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अमरीका में बाज़ार संभालने की कोशिश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में हो रही गिरावट के बीच अमरीकी सेंट्रल बैंक फ़ेडरल रिजर्व के क़दम से राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है. यूरोपीय बाज़ारों पर तो इसका असर दिखने भी लगा है. फ़ेडरल रिजर्व ने उस ब्याज़ दर में आधा फ़ीसदी कमी करने का फ़ैसला किया है, जिस दर पर वह बैंकों को क़र्ज़ देता है. इसे 'डिस्काउंट रेट' कहा जाता है. अब यह दर घटकर 5.75 फ़ीसदी हो गई है. लेकिन एशियाई बाज़ारों की स्थिति अभी भी नाज़ुक बनी हुई है. जापान और भारत के शेयर बाज़ार में गिरावट का दौर जारी है. कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने गिरावट रोकने के लिए पहल करते हुए वित्तीय बाज़ार में पूँजी लगाई है. जापान में शेयर बाज़ार पाँच फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ. हालाँकि बैंक ऑफ़ जापान ने वित्तीय बाज़ार में जारी हड़कंप को रोकने के लिए अरबों येन बाज़ार में लगाया. जापान के अलावा हांगकांग और दक्षिण कोरिया में भी यही स्थिति रही. भारत में भी बांबे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में गिरावट का दौर जारी रहा. फ़ैसले का असर शुरू में यूरोपीय बाज़ार में भी काफ़ी उथल-पुथल रही लेकिन अमरीकी फ़ेडरल रिजर्व की घोषणा के बाद लंदन और पेरिस के शेयर बाज़ार में स्थिति संभल गई है. बीबीसी के आर्थिक संवाददाता का कहना है कि डिस्काउंट रेट उन वित्तीय संस्थाओं के लिए काफ़ी उपयोगी होते हैं जिन्हें कम अवधि के लिए ऋण लेने में परेशानी होती है. ख़ासकर इस समय जैसी स्थिति है. फ़ेडरल रिजर्व का कहना है कि डिस्काउंट रेट में कटौती उस समय तक रहेगी जब तक स्थिति में सुधार नहीं हो जाता. फ़ेडरल रिजर्व के फ़ैसले का असर एशियाई बाज़ारों में किस तरह होगी, इसका अंदाज़ा तो बाद में ही मिल पाएगा. पहल एशिया के वित्तीय बाज़ारों में पिछले एक हफ़्ते के दौरान आई गिरावट पर क़ाबू पाने के लिए कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने पहल की है. बैंक ऑफ़ जापान ने क्रेडिट की कमी होने की आशंका से लगातार दूसरे दिन अपनी बैंकिंग व्यवस्था में अरबों रुपए लगा दिए. ऑस्ट्रेलिया के सेंट्रल बैंक ने भी गिरते बाज़ार को संभालने के लिए अपना हस्तक्षेप शुरू कर दिया है. जापान का निकेई सूचकांक पाँच फ़ीसदी तक नीचे जा चुका है और हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाज़ारों में भी रिकॉर्ड गिरावट दर्ज़ की गई है. जापान के निकेई में सितंबर, 2001 के बाद अब तक की सबसे अधिक 593.50 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है. ऐसा माना जा रहा है कि इस साल में पहली बार निकेई सूचकांक 16000 के आंकड़े के नीचे जा सकता है. सक्षम फ़्राँस के राष्ट्रपति निकोला सर्कोज़ी ने दुनिया के अमीर देशों के संगठन जी-सात के नेताओं को लिखे एक पत्र में कहा है कि वो ऐसा नहीं समझते कि विभिन्न देशों की सरकारें वित्तीय बाज़ार में आई गिरावट को संभालने में सक्षम नहीं हैं.
एशिया के शीर्ष बाज़ारों में आई गिरावट का असर भारत पर भी पड़ा है और यहाँ के वित्तीय बाज़ार में भी गिरावट का दौर जारी है. भारतीय अर्थव्यस्था का बैरोमीटर कहा जाने वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में शुक्रवार को 216 अंकों की गिरावट देखी गई और सूचकांक 14141 के आंकड़े पर बंद हुआ भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ़्टी में 70 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और सूचकांक 4108 के आंकड़े पर बंद हुआ. गुरूवार को बीएसई में अब तक की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट दर्ज़ की गई थी जब सूचकांक 642 अंक नीचे चला गया था. |
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