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बुधवार, 29 मार्च, 2006 को 09:50 GMT तक के समाचार
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हवाई जहाज़ की दुकान अब हवाई बात नहीं

हवाईजहाज़
यहाँ कोई भी हवाई जहाज़ ख़रीद सकता है
बंगलौर के एक रिहायशी इलाके, कोरमंगला में जूस की दुकान और एक रेस्टोरेंट के बीच में बनी एक दुकान ने सबको आकर्षित किया है. वजह है कि इस दुकान में हवाई जहाज़ बेचे जाते हैं.

शोरूम के ठीक बीच में एक थोर्प विमान रखा है. इस विमान में दो लोग सवार हो सकते हैं और इसकी क़ीमत है मात्र 45 लाख रूपए. यह भारत की पहली ऐसी दुकान है.

इंडस एविएशन के नाम से हवाई जहाज़ बेचने वाली इस कंपनी का शोरूम छह महीने पहले ही खुला है और इस समय उसे 10 विमानों की आपूर्ति का ऑर्डर भी मिल चुका है.

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि किरण बताते हैं, "निजी और सरकारी कंपनियों से लेकर कई उड़ान प्रेमी हमारी दुकान से विमान ख़रीदना चाहते हैं."

शोरूम में विमानों के रिमोट कंट्रोल मॉडलों से लेकर जहाज़ के छोटे नमूने, खिलौने और विमान चालकों की ज़रूरत की हर चीज़ एक ही छत के नीचे मिलती है.

विमान ख़रीदें

25 वर्षीय माधव, जाक्कूर हवाई अड्डे पर सप्ताह में एक बार हॉबी फ़्लाइंग करते हैं.

 एक आदमी तो विमान इसलिए ख़रीदना चाहता है ताकि वह अपने दिन भर की कमाई एक शहर से दूसरे शहर तक सुरक्षित ले जा सके
महेश आचार्य, शोरूम के अधिकारी

माधव बताते हैं, "जिस तरह लोग घर ख़रीदते हैं, उसी तरह मैं अब जहाज़ ख़रीद सकता हूँ. इससे बेहतर चीज़ बंगलौर में नहीं है."

शोरूम की देखरेख कर रहे महेश आचार्य का कहना है कि इस शोरूम की जानकारी मिलने पर बिहार के एक अमीर किसान ने विमान ख़रीदने में रुचि दिखाई.

महेश बताते हैं, "एक आदमी तो विमान इसलिए ख़रीदना चाहता है ताकि वह अपने दिनभर की कमाई एक शहर से दूसरे शहर तक सुरक्षित ले जा सके."

इस अमरीकी कंपनी ने भारतीय कंपनी से समझौता करके बंगलौर में शोरूम खोला है. बंगलौर में भारतीय वायुसेना के सहित हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियां मौजूद हैं.

कंपनी थोर्प विमान का निर्माण अपनी होसूर स्थित कारखाने में करती है लेकिन सरकारी नियम ऐसे हैं कि निजी विमान ख़रीदना आसान नहीं है.

एक विमानप्रेमी ने कहा कि उदारीकरण के तहत भारत सरकार ने नियमों में कुछ ढील ज़रूर दी है लेकिन दिल्ली स्थित नागरिक उड्डयन मंत्रालय की इजाज़त से ही विमान ख़रीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.

इस प्रक्रिया में हर स्तर पर सरकारी मंज़ूरी आवश्यक है. हालांकि रवि किरण मानते हैं कि सरकारी प्रक्रिया भले ही धीरे चले लेकिन कुछ समय में साफ़ और सरल ज़रूर होगी.

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