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एक लाख की 'नैनो' लाया टाटा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली में चल रहे ऑटो एक्सपो- 2008 में टाटा मोटर्स ने गुरुवार को अपनी लखटकिया कार ‘नैनो’ पेश कर दी है. नैनो को दुनिया की सबसे सस्ती कार माना जा रहा है. इस कार के लॉन्च का आलम यह था कि हज़ारों की तादाद में लोग उस इंडोर हाल में मौजूद थे जहाँ इसे पहली बार दुनिया के सामने लाया जाना था. और फिर नज़र आए टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा इस कार के साथ. भारत में किसी अवसर पर मीडिया और अतिथियों की इतनी भीड़, कार्यक्रम में पहुँचने के लिए इतनी मारामारी कम ही देखने को मिलती है. उन्होंने बताया कि इस कार में सुरक्षा और पर्यावरण की सभी मानकों का ध्यान रखा गया है. रतन टाटा ने इसे 'पीपुल्स कार' बताते हुए इसे आम लोगों की पहुँच में बताया. उन्होंने बताया कि इस कार की डीलर क़ीमत एक लाख रुपए होगी. वादा निभाया उन्होंने कहा, ''एक वादा था जो हमने लोगों से किया था. वादा तो आख़िर वादा होता है इसलिए इसकी क़ीमत तय वादे के तहत रखी गई है.''
नैनो की ख़ासियत गिनाते हुए उन्होंने बताया कि इस कार में चार-पाँच लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. रतन टाटा ने कहा, "मैंने अक्सर देखा है कि बहुत से परिवार दो-पहिया वाहन पर किस तरह से मुश्किलों में सफ़र करते हैं. एक व्यक्ति स्कूटर चला रहा होता है, उसका एक बच्चा उसके आगे हैंडल के पास खड़ा होता है, उसकी पत्नी पिछली सीट पर बैठी होती है और उसकी गोद में एक छोटा बच्चा होता है." और इसी बात को इस कार के पीछे की कल्पना का वो कारण बताते हैं. रतन टाटा ने कहा, "बस यही देखकर मेरे मन में विचार आया कि क्या इस तरह का कोई वाहन हो सकता है जो ग़रीब परिवारों की आय दर के भीतर हो और जो इस तरह के परिवारों को तरह-तरह के मौसमों में सुरक्षित सफ़र मुहैया करा सके." कार का इंजन 624 सीसी का है, जो कार के पीछे के हिस्से में है और ये कार 20-22 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देगी. सैकड़ों अतिथियों के बीच भारत के वाणिज्यमंत्री कमलनाथ भी मौजूद थे. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "भारत के लिए यह गर्व के क्षण हैं. हम न केवल दुनिया की सबसे सस्ती कार बना पाने में सफल हुए बल्कि भारत ने अपनी तकनीक के क्षेत्र की क्षमता को भी दुनिया के आगे साबित कर दिया है." जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत की सड़कों पर इससे भीड़ और ज़्यादा नहीं बढ़ेगी, उन्होंने कहा, "यह कार भारतीय लोगों के मन की अभिलाषा है. अभिलाषाओं को रोका नहीं जा सकता. इस कार ने उस परिवार को सुरक्षित यातायात साधन दिया है जो दो पहिया वाहन पर असुरक्षित चलता है." प्रदूषण मानकों का ध्यान प्रदूषण और पर्यावरण मानकों के सवाल पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि नैनो कार यूरो-4 मानक की होगी, इसलिए पर्यावरणविद आरके पचौरी और सुनीता नारायण को चिंता नहीं करनी पड़ेगी.
रतन टाटा ने बताया कि मूल रूप से कार की कीमत एक लाख होगी पर इसके और भी बेहतर मॉडल उतारे जाएंगे जिनमें एसी जैसी सुविधा होगी. हालांकि ये मॉडल मूल मॉडल से कुछ महंगे होंगे. ये फिलहाल लाल, पीले और सिल्वर रंगों में इस साल ही उपलब्ध हो जाएगी. जानकारों का मानना है कि इस कार के आने से कार बाज़ार में खलबली मच जाएगी. वाणिज्य मंत्री कमलनाथ भी ऐसा मानते हैं. उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में और कंपनियां इस दिशा में आगे बढ़ेगी और इसका जवाब निकालना चाहेंगी पर यह करना आसान नहीं होगा और दूसरे समूहों को ऐसा कर पाने में वक्त लगेगा. हालांकि इस कार को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं. टाटा मोटर्स ने अपनी कार से जुड़ी हर बात के लिए बेहद गोपनीयता बरती थी. ये कार कैसी होगी, इसकी क़ीमत एक लाख कैसे रखी जाएगी, इस संबंध में टाटा ने क्या किया है, ये सब तथ्य पूरी तरह से गोपनीय रखे गए थे. कंपनी के चेयरमैन रतन टाटा ने उम्मीद जताई कि इस कार के आने के बाद लोगों को ज़िंदगी सुविधाजनक और सुरक्षित हो जाएगी. सवाल भी साथ... टाटा की यह कार लोगों के सामने तो आ गई पर चलने के लिए अभी भी लोगों को कुछ महीनों इंतज़ार करना पड़ेगा.
रतन टाटा ने बताया कि इस गाड़ी को सड़कों पर देखने में अभी वक्त लगेगा और आगामी वित्तीय वर्ष के दूसरे हिस्से में लोग इसे ख़रीद सकेंगे. उन्होंने कहा कि इस कार को तैयार करने की परियोजना में जो सहयोग पश्चिम बंगाल की सरकार की ओर से मिल रहा है, वो सकारात्मक है. हालांकि टाटा प्रमुख ने सिंगूर मामले में उठे विवाद पर कोई बयान नहीं दिया. उधर, कार के लॉन्च के कुछ देर बाद ही कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इस समारोह स्थल पर पहुँचे और उन्होंने टाटा के विरोध में पर्चे बांटे. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना था कि पुलिस के संरक्षण में सिंगूर में कारखाना तैयार हो रहा है जो कि असंवैधानिक है. इस कार को लॉन्च ऐसे समय में किया गया है जब इससे संबंधित विवाद की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है इसलिए विरोध दर्ज करना लाजमी है. पश्चिम बंगाल के सिंगूर में इस कार के कारखाने को लेकर विवाद उठा था. विवाद भूमि अधिग्रहण के मामले का था जिसकी छाया इस कार के लॉन्च पर भी दिखी. पर मुट्ठी भर के विरोध और सैकड़ों कैमरों की चमक, तालियों और पत्रकार दीर्घा के सवालों के बीच गुरुवार को टाटा की यह प्रतीक्षित कार लोगों के बीच आ गई. आगे का रास्ता यह कार कैसे तय करती है, यह तो भारत की सड़कों पर इसकी कदमताल से ही तय होगा. रतन टाटा भी ऐसा मानते हैं. उन्होंने कहा कि आज की आलोचना और तारीफ़ से ज़्यादा महत्वपूर्ण है ग्राहक की प्रतिक्रिया. ग्राहक को पसंद आई तो कार अच्छी है. वरना... *************************************************************
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