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शेयर बाज़ार की चमक फीकी पड़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
औद्योगिक उत्पादन की गति सुस्त पड़ने के कारण भारतीय शेयर बाज़ारों में तेज़ गिरावट जारी है. मंगलावर को सेंसेक्स में 400 अंकों की गिरावट आई. जानकारों का कहना है कि शेयर बाज़ार जिस गति से नई ऊँचाइयाँ छू रहा था उसे देखते हुए इस तरह की गिरावट की आशंका थी. ऊपर से अक्तूबर माह में औद्योगिक उत्पाद सूचकांक महज छह फ़ीसदी पर सीमित रहने से निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ गया. अमरीकी और एशियाई बाज़ारों में मज़बूती रहने और कच्चे तेल की कीमत नीचे आने के बावजूद लगातार तीसरे कारोबारी दिन बाज़ार मंदा रहा. पिछले हफ़्ते शुक्रवार को यह लगभग 173 अंक नीचे आया था और सोमवार को इसमें 400 अंकों की गिरावट आई. मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज(बीएसई) में जब कारोबार शुरू हुआ तो 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 14 अंकों की बढ़त के साथ 13 हज़ार 413 पर खुला लेकिन देखते ही देखते म़जबूती गायब हो गई. उतार चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के आख़िर में एक समय सेंसेक्स 600 अंकों तक नीचे चला गया लेकिन अंतिम आधे घंटे में कुछ काउंटरों पर ख़रीदारी होने से गिरावट कुछ थम गई. बाज़ार बंद होने पर सेंसेक्स 404 अंक नीचे जाकर 12 हज़ार 995 अंकों पर टिका. दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ़्टी 132 अंकों की गिरावट से लगभग 3716 अंकों पर बंद हुआ. कारण दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज के पूर्व अध्यक्ष अशोक अग्रवाल का कहना है कि शेयर बाज़ारों में आई गिरावट महज तकनीकी सुधार है और इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा, "रिज़र्व बैंक ने पहले नगद आरक्षण अनुपात यानी सीआरआर बढ़ा दिया और अब जो औद्योगिक उत्पादन के आँकड़े आए हैं, वे उम्मीदों से कम हैं. गिरावट इसी का परिणाम है." अग्रवाल का मानना है कि 12 हज़ार के स्तर पर सेंसेक्स को एक बड़ा तकनीकी सपोर्ट हासिल है. वो कहते हैं, "हो सकता है आने वाले दिनों में थोड़ा उतार चढ़ाव रहे लेकिन अफ़रातफ़री की स्थिति नहीं है. फिर भी ख़ुदरा निवेशकों को सावधान रहना चाहिए और शेयरों में सीधे निवेश करने के बज़ाए म्युचुअल फंडों के ज़रिए बाज़ार में घुसना चाहिए." आरआर इक्विटी के जयंत मांगलिक मानते हैं कि सीआरआर बढ़ने से बाज़ार में नगदी की कमी हुई है. वो कहते हैं, "पहले रिवर्स रेपो दर बढ़ाया गया और अब सीआरआर बढ़ाया गया है. मतलब सीधा है कि नगदी की कमी रहेगी और ब्याज़ दर में नरमी की गुंजाइश नहीं है. इसलिए सस्ते पैसे पाने की लालच में भारत की ओर रूख़ करने वाले विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं." जब रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है तो उस पर जिस दर से ब्याज लिया जाता है उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं. सीआरआर का मतलब उस जमा राशि से है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपने पास रखना पड़ता है. मतलब इसे खुले बाज़ार में कर्ज या किसी अन्य रूप में नहीं दिया जा सकता. दोनों के बढ़ने का मतलब है कि नगदी की कमी होगी. मांगलिक का कहना है कि सेंसेक्स जिस तेज़ी से 13 से 14 हज़ार के आँकड़े को छू गया था, उसे देखते हुए यह तय था कि बाज़ार अब नीचे जाने की वजह का इंतज़ार कर रहा है जो पिछले कुछ दिनों में उसे मिल गया. उधर दीपक मोहनी कहते हैं कि सीआरआर बढ़ने और औद्योगिक उत्पादन में सुस्ती से लंबी अवधि के निवेशक बाज़ार से निकल गए. उनका कहना है कि उतार चढ़ाव का यह दौर अगले एक दो हफ़्ते और चल सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें सेंसेक्स के लिए काला सोमवार11 दिसंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स में गिरावट, 400 अंकों तक लुढ़का11 दिसंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स पर विदेशी बाज़ारों का असर30 नवंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स ने पार किया 13 हज़ार का आँकड़ा30 अक्तूबर, 2006 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ार ऐतिहासिक ऊँचाई पर13 अक्तूबर, 2006 | कारोबार न्यूयॉर्क शेयर बाज़ार रिकॉर्ड ऊँचाई पर04 अक्तूबर, 2006 | कारोबार तेल की क़ीमतें चढ़ीं, शेयर बाज़ार लुढ़का14 जुलाई, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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