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बुधवार, 28 जून, 2006 को 11:28 GMT तक के समाचार
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जेट-सहारा समझौते पर सफ़ाई
जेट एअरवेज़
भारत के विमानन बाज़ार में जेट एयरवेज़ की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है
भारत के नागरिक विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि जेट और सहारा एयर लाइनों का विलय समझौता सरकार की किसी प्रक्रियात्मक देरी की वजह से नहीं टूटा.

जेट एयरलाइंस ने आरोप लगाया था कि सरकार के नीतिगत फ़ैसले में हुई देरी की वजह से सहारा के साथ विलय समझौता पूरा नहीं हो सका है.

नागरिक विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने जेट इस बयान की मद्देनज़र बुधवार को स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सरकार की नीति मई 2006 में ही बन चुकी थी और सिर्फ़ जेट-सहारा समझौते के लिए कोई नई नीति बनाने की कोई ज़रूरत नहीं थी.

प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "अगर कोई असंतुष्ट है तो उसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. जो नीति लागू है वह सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों के आधार पर तैयार की हुई है."

अलबत्ता जेट एयरलाइंस अब कह रही है कि उन्होंने समझौता टूटने के लिए किसी को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया, न सहारा एयरलाइंस को और न ही सरकार को.

ग़ौरतलब है कि नागरिक विमानन क्षेत्र का भारत का अब तक का सबसे बड़ा सौदा पिछले सप्ताह टूट गया था और मामला लखनऊ की एक अदालत में पहुँच गया है.

अदालत का दरवाज़ा सहारा एयरलाइंस ने खटखटाया और अनुरोध किया कि जेट एयरवेज़ को खाते से 500 करोड़ रुपए निकालने से रोका जाए.

दूसरी तरफ़ जेट एयरवेज़ की ओर से ऐसी ही एक याचिका मुंबई की एक अदालत में दायर की गई थी.

लखनऊ की अदालत ने सहारा की याचिका के आधार पर ऐसी रोक लगा दी है और कहा है कि इस मामले को निपटाने के लिए एक पंचाट या मध्यस्थ का गठन किया जाएगा.

सहारा एयरलाइंस ने गुरुवार से अपनी सेवाएँ ख़ुद संचालित करने की घोषणा की थी.

प्रफुल्ल पटेल
पटेल ने कहा कि समझौता सरकार की किसी नीतिगत देरी से नहीं टूटा

उल्लेखनीय है कि भारत की दो प्रमुख निजी विमान कंपनियों जेट एयरवेज़ और सहारा एयरलाइंस के बीच इसी वर्ष जनवरी में 2300 करोड़ रुपए का विमानन विलय सौदा हुआ था.

ग़ौरतलब है कि इस सौदे की समयसीमा मार्च में ही ख़त्म होने वाली थी जिसे तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया था.

इस बढ़ी हुई मियाद के बाद 21 जून की मध्यरात्रि के बाद ये सौदा अपने आप रद्द हो गया था.

बड़ा समझौता

समझौता इसलिए टूट गया था क्योंकि जेट एयरवेज़ का ख़याल था कि यह सौदा काफ़ी महंगा है और वह कुछ रियायतें चाहती थी. अगर यह समझौता लागू हो जाता तो जेट एयरवेज़ सहारा एयरलाइंस के हवाई जहाज़ों और हवाई यातायात मार्गों का इस्तेमाल करती.

जेट एयरवेज़ के मालिक नरेश गोयल हैं जो किसी ज़माने में लंदन में ट्रैवल एजेंट हुआ करते थे. जानकारों का कहना है कि भारत के एयरलाइंस बाज़ार में जेट एयरवेज़ की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि एयर सहारा उस बाज़ार में 9 प्रतिशत हिस्सा रखती है.

एयर सहारा के पास 27 विमान हैं वह भारत के अंदर रोज़ाना 134 उड़ानें भरती है. एयर सहारा के मालिक सुब्रत रॉय हैं.

एयर सहारा ने हाल ही में अमरीका, लंदन और सिंगापुर के लिए भी उड़ानें भरने के लिए भारत सरकार की अनुमति हासिल की थी.

जेट एयरवेज़ के पास 43 विमान हैं और भारत और विदेशों के लिए उसकी 320 उड़ानें होती हैं जो 48 स्थानों पर जाती हैं.

जेट एयरवेज़ को दिल्ली और लंदन के बीच उड़ानें शुरू करने के लिए हाल ही में भारत सरकार के अनुमति मिली थी.

भारत सरकार ने निजी विमान सेवाओं के लिए घरेलू बाज़ार 1990 में खोलना शुरू किया था. उससे पहले तक सरकार कंपनियों एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का ही दबदबा था.

भारत में अर्थव्यवस्था में तेज़ी और किरायों में कमी की बदौलत 2005 में हवाई यातायात में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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