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शुक्रवार, 29 दिसंबर, 2006 को 14:06 GMT तक के समाचार
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बुलंदी पर बंद हुए एशियाई शेयर बाज़ार
शेयर बाज़ार
जापान के शेयर बाज़ार में पिछले चार वर्षों से तेज़ी बरकरार है
अर्थव्यवस्था में तेज़ी का असर वर्ष 2006 में एशियाई शेयर बाज़ारों में भी देखने को मिला है.

जापान के शेयर बाज़ार में लगातार चौथे साल तेज़ी का रुख रहा. जबकि अंतिम कारोबारी दिन आस्ट्रलियाई शेयर बाज़ार नई ऊँचाई पर बंद हुए.

जापानी शेयर बाज़ार क सूचकांक निकेई-225 इस वर्ष के अंतिम कारोबारी दिन 17,225.83 पर बंद हुआ, जो पिछले वर्ष के अंतिम कारोबारी दिन के मुक़ाबले सात प्रतिशत अधिक है.

जापान की अर्थव्यवस्था में सुधार का असर कंपनियों के शेयरों पर भी दिखा है. हालाँकि नए आँकड़ों के अनुसार जापान में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर पिछले 18 महीनों में सबसे कम रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2007 निकेई-225 सूचकांक 20 हज़ार के स्तर को पार कर सकता है.

जापान की अर्थव्यवस्था में सुधार और भारत और चीन की अर्थव्यवस्था में तेज़ी बरकरार रहने से इस वर्ष एशिया के ज़्यादातर शेयर बाज़ारों में तेजी का रुख रहा.

अगले वर्ष से उम्मीदें

आस्ट्रेलियाई शेयर बाज़ार का सूचकांक एसएंडपी/ एएसएक्स 200 शुक्रवार अंतिम कारोबारी दिन रिकार्ड ऊंचाई 5684.4 पर पहुँचने के बाद 5669.9 के स्तर पर बंद हुआ.

इस तरह वर्ष 2006 में एसएंडपी/ एएसएक्स 200 के स्तर में 19 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.

भारतीय शेयर बाज़ारों के लिए अंतिम कारोबारी दिन तो उतना शुभ नहीं रहा लेकिन साल भर यह ऐतिहासिक उपलब्धियों और ज़बरदस्त उतार-चढ़ाव का गवाह बना.

इस साल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई का सेंसेक्स 14 हज़ार के आँकड़े को पार कर गया. शुक्रवार को यह 59.43 अंकों की गिरावट के साथ 13786.91 के स्तर पर बंद हुआ. जबकि वर्ष 2005 के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स 9398 अंकों पर बंद हुआ था.

अगर 2005 से तुलना की जाए तो इस साल सेंसेक्स में इजाफ़ा कम रहा. वर्ष 2005 में संवेदी सूचकांक 73 फ़ीसदी बढ़ा था लेकिन इस साल ये वृद्धि दर लगभग 42 फ़ीसदी रही.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ़्टी का सफ़र इस साल 2836 अंक से शुरू हुआ जो आठ दिसंबर को चार हज़ार से उपर चला गया था और अंतिम कारोबारी दिन 3966.40 अंकों पर बंद हुआ.

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि वर्ष 2007 में भी एशियाई शेयर बाज़ार में तेज़ी बनी रहेगी. इसके लिए वे मज़बूत औद्योगिक वृद्धि दर और कंपनियों के मुनाफ़े में वृद्धि की उम्मीद के तर्क दे रहे हैं.

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