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यूरेनियम कचरे के साथ जीवन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
11 मई और 13 मई 1998. भारत ने दूसरी बार पोखरण में परमाणु परीक्षण किए. इस परियोजना को कूट नाम दिया गया था बुद्ध मुस्कुराए लेकिन पोखरण से कई किलोमीटर दूर भारत के ही जादूगोड़ा में शायद बुद्ध रोते हैं. जादूगोड़ा के लोग यूरेनियम खनन से निकलने वाले कचरे के साथ ज़िंदगी बिताने को मजबूर हैं. भारत को परमाणु शक्ति बनाने की क़ीमत चुकाते इन्हीं लोगों की कहानी सुनिए सुशील झा से. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अरे आप तो रेडियोएक्टिव हैं'26 मई, 2006 | भारत और पड़ोस बांझ बेटियों की समस्या25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस "दूषित" पानी पीने को मजबूर25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस क्या कहना है यूसीआईएल का25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस कमज़ोर हड्डी वाला मोती25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस बेज़ुबान है गुड़िया25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस जादूगोड़ा की 'जादुई' दुनिया15 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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