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शनिवार, 06 दिसंबर, 2003 को 18:19 GMT तक के समाचार
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चलता फिरता टेलीफ़ोन बूथ
मोबाइल रिक्शा फ़ोन बूथ
रोज़गार का नया साधन मोबाइल रिक्शा पीसीओ

राजस्थान की एक मोबाइल फ़ोन कंपनी ने अपने व्यापार को विस्तार देने के साथ साथ ग़रीबों के लिए रोज़गार का एक नया रास्ता खोलने का प्रयास किया है.

श्याम टेलिकॉम नामक इस कंपनी ने लोगों को फ़ोन तक आने का कष्ट देने की बजाए फ़ोन को ही लोगों तक पहुँचाने का काम किया है.

कंपनी ने रिक्शों पर ही मोबाइल फ़ोन लगवा दिया है जो कि पे-फ़ोन का काम करते हैं.

इस फ़ोन का प्रभाव क्षेत्र राजस्थान की राजधानी जयपुर और उसके आस पास का इलाक़ा है.

हमें महसूस हुआ कि इनमें से बहुत से लोग ग़रीबी रेखा के नीचे हैं. अपने जीवन यापन के लिए उन्हें अपने परिवार वालों पर आश्रित रहना पड़ता है. उनके साथ काफ़ी दुर्व्यवहार भी होता है.

सुनील वोहरा

इस तरह के रिक्शों को चलाने वाले अधिकतर रिक्शेवाले विकलाँग हैं.

श्याम टेलीलिंक के अध्यक्ष सुनील वोहरा कहते हैं," हमें महसूस हुआ कि इनमें से बहुत से लोग ग़रीबी रेखा के नीचे हैं. अपने जीवन यापन के लिए उन्हें अपने परिवार वालों पर आश्रित रहना पड़ता है.उनके साथ काफ़ी दुर्व्यवहार भी होता है."

इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए इसकी शुरुआत हुई है.

चलता फिरता पीसीओ

विकलांगों के लिए विशेष रुप से बने इस हाथ से चलाने वाले रिक्शे को चलता फिरता पीसीओ कहा जा रहा है.

इस रिक्शे में एक बैटरी, बिल बनाने वाली मशीन के साथ साथ एक प्रिंटर भी है.

अब इन मोबाइल पीसीओ को चलाने वाले कुछ लोगों ने अपने अपने परिवारों को इसके सहारे पालना भी शुरु कर दिया है.

इन चलने फिरने वाले पीसीओ के चालकों को इससे किए गए प्रति कॉल का 20% लाभ मिलता है.

इस तरह के रिक्शों को बनाने में यूँ तो 75,000 रुपए लगते हैं लेकिन कंपनी फ़िलहाल ये राशि रिक्शा चालकों से नहीं ले रही है.

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