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मोबाइल फोन का बढ़ता बाज़ार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया का हर हिस्सा इन दिनों मोबाइल फोन की घंटियों से घनघना रहा है और अगले साल तक मोबाइल फोन रखने वालों की तादाद एक अरब पार कर जाने की संभावना है. भारत और चीन में यह तेज़ी काफ़ी अधिक है,भारत में तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डेढ़ करोड़ की आबादी के बीच तक़रीबन एक करोड़ मोबाइल फ़ोन हैं. हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि इस उद्योग में अब पहले सरीखी तेजी नहीं रहेगी और टेलीकॉम कंपनियों का जोर ग्राहकों को अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर खुद से जोड़े रखने पर रहेगा. ज़्यादातर देशों में अब कंपनियाँ तीसरी पीढ़ी का मोबाइल फ़ोन यानी थ्री-जी फ़ोन बाज़ार में उतार रही हैं जिनके ज़रिए लोग वीडियो कॉल कर सकेंगे,एक-दूसरे को तस्वीरें,गाने वगैरह भेज सकेंगे. शोध संस्था इनफॉर्मा टेलीकॉम्स एंड मीडिया के अनुसार टेलीकॉम कंपनियां उच्च तकनीक कैमरा,ज्यादा मैमोरी,बेहतर डिज़ाइन जैसी सुविधाओं से सुसज़्जित मोबाइल फोन को प्रतिस्पर्धा में उतारने की तैयारी में हैं,लेकिन थ्री-जी मोबाइलों की इस तकनीक के लिए अभी कुछ समय इंतजार करना होगा. थ्री-जी तकनीक के मोबाइल में ग्राहक को फोन पर ही टेलीविज़न चैनल भी देख सकेंगे. भविष्य शोध संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2008 में बेचे जाने वाले कुल मोबाइल फोन में से एक चौथाई फ़ोन थ्री-जी होंगे और ज़्यादातर मोबाइल नेटवर्क नई सेवाएँ उपलब्ध कराने लगेंगे.
दुनिया भर में नए-नए फीर्चस वाले हैंडसेट्स की बिक्री अब भी जोरों पर है लेकिन कंपनियों के बीच गलाकाट प्रतिस्पर्धा के चलते उनका मुनाफ़ा दिन पर दिन घट रहा है. अगर बाज़ार की स्थिति यही रही तो हैंडसेट्स निर्माता नए-नए डिज़ाइन के फोन लॉन्च करके ग्राहक को लुभाने में लगे रहेंगे. सुपरमॉडल्स की तर्ज पर हैंडसेट्स भी लगातार दुबले होते जा रहे हैं और ग्राहक हैं कि उनकी इच्छा क्रेडिट कार्ड जैसे पतले हैंडसेट्स के लिए बढ़ती जा रही है. इसके अलावा कैमरे वाले हैंडसेट्स भी उपभोक्ताओं के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं और रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ही समय में आधे से अधिक उपभोक्ताओं के हाथों में कैमरे वाले मोबाइल होंगे. रिपोर्ट के अनुसार मल्टीमीडिया मैसेजिंग सर्विसेज़ यानी एमएमएस खास लोकप्रिय नहीं हो सका है. रिपोर्ट के लेखक डेव मैकक्वीन कहते हैं,“एमएमएस बाज़ार में अपनी जगह नहीं बना सका.लोग कैमरे का इस्तेमाल कर खुश हो सकते हैं लेकिन उन्हें नहीं पता कि पिक्चर मैसेज़ कैसे भेजे जाते हैं. कुछ मामलों में तो एक तस्वीर भेजने के लिए 12 बटन तक दबाने पड़ते हैं लिहाजा सॉफ्टवेयर विकसित करने वालों के लिए यह बड़ी चुनौती है.” | इससे जुड़ी ख़बरें नोकिया और सीमेंस में बड़ा समझौता19 जून, 2006 | कारोबार 'एसमएस से अफ़वाह फैलाने पर कार्रवाई'23 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस लेबनान में संघर्ष से मोटोरोला को नुक़सान05 अगस्त, 2006 | कारोबार विदेशी इलेक्ट्रॉनिक कचरा बना मुसीबत19 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस एयरटेल-एरिक्सन के बीच अहम क़रार27 अगस्त, 2006 | कारोबार 'हेलो, हम आसमान से बोल रहे हैं'01 सितंबर, 2006 | कारोबार 'लगता है कि मोबाइल सुरक्षित हैं'15 जनवरी, 2004 | विज्ञान 'पिता बनने की क्षमता घटाए मोबाइल'28 जून, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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