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ब्याज़ दर में कमी से सुधरे शेयर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सेंट्रल बैंक फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज़ दरों में आधा फ़ीसदी कमी करने के फ़ैसले का दुनियाभर के शेयर बाज़ारों पर सकारात्मक असर देखा गया है. बैंक के इस कदम से लंदन और फ़्रैकफर्ट सहित यूरोपीय बाज़ार फिर पटरी पर लौटने लगे है. ब्याज़ दर में कटौती के इस फ़ैसले से अमरीकी बाज़ार में वित्त का प्रवाह बढ़ा है. इसकी वजह से लंदन के शेयर सूचकांक (एफटीएसई) में शुक्रवार को 205.3 अंकों की उछाल देखी गई. और यह 6064.2 अंकों तक पहुंच गया. अमरीकी वालस्ट्रीट में शेयरों में तेज उछाल देखी गई. न्यूयार्क में शुक्रवार को बाज़ार बंद होने के वक्त डाउ जोंस 1.82 फ़ीसदी की बढ़त के साथ 13079.1 अंक पर बंद हुआ. तकनीकी कंपनियों वाले नास्दाक में भी सकारात्मक असर देखा गया. उथल-पुथल भरे सप्ताह के अंत में बाज़ार 2.31 फ़ीसदी की बढ़त के साथ 1888.78 अंक पर बंद हुआ. कारण और उपाय दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में व्यापक गिरावट के दौर के बीच फ़ेडरल रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को उस ब्याज़ दर में आधा फ़ीसदी कमी करने का फ़ैसला किया था जिस दर पर वह बैंकों को क़र्ज़ देता है. इसे 'डिस्काउंट रेट' कहा जाता है. अब यह दर घटकर 5.75 फ़ीसदी हो गई है. फ़ेडरल रिजर्व का कहना है कि डिस्काउंट रेट में कटौती उस समय तक रहेगी जब तक स्थिति में सुधार नहीं हो जाता. न्यूयॉर्क के बाज़ार पर नज़र रखने वाले लीमैन ब्रदर्स के ड्रू मेटस ने इसे एक बड़ा और प्रभावी क़दम बताया. दरअसल दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में गिरावट के संकट का प्रमुख कारण अमरीकी का होम लोन सेक्टर रहा. कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने गिरावट रोकने के लिए पहल करते हुए वित्तीय बाज़ार में पूँजी लगाई है. भारतीय बाज़ार मुंबई में रेलिगेयर फ़ाइनेंस कंपनी के इक्विटी प्रेसिडेंट अमिताभ चक्रवर्ती ने कहा कि दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में बेहतरी की कुंजी अमरीकी बाज़ार में है. उन्होंने कहा 'जब तक अमरीकी बाज़ार में स्थायित्व नहीं आता, एशियाई बाज़ार संभल नहीं सकेंगे और जब तक ये बाज़ार नहीं संभलेंगे भारत में बेहतरी नज़र नहीं आएगी. हम मान कर चल रहे हैं कि अगस्त के महीने में भारी उतार चढ़ाव देखे जाएँगे, और हम इसके लिए तैयार हैं. ” भारतीय अर्थव्यस्था का बैरोमीटर कहा जाने वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में शुक्रवार को 49 अंक नीचे 14,319 के स्तर पर खुला था लेकिन गिरावट के साथ 14141 के आंकड़े पर बंद हुआ. उससे पहले दिन एशिया, लातिनी अमरीका और यूरोप के बाज़ारों में बड़ी गिरावट देखी गई थी. भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ़्टी में 70 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और सूचकांक 4108 के आंकड़े पर बंद हुआ. पिछले एक हफ़्ते में दुनिया भर के बाज़ारों से खरबों रुपए ग़ायब हो गए हैं जिसका असर टाटा, इंफ़ोसिस और सत्यम जैसी कई भारतीय कंपनियों पर साफ़ दिखा है. छोटे निवेशकों से लेकर टाटा बिड़ला और बिल गेट्स जैसे करोड़पतियों की नज़र अब सोमवार के बाज़ारों पर होगी. |
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