BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 20 दिसंबर, 2005 को 08:36 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
शेयर बाज़ार: विदेशी हाथ की करामात

शेयर बाज़ार
भारतीय शेयर बाज़ार में पहले ऐसी तेज़ी नहीं देखी गई है
आश्चर्यजनक किंतु सत्य है कि मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक 19 दिसंबर, 2005 को 9294.27 पर बंद हुआ.

अब यह बहुत पुराने अतीत की बात लगती है कि मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक करीब डेढ़ साल पहले यानी 14 मई, 2004 को 5070 के आसपास टहल रहा था.

किसी भी सूचकांक का लगभग दोहरा हो जाना गहन विश्लेषण की मांग करता है.

उम्मीद जताई जा रही है कि अगली मार्च में बजट पेश किए जाने के समय तक सेंसेक्स 11,000 के अंक से वित्त मंत्री को सलामी देगा.

ये उम्मीद कुछ दूसरी उम्मीदों पर आधारित हैं जैसे यह माना जा रहा है कि सन् 2005-06 में भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास 8 से 10 प्रतिशत की दर से हो सकता है.

पर सेंसक्स की चमक में हाल में जो चिंताजनक बात सामने आई है, वह यह है कि इसके पीछे चलने वाले विदेशी हाथ को लेकर रिजर्व बैंक चिंतित है.

ग़ौरतलब है कि भारतीय शेयर बाजार विदेशी संस्थागत निवेशकों का प्रिय बाज़ार बन गया है.

यहाँ की कंपनियों में उन्हे जो प्रतिफल दिखाई पड़ रहे हैं,वैसे प्रतिफल उन्हे विश्व के अन्य शेयर बाजारों में दिखाई नहीं पड़ रहे हैं.

हाल में आए आंकड़ों के मुताबिक भारतीय शेयर बाजारों ने इस साल अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक करीब नौ अरब डालर का निवेश कर चुके हैं.

इस निवेश के असर में भारतीय शेयर बाज़ारों की स्थिति यह हो गई है कि ये घरेलू राजनीतिक औऱ अन्य स्थानीय तत्वों का असर जैसे मानते ही नहीं हैं.

मुंबई, तमिलनाडु में बाढ़ सुनामी कहर ढायें लेकिन बाज़ार बदस्तूर उठता जाता है.

सांसदों को रिश्वत कांड से राजनीतिक उथल-पुथल हो, बाज़ार पर कोई फर्क नहीं पड़ता.

हां अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद से शेयर बाज़ार पर असर पड़ता है, उनमें थोड़ी गिरावट देखी जा सकती है.

इस तरह से देखें, तो भारतीय शेयर बाज़ार बहुत तेजी से इंटरनेशनलाइज हो रहे हैं. पर इसमें चिंता की बात यह है कि रिजर्व बैंक ने भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी निवेश के एक प्रकार पर अपनी असहमति व्यक्त की है.

चिंता

रिजर्व बैंक भारतीय शेयर बाज़ारों में पार्टीसिपेटरी नोट यानी सहभागिता पत्र के आधार पर निवेश के ख़िलाफ़ है.

शेयर बाज़ार
भारतीय बाज़ारों में विदेशी निवेश में भारी वृद्धि हुई है

सहभागिता पत्र के जरिए विदेश के वो निवेशक भी भारतीय शेयर बाज़ारों में निवेश कर सकते हैं, जो सेबी द्वारा पंजीकृत नहीं हैं.

यानी इस मामले में निवेशकों की पहचान कर पाना मुश्किल है.

शेयर बाज़ार में निवेश के लिए आने वाले पैसे में सवाल सिर्फ़ उसके परिमाण का ही नहीं है, गुणवत्ता का भी है.

पंजीकृत निवेशकों के निवेश व्यवहार का अध्ययन किया जा सकता है,उसके आर्थिक, वित्तीय तर्क तलाशे जा सकते हैं.

पर जिन निवेशकों को पहचाना ही नहीं जा सकता, उनकी रकम कब आएगी, कब जाएगी, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता.

अन्य शब्दों में इस तरह के पैसे पर निर्भर शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव बहुत तेजी से आ सकते हैं.

अगस्त, 2005 में जब सेंसेक्स 31 अगस्त को 7805 पर था, तब सहभागिता पत्र के आधार पर हुआ निवेश कुल विदेशी संस्थागत निवेश का 46.73 प्रतिशत था.

अप्रैल, 2005 में यह आंकड़ा 30.6 प्रतिशत था. रिजर्व बैंक इस तरह के निवेश पर पूरा प्रतिबंध चाहता है. पर वित्त मंत्रालय ऐसा नहीं चाहता, ऐसा करने से सेंसेक्स की चमक फीकी पड़ती है.

पर सेंसेक्स की लगातार बढ़ती चमक में फिलहाल यह शुभकामना ही की जा सकती है कि कभी विदेशी निवेश का बुलबुला एक झटके में न फूट जाए.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>