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सेंसेक्स में गिरावट, 400 अंकों तक लुढ़का | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महीनों की बढ़त के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के संवेदी सूचकांक यानी सेंसेक्स में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली और यह 400 से अधिक अंकों तक लुढ़क गया. यह लगभग 400 अंकों की गिरावट के साथ 13399 के स्तर पर बंद हुआ. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा भारी बिकवाली के कारण हुआ है. टाटा स्टील और बैंकों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स शुक्रवार को 172 अंक लुढ़का था लेकिन सोमवार को बाज़ार खुलते ही इसमें 155 अंकों की गिरावट देखने को मिली. साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ़्टी में भी भारी गिरावट देखने को मिली. बिकवाली का दबाव सोमवार को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंफ़ोसिस, बजाज ऑटो, मारुति उद्योग, टाटा मोटर्स, रेड्डी लेबोरेटरीज़, एसीसी और ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ के शेयरों में भारी गिरावट नज़र आई. टाटा स्टील के शेयर भी गिरे. जानकारों का कहना है कि टाटा के एंग्लो-डच स्टील कंपनी कोरस के अधिग्रहण के लिए बोली बढ़ाने के कारण ऐसा हुआ है. टाटा ने इस सौदे के लिए क़रीब 11 अरब डॉलर देना स्वीकार कर लिया है. यह रकम टाटा की पहली बोली से 10 फ़ीसदी ज़्यादा है. ग़ौरतलब है कि हाल में सेंसेक्स ने 14 हज़ार का आंकड़ा पार कर लिया था. विश्लेषकों का मानना है कि सेंसेक्स के इस स्तर पर बने रहना मुश्किल है. भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों का विश्वास बने रहने के कारण सेंसेक्स में इस साल लगभग 36 प्रतिशत का उछाल आया है, जबकि पिछले साल इसमें 42 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें कोरस ने सीएसएन की बोली मंज़ूर की11 दिसंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स ने 14000 का आँकड़ा छुआ05 दिसंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स ने पार किया 13 हज़ार का आँकड़ा30 अक्तूबर, 2006 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ार ऐतिहासिक ऊँचाई पर13 अक्तूबर, 2006 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट11 सितंबर, 2006 | कारोबार शेयर बाज़ार: विदेशी हाथ की करामात 20 दिसंबर, 2005 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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