक्त पीके अग्रवाल कहते हैं कि सिंगुर में परियोजना के लिए अपनी जमीन देने वाले लोगों के बीच 53 एकड़ जमीन बांटने का फ़ैसला किया गया है. टाटा मोटर्स सिंगुर परियोजना में लगभग 1500 करोड़ रुपए का निवेश करेगी. यह परियोजना 645 एकड़ में लगेगी. बाकी 290 एकड़ में सहायक उद्योगों की स्थापना की जाएगी. इनसे इलाक़े के सैकड़ों बेरोजगार युवकों को रोज़गार मिलेगा. अब दिल्ली में इस लखटकिया कार के प्रदर्शन के बाद इलाक़े के लोगों को उम्मीद है कि सिंगुर परियोजना में उक्त कार का निर्माण कार्य जल्दी ही शुरू हो जाएगा और यह कार इलाके की आर्थिक तस्वीर बदल देगी. |
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