|
'पिता बनने की क्षमता घटाए मोबाइल' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मोबाइल टेलीफ़ोन पुरुषों में पिता बनने की क्षमता घटा सकता है. हंगरी के एक विश्विद्यालय में हुई एक नई खोज के मुताबिक इससे निकलने वाली रेडियोधर्मी किरणें पुरुषों के शुक्राणुओं में एक तिहाई तक की कमी ला सकती हैं. इस शोध के तहत दो सौ पुरुषों का अध्ययन किया गया. इसमें यह भी पाया गया कि जो शुक्राणु पूरी तरह प्रभावित नहीं होते वे भी कमज़ोर ज़रूर पड़ जाते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बात में दोराय नहीं है कि मोबाइल टेलीफ़ोन पुरुषों के शुक्राणुओं और वीर्य पर ख़राब असर डालते हैं. हालाँकि इस नई धारणा को लेकर वैज्ञानिकों में मतभेद हैं. प्रोफ़ेसर हैंस ईवर्स कहते हैं, "इस अध्ययन में पुरुषों के सामाजिक स्तर और आयु का अध्ययन नहीं किया गया है". "यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह पुरुष मोबाइल टेलीफ़ोन अपनी पतलून की जेब में रखते हैं या ब्रीफ़केस में". उनका यह भी कहना है कि आमतौर पर मोबाइल फ़ोन रखने वाले पुरुष एक विशिष्ट जीवनशैली का पालन करते हैं जिसमें भागदौड़ और थकान शामिल है. इस तरह की ज़िंदगी से भी शुक्राणुओं की संख्या में कमी आना कोई अनहोनी बात नहीं है. वैज्ञानिकों का मानना है कि एक ऐसा अध्ययन होना चाहिए जो मोबाइल फ़ोन के शुक्राणु पर प्रभाव पर ही केंद्रित हो. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||