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सेंसेक्स के लिए काला सोमवार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोमवार और सेंसेक्स का शायद छत्तीस का आँकड़ा है. याद है सत्रह मई 2004? उसी दिन एनडीए की हार के बाद कांग्रेस और उसके सहयोगी सरकार बनाने के क़रीब क्या पहुंचे, सेंसेक्स एक ही दिन में 565 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ था. उस समय डर था कि वामपंथियों की सहायता से चलने वाली सरकार में आर्थिक उदारीकरण का क्या होगा. इसके बाद कई बार ऐसा हुआ कि सोमवार के दिन ही बाज़ार में गिरावट आई और यह सोमवार भी शेयर कारोबारियों के लिए काला साबित हुआ. पिछले छे महीनों में बाज़ार में इतनी अस्थिरता नहीं देखी गई है. 13 जून 2006 के बाद ये एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है. वैसे आँकड़ों के शौकीनों को बता दें कि उस दिन सोमवार नहीं मंगलावार था. सोमवार को बाज़ार बंद होते वक्त बीएसई का संवेदी सूचकांक यानी सेंसेक्स करीब 400 अंको की गिरावट के साथ 13 हज़ार 399 अंकों पर बंद हुआ है. कम से कम इस बार ये गिरावट बेवजह नहीं आई. आज जो कुछ हुआ उसकी मोटे तौर से दो वजहें मान सकते हैं. सीआरआर भारतीय रिज़र्व बैंक ने शुक्रवार को नगद आरक्षण अनुपात यानी सीआरआर में आधे फ़ीसदी की बढ़ोतरी की थी. इसी वजह से सेंसेक्स के बिगड़े मिजाज़ की मार सबसे ज़्यादा झेली बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों ने. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के शेयरों में नौ फ़ीसदी की गिरावट आई. आईसीआईसीआई में भी साढ़े छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. कुल जमा राशि का जो प्रतिशत बैंकों को रिजर्व बैंक के पास रखना होता है उसे कैश रिज़र्व रेशियो यानी सीआरआर कहते हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी बैंक में कुल जमा राशि सौ रुपए है और सीआरआर पाँच प्रतिशत है तो वह बैंक केवल 95 रुपये ही उधार पर चढ़ा सकता है. ऐसे में ज़ाहिर है कि ज़्यादा सीआरआर का अर्थ होगा बैंकों के पास उधार देने के लिए कम राशि. आरबीआई के इस क़दम के बाद बाज़ार में नगदी में कमी आई. बेहाल बाज़ार केजरीवाल रिसर्च एंड इनफॉर्मेशन सर्विसेज के अरुण केजरीवाल कहते हैं,”सीआरआर की बढ़ोतरी से बाज़ार में नगदी घट गई है. इससे बाज़ार में कुछ ढील आई है, कुछ लंबे समय वाली पोजिशंस कम हुई हैं और कुछ बिकवाली घबराहट के चलते भी हुई है. लगता है ये कुछ और दिन तक चल सकता है.” दूसरी अहम घटना जिसका बाज़ार पर प्रभाव पड़ा वो है बीते शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों का वायदा बाज़ार में भारी बिकवाली. बीएसई सूचकांक आधारित फ़्यूचर्स ट्रेडिंग में आठ दिसबंर को 1087 करोड़ रुपये की कुल बिक्री की गई. इससे बाज़ार में नकारात्मक भूमिका अदा की. अरुण केजरीवाल का कहना था, “ऐसा लग रहा है कि ये तकनीकी सुधार जो बाज़ार में शुरु हुआ है जिसमें अब तक कुछ दिनों में 600 अंकों की गिरावट देखी गई है, वो एक-दो दिन और चले.” उधर टाटा स्टील पर सीएसन के कोरस को ख़रीदने के लिए पेश किए गए नए ऑफ़र की गाज गिरी और स्टॉक लगभग साढ़े छह फ़ीसदी की गिरावट के साथ 460 रुपए पर बंद हुआ. | इससे जुड़ी ख़बरें सेंसेक्स में गिरावट, 400 अंकों तक लुढ़का11 दिसंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स पर विदेशी बाज़ारों का असर30 नवंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स ने पार किया 13 हज़ार का आँकड़ा30 अक्तूबर, 2006 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट11 सितंबर, 2006 | कारोबार तेल की क़ीमतें चढ़ीं, शेयर बाज़ार लुढ़का14 जुलाई, 2006 | कारोबार धमाकों के बावजूद शेयर बाज़ार में उछाल12 जुलाई, 2006 | कारोबार शेयर बाज़ार में भारी उछाल15 जून, 2006 | कारोबार शेयर बाज़ार ऊपर उछला09 जून, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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