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झुकने के मूड में नहीं है सेंसेक्स | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय अर्थव्यवस्था की नब्ज़ माना जाने वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स हिचकोले भले खा रहा हो, पर यह झुकने के मूड में तो कतई नहीं है. कभी चीन के शेयर बाज़ार का उतार-चढ़ाव इस पर हावी हो जाता है, तो कभी अमरीकी फेडरल रिज़र्व का बयान इसके सर चढ़कर बोलने लगता है. भारत में महंगाई की दर में लगातार कमी होने और ब्याज दर में स्थिरता का माहौल कायम होने से वैश्विक बाज़ार की शक्तियाँ शेयर बाज़ार पर हावी हैं. एफआईआई दरअसल, बाज़ार का रुख़ घरेलू निवेशक नहीं, बल्कि विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई तय कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि जनवरी-मई 2007 में भारतीय म्यूचुअल फंड संस्थानों ने जहाँ 700 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की, वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों ने तकरीबन 17,267 करोड़ रुपए की खरीदारी की. एफआईआई द्वारा की गई खरीदारी पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 73 फ़ीसदी अधिक है. भारत ने बीते वर्ष के दौरान 9.4 फ़ीसदी की विकास दर हासिल की है और महंगाई की दर पाँच फ़ीसदी से थोड़ा ही अधिक है. मॉनसून हावी अगले दो-तीन महीनों के दौरान 1000 अरब रुपए के आकार वाले भारतीय शेयर बाज़ार की डोर मॉनसून के हाथों में रहेगी. मौसम विभाग के अनुसार मॉनसून के सामान्य से 95 फ़ीसदी के आसपास रहने की उम्मीद है. क्या मॉनसून की बौछार ने शेयर बाज़ार को भी हरा-भरा कर सकती है. यही एक फैक्टर है जो अनिश्चित है. ब्याज दर में स्थिरता और कुछ हद तक गिरावट का रुख़, महंगाई में लगातार कमी और विदेशी निवेश के प्रति सरकार का अनुकूल रवैया शेयर बाज़ार को गति देने के लिए काफ़ी है. चीन का असर चीन की सरकार चीनी शेयर बाज़ार में यदा-कदा हस्तक्षेप करती रहती है.
पिछले सप्ताह उसने शेयरों की ख़रीद बिक्री पर लगने वाला टैक्स बढ़ाकर तीन गुना कर दिया और वहाँ के बाज़ार धराशाई हो गए. जिन शेयरों के साथ यह हादसा हुआ, उनमें एफआईआई का निवेश प्रतिबंध के स्तर तक विनियमित है. चीन के प्रभाव की बात करें तो एशियाई बाज़ारों पर इसका नाममात्र का असर होगा या फिर सकारात्मक असर होगा. यदि चीन के बाज़ार से एफआईआई पलायन करते हैं तो वे कहाँ जाएंगे? निश्चित रूप से एशिया के ही किसी और बाज़ार में और इससे एशियाई शेयर बाज़ारों में उछाल आना स्वाभाविक है. अमरीकी ब्याज दर बनाम सेंसेक्स जब कभी अमरीकी फेडरल रिज़र्व ब्याज दरें बढ़ाता है तो बांड बाज़ार में उछाल आ जाता है, जबकि शेयर बाज़ार धराशाई हो जाते हैं. पाँच जून को फेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष बेन बर्नेक ने कहा, "‘महंगाई पर नियंत्रण अमरीकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है." इसके बाद ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की अटकलों का दौर शुरू हो गया और अमरीकी शेयर बाज़ार नासडैक़ लड़खड़ा गया. नतीजतन एशियाई शेयर बाजारों में भी हलचल पैदा हो गई. विलय-अधिग्रहण ने थामी बागडोर वैश्विक बाज़ार को गति देने वाला सबसे बड़ा कारक है विलय और अधिग्रहण.
भारतीय कंपनियां विदेशों में बड़ी-बड़ी कंपनियों को खरीदती फिर रही हैं तो विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल करने में जुटी हैं. यह कारक इस हद तक प्रभावी है कि कोक ने विटामिन वाटर को खरीदकर अमरीकी शेयर बाज़ार को नई दिशा दे दी थी. भारतीय कंपनियों की विलय-अधिग्रहण संबंधी गतिविधियों पर नज़र रखिए, सेंसेक्स का रुख़ मालूम हो जाएगा. आईपीओ की दहशत इस माह दो बड़े आईपीओ भारतीय शेयर बाज़ार पर दस्तक देने वाले हैं डीएलएफ और आईसीआईसीआई. आमतौर पर मजबूत आईपीओ से पूर्व बाज़ार में बिकवाली देखी जाती है. छोटे निवेशक अपने शेयर बेचकर पूँजी इकट्ठा करते हैं और आईपीओ में निवेश करते हैं. पर बाज़ार में पर्याप्त मात्रा में नकदी उपलब्ध होने और एफआईआई के हावी होने की वजह से बिकवाली की उम्मीद न के बराबर है. बाज़ार की मजबूती का पता इस बात से चल जाता है कि वायदा कारोबार के कांट्रेक्ट में मई 2007 में बहुत अधिक रॉलओवर हुआ है. जून 2007 के लिए तकरीबन 50,000 करोड़ रुपए के कारोबार का अनुमान है. लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले निवेशक खुलकर निवेश कर सकते हैं. अल्पावधि में जोखिम अधिक है इसलिए निवेशकों को विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही निवेश करना चाहिए. यदि सेंसेक्स 13,900 और निफ्टी 4095 के नीचे आता है तो यह मानना चाहिए कि बाज़ार में गिरावट का दौर शुरू हो गया है. (लेखक दैनिक भास्कर में कार्यकारी संपादक है) | इससे जुड़ी ख़बरें बढ़ती ब्याज दर और भारतीय अर्थव्यवस्था03 अप्रैल, 2007 | कारोबार तेज़ गिरावट से निवेशकों में चिंता02 अप्रैल, 2007 | कारोबार भारत में रिकॉर्ड विकास दर की उम्मीद07 फ़रवरी, 2007 | कारोबार बुलंदी पर बंद हुए एशियाई शेयर बाज़ार 29 दिसंबर, 2006 | कारोबार शेयर बाज़ार की चमक फीकी पड़ी12 दिसंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स के लिए काला सोमवार11 दिसंबर, 2006 | कारोबार सेंसेक्स ने 14000 का आँकड़ा छुआ05 दिसंबर, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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