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मोबाइल फ़ोन ने 'सूचना की दूरियाँ' कम कीं
एक रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल फ़ोनों ने दुनिया के अमीर और ग़रीब देशों के बीच दूरियाँ कम की हैं. वॉशिंगटन स्थित वर्ल्ड वाच इंस्टीट्यूट का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में विकासशील देशों में फ़ोन इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 25 प्रतिशत बढ़ी है. 1992 तक दुनिया के 237 लोगों में से एक ने मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल किया था. लेकिन 2002 तक हर पाँच में से एक व्यक्ति ने मोबाइल फ़ोन का उपयोग किया था. माना जा रहा है कि मोबाइल फ़ोन की कम होती दरों से इसके उपयोग को बढ़ावा मिला है. मोबाइल नेटवर्क का भी विस्तार बढ़ता जा रहा है क्योंकि इन्हें पारंपरिक टेलीफ़ोन की तरह तारों का जाल नहीं बिछाना पड़ता है. इस रिपोर्ट में एक दिलचस्प तथ्य ये भी उभरकर सामने आया है कि सन् 2002 में मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या पारंपरिक टेलीफ़ोन से ज्यादा हो गई है. मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 1.15 अरब पहुँच गई है जबकि पारंपरिक फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या 1.05 अरब है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़्रीकी देशों में मोबाइल फ़ोन की संख्या में नाटकीय वृद्धि हुई है. युगांडा पहला अफ़्रीकी देश था जिसमें 1999 में पारंपरिक फ़ोन से अधिक मोबाइल फ़ोन हो गए थे. मोबाइल तकनीक के विकास से इंटरनेट के इस्तेमाल में भी वृद्धि हुई है. सन् 1992 तक दुनिया के 778 में से एक शख्स ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया था. लेकिन 2002 तक 10 में से एक व्यक्ति ने इंटरनेट का इस्तेमाल कर लिया था. |
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