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शनिवार, 19 अगस्त, 2006 को 13:11 GMT तक के समाचार
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विदेशी इलेक्ट्रॉनिक कचरा बना मुसीबत

भारत में इलेक्टॉनिक कबाड़ बड़ी समस्या बनता जा रहा है
इलेक्टॉनिक कबाड़ विकसित देशों से भारी मात्रा में आता है
भारत में दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक कचरे ने संकट पैदा कर दिया है.

अकेले राजधानी दिल्ली में हर साल 15 से 20 हजार टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा विकसित देशों से आता है.

एक गैर सरकारी संस्था टॉक्सिक लिंक के मुताबिक दिल्ली दुनिया भर की इलेक्ट्रॉनिक कचरे की राजधानी बनता जा रहा है.

टॉक्सिक लिंक के रवि अग्रवाल कहते हैं, "दिल्ली और उसके आसपास इस कचरे को रिसाइकिल करने का काम उद्योग की शक्ल ले चुका है. बेकार हो चुके इन इलेक्ट्रॉनिक सामानों से प्लास्टिक निकाल कर बाल्टियां, खिलौने वगैरह बनाए जाते हैं."

इसके अलावे इस कचरे से सीसा, पारा, जिंक और कैडमियम जैसे खतरनाक रासायन भी निकलते हैं.

समस्या यह है कि रिसायकलिंग की यह पूरी प्रक्रिया असंगठित क्षेत्र के हवाले है जहाँ सुरक्षा उपायों की गंभीर अनदेखी की जाती है.

ये ई-वेस्ट कैमिकल वेस्ट होता है क्योंकि बहुत सारे कैमिक्लस का इस्तेमाल करके ही इलेक्ट्रानिक उपकरण बनाए जाते है जैसे कैडमियम, ज़िंक और क्रोमियम.

इन धातुओं को निकालने के लिए लोग इन्हें तोड़ते-फोड़ते है या फिर पिघलाते है. एक तो वैसे ही ये धातु जहरीले होते है और जब ये शरीर में जाते हैं तो फेफडों, मस्तिष्क और ख़ून में जाकर दुष्प्रभाव छोड़ते हैं.

नियंत्रण नहीं

भारत सरकार का पर्यावरण मंत्रालय इस बात पर विचार कर रहा है और एक-डेढ़ साल से अलग-अलग समूहों के साथ चर्चा चल रही है लेकिन अभी तक भारत में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के लिए कोई गाइडलाइन नहीं है.

 दिल्ली और उसके आसपास इस कचरे को रिसाइकिल करने का काम उद्योग की शक्ल ले चुका है. बेकार हो चुके इन इलेक्ट्रॉनिक सामानों से प्लास्टिक निकाल कर बाल्टियां, खिलौने वगैरह बनाए जाते हैं
रवि अग्रवाल, टॉक्सिक लिंक

इसी का फायदा उठाकर और खतरे को नज़रअंदाज़ कर जहाँ कुछ लोग मुनाफा कमाने में जुटे है वहीं इस उद्योग मे लगे हजारों मजदूरों की जान और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.

मौलाना आजा़द मेडिकल कालेज में हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग के डॉक्टर टीके जोशी का मानना है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले ये मज़दुर काम के दौरान इन रासायनों से संक्रमित हो जाते हैं.

करीब डेढ़ साल पहले ब्रिटिश पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी ने भी इलेक्ट्रॉनिक कचरे पर रिपोर्ट जारी की थी जिसमें उसने माना था कि ब्रिटेन से गैर क़ानूनी रूप से कचरा दक्षिण एशिया में बड़े पैमाने पर निर्यात किया जा रहा है.

इसके अलावा भारत में भी बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा होता है जिसके निबटारे का कोई ठोस प्रावधान मौजूद नहीं है.

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